सोमवार, सितंबर 07, 2009

ई गवर्नेन्‍स- एनईजीपी - उम्दा प्रशासन लाने के प्रयास

सूचना प्रौद्योगिकी

 

ई गवर्नेन्‍स- एनईजीपी - उम्दा प्रशासन लाने के प्रयास

                                                     -- अभिषेक सिंह उप सचिव (ई-गवर्नेस) ; एनईजीपी जागरूकता एवं संचार के नोडल अधिकारी हैं

       पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्य सरकारों और केन्द्रीय मंत्रालयों ने ई-गवर्नेन्‍स के युग में प्रवेश के लिए अनेक कदम उठाए हैं। लोक सेवाओं की अदायगी को बेहतर और उनकी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए अनेक स्तरों पर सतत प्रयास किये जा रहे हैं।

 

       राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्‍स योजना (एनईजीपी) ई-गवर्नेन्‍स के संबंध में उठाए गए कदमों को देश भर के सामूहिक विजन (अन्तर्दृष्टि) में समेकित कर समग्र रूप से एक साझा लक्ष्य के रूप में देखती है। इसी विचार के  अनुरूप देश के सुदूर गांवों तक पहुंच रहे देशव्यापी बुनियादी ढांचे का विशाल नेटवर्क विकसित हो रहा है। अभिलेखों का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि इन्टरनेट पर आसानी से भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

 

       मूल उद्देश्य उम्दा और सुस्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाना है। आखिरकार, भू-दस्तावेजों  की जानकारी प्राप्त करना, जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट हासिल करना, आयकर  विवरणी दाखिल करना और देश के सर्वोत्तम चिकित्सकों से परामर्श लेना माउस को क्लिक करने जैसा सरल ही होना चाहिए। और यह सब इतना निकट होना चाहिए कि जितना कि पड़ोस की दुकान।

 

राष्ट्रीय योजना की उत्पत्ति

       भारत में ई-गवर्नेन्‍स का परिदृश्य अब सरकारी विभागों के कम्प्यूटरीकरण से आगे बढक़र नागरिकों को केन्द्र में रखते हुए  सेवोन्मुखी और पारदर्शी हो चला है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्‍स योजना का दृष्टिकोण, कार्यान्वयन पध्दति और प्रबंधन संरचना का अनुमोदन सरकार ने 2006 में किया था। पूर्व में उठाये गए विभिन्न कदमों की सफलताओं और विफलताओं  के अनुभवों ने देश की ई-गवर्नेन्‍स रणनीति को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

 

       इस धारणा का उचित संज्ञान लिया गया है कि यदि राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ई-गवर्नेन्‍स में तेजी लानी है तो साझे विजन और रणनीति से निर्देशित कार्यक्रम का दृष्टिकोण अपनाना होगा।

 

       इस दृष्टिकोण को मुख्य और सहायक बुनियादी सुविधाओं के  आदान-प्रदान के जरिए खर्च में पर्याप्त बचत करने वाले उपाय के रूप में देखा गया है। निश्चित मानदंडों के आधार पर एक दूसरे के साथ मिलकर व्यवस्था को चलाया जा सकता है। इस दृष्टिकोण को नागरिकों के समक्ष सरकार का सही दृश्य पेश करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

एनईजीपी यूनिवर्स

       एनईजीपी में केन्द्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के स्तर पर लागू की जाने वाली 27 मिशन रूपी और आठ सहायक घटकों वाली परियोजनाएं  शामिल हैं। सहायक घटकों का उद्देश्य उचित प्रशासनिक और संस्थागत व्यवस्था, मुख्य बुनियादी ढांचा, और ई-गवनर्ेंस अपनाने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचे का गठन करना है। आठ सहायक घटक मिशन रूपी परियोजनाओं से परे हैं और उनकी जवाबदेही सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईटी) और प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत निवारण विभाग (डीएआर एंड पीजी) पर है। डीआईटी के घटक हैं कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर (एसडब्ल्यूएएन, एसडीसी और सीएससी), सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सहायता टेक्निकल असिसस्टेंस, प्रमुख नीतियां कोर पालिसीज और आर एंड डी  डीआईटी और डीएआर एंड पीजी के संयुक्त उत्तरदायित्व के क्षेत्र हैं-एचआरडीप्रशिक्षण, संगठनात्मक संरचना और जागरूकता तथा मूल्यांकन।

 

मिशन रूपी परियोजनाएं

 

                ,ubZthih ds vUrxZr 27 fe'ku ifj;kstuk,a vkrh gSaA buesa ukS dsUæh;] X;kjg jkT; vkSj lkr fofé ea=ky;ksa fokxksa esa QSyh ,dh—r ,e,eih fe'ku :ih ifj;kstuk,a lekfgr gSaA fe'ku eksM का तात्पर्य है कि परियोजनाओं का उद्देश्य और क्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित है, परिमेय निष्कर्ष (सेना स्तर) और सुपरिभाषित मुकाम तथा कार्यान्वयन की समय सीमा दी हुई है। उच्च नागरिक और व्यापार मिलन बिन्दु के आधार पर चिन्हित 27 मिशन रूपी परियोजनाएं इस प्रकार हैं --

केन्द्रीय मिशन रूपी परियोजनाएं

       एमसीए 21, पेंशन, आयकर, पासपोर्ट और वीसा आव्रजन, केन्द्रीय उत्पाद कर, बैंकिंग, एमएनआईसी  यूआईडी, ई-कार्यालय और बीमा।

 

राज्यों की मिशन रूपी परियोजनाएं

       भू-अभिलेख प्रथम चरण, भू-अभिलेख द्वितीय चरण एवं पंजीकरण, सड़क परिवहन, कृषि, पुलिस, कोषालय, नगरपालिकाएं, ई-जिला, वाणिज्यिक कर ग्राम पंचायत और रोजगार कार्यालय।

 

एकीकृत मिशन रूपी परियोजनाएं

       सीएससी, ई-न्यायालय, ईडीआई, इंडिया पोर्टल, एनएसडीजी, ई-बिज़, ई-प्रोक्योरमेंट (वसूली)।

 

सामान्य सेवा केन्द्र

       सरकार ने 6 लाख से अधिक गांवों में एक लाख से अधिक सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना की मंजूरी दे दी है। सरकार ने जो योजना मंजूर की हैं, उसके अनुसार, सीएससी की भारतीय नागरिकों को केन्द्रीय, निजी और सामाजिक क्षेत्र की सेवाओं की एकीकृत अदायगी का प्रारंभिक बिन्दु के रूप में कल्पना की गई है। इसका उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जो सरकारी, निजी और सामाजिक क्षेत्र के संगठनों को उनके सामाजिक और व्यावसायिक लक्ष्यों विशेषकर देश के सुदूर गांवों की जनसंख्या के कल्याण से जुड़े विषयों को आईटी आधारित और अन्य सेवाओं के माध्यम से जोड़ सके।

 

       सीएससी, ई-गवर्नेन्‍स, शिक्षा, स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में उच्च स्तरीय और किफायती वीडियो, आवाज और आंकड़ों की जानकारी सेवायें प्रदान करने में सक्षम हैं। सीएससी की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदन पत्र को डाउनलोड करने, प्रमाण पत्र, बिजली, टेलीफोन, पानी और अन्य सेवाओं के बिलों के भुगतान जैसी वेब-योग्य ई-गवर्नेन्‍स से जुड़ी सेवायें प्रदान कर सकेगा।

 

स्वान (एसडब्ल्यूएएन) के साथ उड़ान भरना और एसडीसी'ज के जरिये सेवा प्रदान करना

       राज्य व्यापी एरिया नेटवर्क (एसडब्ल्यूएएन) योजना एनईजीपी की तीन प्रमुख अधोसंरचनात्मक स्तंभों में से एक है। मार्च 2005 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित इस योजना के लिए अनुमानत: 33 अरब 34 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य केन्द्र शासित प्रदेश के मुख्यालय को जिला मुख्यालय से और जिला मुख्यालय को (2 मेगाबाइट्स प्रति सेकेंड) ब्लाक मुख्यालयों से आपस में जोड़ते हुए राज्य व्यापी एरिया नेटवर्क (स्वान-एसडब्ल्यूएएन) स्थापित करना है। यह सुविधा न्यूनतम 2एमवीपीएस (मेगा बाइट्स प्रति सेकेंड) की लीज्ड लाइन पर दी जाएगी। योजना का उद्देश्य जी 2जी और जी2सी सेवायें प्रदान करने के आशय से एक सुरक्षित घनिष्ठ उपयोगकर्ता समूह (सीयूजी) सरकारी नेटवर्क स्थापित करना है।

 

       परियोजना की अवधि 5 वर्ष है जबकि पूर्व परियोजना क्रियान्वयन अवधि  18 महीने की है। एक केन्द्रीय योजना के रूप में अमल में लायी जा रही इस परियोजना के लिए 20 अरब 5 करोड़ रुपए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने अनुदान के रूप में दिये हैं। शेष राशि अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता (एसीए) के रूप में मिलने वाली राज्य योजना के तहत प्राप्त होगी।

 

       राज्य आंकड़ा केन्द्र (स्टेट डाटा सेन्टर-एसडीसी)- एनईजीपी के तहत एक और प्रमुख संरचनात्मक स्तंभ है। जी-2जी, जी2सी और जी2बी सेवाओं की उम्दा इलेक्ट्रॉनिक अदायगी के लिए सेवा व्यवस्था  उसके इस्तेमाल और बुनियादी ढांचे को सुगठित बनाने के लिए राज्यों में एसडीसीज स्थापित करने का प्रस्ताव है। राज्यों द्वारा ये सेवायें राज्य व्यापी एरिया नेटवर्क (स्वान) और सामान्य सेवा केन्द्र (सीएससी) की ग्रामीण स्तर  तक की कनेक्टीविटी  (संचार संपर्क) जैसी बुनियादी संचार सुविधाओं के सहयोग से दोषरहित ढंग से मुहैया करायी जा सकती हैं।

 

       राज्य आंकड़ा केन्द्र (एसडीसीज) राज्य के केन्द्रीय भंडार, सुरक्षित आंकड़ा कोष, ऑन लाइन सेवा अदायगी, नागरिक सूचना  सेवा पोर्टल, राज्य इन्टरनेट पोर्टल, आपदा की भरपाई, सुदूर प्रबंधन और सेवा एकीकरण का कार्य  करते हुए  अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। एसडीसी'ज की सहायता से आंकड़ा प्रबंधन, आईटी संसाधन प्रबंधन, तैनाती और अन्य खर्चों में अधिक से अधिक कमी लाई जा सकती है।

 

 

रासायनिक उर्वरक का विकल्प ''नाडेप कम्पोस्ट''

रासायनिक उर्वरक का विकल्प ''नाडेप कम्पोस्ट''

ग्वालियर 06 सितम्बर 09। अधिकतर कृषक मनमाने तरीके से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं, परिणाम स्वरूप हमारे खेतों की मृदा संरचना खराब हो रही हैं तथा उत्पादन स्थिर। इस कमी को दूर करने के लिये नाडेप कम्पोस्ट कारगर उपाय है। नारायण देवराज पण्डरी पांडे, नाडेप टांका ग्राम पुसर जिला यवतमाल महाराष्ट्र द्वारा नाडेप कम्पोस्ट की विधि विकसित की गई। नाडेप कम्पोस्ट प्रदूषण मुक्त एवं रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में खेतों के लिये अच्छी खाद सिध्द हुई  है। यह भूमि में रासायनिक उर्वरकों से उत्पन्न विकारों को दूर करने के साथ-साथ मृदा संरचना  को भी सुधारती है एवं आर्थिक दृष्टि से भी लाभदायक है । साथ ही कम से कम गोबर का उपयोग करके अधिक से अधिक खाद बनाने की यह उत्तम पध्दति है। इस पध्दति द्वारा एक गाय के वार्षिक गोबर से 80 से 100 टन यानि लगभग 150 गाड़ी खाद बनाई जा सकती है । इस खाद में नत्रजन 0.5 से 1.5 प्रतिशत, स्फुर 0.5 से 0.9 प्रतिशत, पोटाश 1.2 से 1.4 प्रतिशत व इसके अतिरिक्त अन्य सूक्ष्म मृदा पोषक तत्व भी पाये जाते हैं।

       नाडेप खाद तैयार करने के लिये तीन प्रकार के नाडेप टांका बनाये जा सकते हैं। पक्के नाडेप टांका, टटिया नाडेप या कच्चे नाडेप टांका तथा भू नाडेप टांका। आकार में टांका 10 फीट लम्बा, 6 फीट चौड़ा एवं 3 फीट ऊंचा अथवा 12 फीट लम्बा, 5 फीट चौड़ा और 3 फीट ऊंचा बनाया जाना चाहिये।

       पक्के नाडेप टांका ईंटों द्वारा बनाये जाते हैं । ईंटों को जोड़ते समय तीसरे छठे एवं नवें रद्दे में छेद बनेंगे । इस प्रकार हर दो रद्दे की जुड़ाई करते समय हर ईट जुड़ाई के बाद 7 इंच का छेद छोड़कर जुड़ाई करें । इस प्रकार चारों दीवारों में छेद बनेंगें । छेद इस प्रकार रखिये कि पहली लाईन के दो छेदों के मध्य मे दूसरी लाईन के छेद आयें और दूसरी लाईन के छेदों के मध्य में तीसरी लाइन के छेद आयें। इस टांके की अंदर और बाहर की दीवारों और फर्श को गोबर मिट्टी से लीप दें। बरसात व अत्याधिक गर्मी में नाडेप टांके के ऊंपर अस्थाई छाया दें ।

       कच्चे या टटिया नोडप बांस, बेशरम आदि की लकड़ियों से बनाते हैं । इसमें हवा का आवागमन स्वाभाविक रूप से छेद होने के कारण अपने आप ही होता है । इसी प्रकार भू नाडेप टांका परम्परागत तरीके के विपरीत बिना गड्डा खोदे जमीन पर एक निश्चित आकार 12 फीट लम्बा, 5 फीट चौड़ा और 3 फीट ऊंचा अथवा 10 फीट लम्बा, 6 फीट चौड़ा और 3 फीट ऊंचा आकार के अनुसार ले-आउट देकर बनाया जाता है । भू-नाडेप टांका आयताकार व व्यवस्थित ढेर को चारों ओर से गीली मिट्टी से लीपकर बंद कर दिया जाता है । बंद करने के दो तीन दिन बाद गीली मिट्टी के हल्के सख्त होने पर गोलाकार अथवा आयताकार टीन के डिब्बे से ढेर की लम्बाई व चौड़ाई में 9-9 इंच के अंतर पर 7 से 8 इंच गहरे छिद्र बनाये जाते हैं । इन छिद्रों से हवा का आवागमन होता है और आवश्यकता पड़ने पर पानी भी डाला जा सकता है। ताकि नाडेप टांका में पर्याप्त नमी रहे और विघटन क्रिया अच्छी तरह से हो सके।

       नाडेप टांका को भरने के लिये वानस्पतिक व्यर्थ पदार्थ जैसे सूखे पत्ते, छिलके, डण्ठल, भूसा आदि 1400 से 1500 किलोग्राम जो लगभग 400 घनफीट होगा । गोबर 100 से 120 किलो (8 से 10 टोकरी) अथवा गैस बॉयोगैस प्लांट निकली स्लरी भी उपयोग में लाई जा सकती है । सूखी छनी मिट्टी-खेती की या नाले वगैरह की मिट्टी लें। मात्र 1750 किलो गौमूत्र डालें तथा 1500 से 2000 लीटर (8-10 ड्रम) पानी कम्पोस्ट खाद की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये गौमूत्र एवं पशुओं का मूत्र मिट्टी में मिलाकर उसका उपयोग करें ।

       नाडेप टांके को भरने से पहले टांके के अंदर की दीवार एवं फर्श पर गोबर पानी का घोल छिड़क कर अच्छी तरह गीला कर लें तत्पश्चात पहली परत के रूप में वानस्पतिक पदार्थ 6 इंच भरें । इस 30 घन फीट में 100 से 110 किलो सामग्री आयेगी । वनस्पतिक पदार्थ के साथ 3 से 4 प्रतिशत कड़वा नीम या पलाश की हरी पत्ती मिलाना लाभदायक होगा जिससे दीमक का भी नियंत्रण होगा ।

       दूसरी परत में गोबर का घोल 125 से 150 लीटर पानी में 4 किलो गोबर घोलकर पहली परत पर इस प्रकार छिड़कें कि पूरी वनस्पति अच्छी तरह भीग जाये। गर्मी के मौसम में पानी की मात्रा अधिक रखें ।  

       तीसरी परत में साफ सूखी छनी मिट्टी , भीगी हुई वनस्पति परत पर वास्तविक वजन की 50 प्रतिशत यानी 50 से 55 किलो काली मिट्टी समतल बिछा दें । उस पर थोड़ा पानी छींट दें । टांके को इस प्रकार तीन परतों में क्रम से लगातार टांके के ऊपर 1.5 फीट ऊंचाई तक झोंपड़ीनुमा आकार में भरते जाइये । 11 से 12 तहों में टांका भर जायेगा । अब भरे टांको को सील कर दें । भरी सामग्री के ऊपर 3 इंच की मिट्टी 400 से 500 किलो मिट्टी की तह जमा दें और उसे गोबर के मिश्रण से व्यवस्थित रूप से लीप दें । इस पर दरारें पड़ें तो इन्हें पुन: लीपते रहें ।

       15 -20 दिन बाद खाद सामग्री सिकुड़कर टांके के मुंह से 8 से 9 इंच नीचे चली जायेगी । तब पहले की भराई की तरह वानस्पतिक पदार्थ, गोबर घोल, छनी मिट्टी की परतों से पुन: टांके की सतह से 1.5 फीट ऊंचाई तक पहले जैसा भरकर लीप कर सील कर दें । 90 से 120 दिन में तैयार खाद गहरे भूरे रंग की बन जाती है और उसकी दुर्गन्ध समाप्त होकर एक अच्छी खुशबू आती है । खाद में 15 से 20 प्रतिशत नमी रहना ही चाहिये । इस खाद को एक वर्ग फीट में 35 तार छिद्र वाली छलनी से छान लेना चाहिये , छनी हुई नाडेप कम्पोस्ट खाद उपयोग में लाना चाहिये । छलनी के ऊंपर का अधपका कच्चा माल फिर से खाद बनाते समय वानस्पतिक पदार्थ के साथ उपयोग किया जा सकता है । एक टांके से लगभग 2.5 से 2.7 टन खाद मिलता है जो एक हैक्टेयर क्षेत्र के लिये पर्याप्त होता है । नाडेप कम्पोस्ट की सरल तकनीक सहज ही कृषक अपनाकर दोहरा लाभ ले सकते हैं ।

 

नाडेप कम्पोस्ट की विशेषता

इस विधि से तैयार खाद परम्परागत तरीके से तैयार की गई खाद से 3 से 4 गुना अधिक प्रभावशाली है । परम्परागत खाद से नींदा बढ़ते हैं । जबकि नाडेप कम्पोस्ट से नींदा में वृध्दि नहीं होती । क्यों कि नाडेप कम्पोस्ट में गर्मी के कारण नींदा बीजों की उगने की शक्ति नष्ट हो जाती है। नाडेप कम्पोस्ट के उपयोग से कृषक रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाओं के दुष्परिणाम से बचेगा और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। नाडेप कम्पोस्ट पध्दत्ति सम्पूर्णतया अप्रदूषणकारी है व इसके उपयोग से फ्यूमिक एसिड बनने की प्रक्रिया में गति आती है जिसके फलस्वरूप पर्याप्त ह्मूमस बनने की प्रकिया भूमि की जीवंतता को बनाये रखती है ।

 

गोहद-तेन्दूखेड़ा विधानसभा उप चुनाव-2009 : मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित

गोहद-तेन्दूखेड़ा विधानसभा उप चुनाव-2009 : मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित

भोपाल 06 सितम्बर 09। आगामी 10 सितम्बर को भिण्ड जिले के गोहद और नरसिंहपुर जिले के तेन्दूखेड़ा निर्वाचन क्षेत्रों में विधानसभा उपचुनाव-2009 सम्पन्न हो रहे हैं। राज्य शासन ने दोनों ही निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

 

रविवार, सितंबर 06, 2009

जिलों में आज रविवार को शिक्षक समस्या निवारण शिविरों का आयोजन

 

जिलों में आज रविवार को शिक्षक समस्या निवारण शिविरों का आयोजन

जिला, ब्लॉक स्तर की समस्याओं का निराकरण मौके पर होगा

Bhopal:Saturday, September 5, 2009:Updated 17:00IST

राज्य सरकार शिक्षकों/अध्यापकों की लंबित समस्याओं का निराकरण रविवार 6 सितम्बर को जिलोंे में मौके पर ही कराने जा रही है। प्रदेश के सभी पचास जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में शिक्षक समस्या निवारण शिविर लगाये जा रहे हैं।

जिला स्तरीय इन शिविरों में लोक शिक्षण व राज्य शिक्षा केन्द्र के आयुक्तद्वय द्वारा नामांकित अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जो स्थल पर ही समस्याओं का निराकरण करायेंगे। शिविर में प्राप्त होने वाली जिन समस्याओं का संबंध संचालनालय अथवा राज्य शासन से है, उनकी नस्तियां तैयार करवाकर नामांकित अधिकारी उन्हें मुख्यालय लायेगें। जिनका निराकरण आगामी 15 दिन में किया जायेगा। शासन द्वारा शिक्षक समस्या निवारण शिविर की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है। जिसके अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) शिविर के संयोजक बनाये गये है। ज्यादा से ज्यादा शिक्षकों को शिविर स्थल पर उपस्थित होने के लिए कहा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने विकासखण्डवार समस्याओं के निराकरण हेतु विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को दायित्व सौपें है।

डीईओ, बीईओ कार्यालयों एवं शाला स्तर पर लंबित प्रकरणों को विकासखण्डवार सूचीबद्ध करने के निर्देश दिये गयें है। शिविर में प्रकरणवार की गई कार्रवाई तथा निराकरण की स्थिति अपने रिकार्ड में दर्ज कर उसे शिक्षकों के अवलोकन के लिए प्रदर्शित करने को भी कहा गया है। शिक्षकों/अध्यापकों द्वारा शिविर में ही प्रस्तुत समस्याओं व प्रकरणों को पंजीबद्ध कराने की व्यवस्था की गई है। साथ ही उनका मौके पर ही यथासंभव निराकरण कराने के निर्देश दिये गये है। शिविर में निपटाएं गये प्रकरणों की सूची सहित वस्तुस्थिति का प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा नामांकित अधिकारी को प्रस्तुत किया जायेगा।

 

कौन अधिकारी कहां रहेगा

संभाग का नाम

स.क्रं.

जिले का नाम

अधिकारी का नाम

सागर संभाग

1

सागर

श्री पी.एल.अहिरवार, अपर संचालक, लोक शिक्षण

2

दमोह

श्री नितिन सक्सेना, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

3

छतरपुर

डॉ. अवध किशोर मिश्रा, संचालक, लोक शिक्षण

4

पन्ना

श्री डेविड डेनियल, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण

5

टीकमगढ़

श्री आलोक खरे, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

जबलपुर संभाग

6

जबलपुर

श्री अतुल डनायक, प्राचार्य, उ.मा.वि, राज्य शिक्षा केन्द्र

7

कटनी

श्रीमती एस. बावरिया, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग, जबलपुर

8

डिण्डोरी

श्रीमती विल्सन, सहायक संचालक, कार्या. संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण जबलपुर संभाग

9

छिंदवाड़ा

श्री बी.के. पटेल, विधि प्रकोष्ठ, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, जबलपुर संभाग

10

नरसिंहपुर

श्री अनन्त राम पाठक, संचालक, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान, जबलपुर

11

सिवनी

श्री एस.एल. नायक, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण

12

मण्डला

प्राचार्य, शिक्षा महाविद्यालय, जबलपुर

13

बालाघाट

श्री राजेन्द्र प्रसाद, उप संचालक, लोक शिक्षण

 

इंदौर संभाग

रीवा संभाग

ग्वालियर संभाग

उज्जैन संभाग

14

उज्जैन

श्री शेखर वर्मा, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

15

शाजापुर

श्री बलवन्त शर्मा, उप संचालक, लोक शिक्षण

16

रतलाम

श्री ओ.पी. रघुवंशी, प्रभारी संयुक्त संचालक, विधि प्रकोष्ठ इन्दौर

17

मंदसौर

श्री ए.के. पारीक, प्राचार्य, उ.मा.वि. राज्य शिक्षा केन्द्र

18

नीमच

श्री संजय पटवा, प्राचार्य, उ.मा.वि. राज्य शिक्षा केन्द्र

19

देवास

डॉ. कौशल किशोर पाण्डेय, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण

भोपाल संभाग

20

भोपाल

श्रीमती अनघा देव, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

21

रायसेन

श्रीमती रागिनी उपलवार, प्राचार्य, उ.मा.वि, राज्य शिक्षा केन्द्र

22

सीहोर

डॉ. ओ.पी. शर्मा, संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, भोपाल संभाग

23

होशंगाबाद

श्री वी.एस. सक्सेना, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण

24

बैतूल

श्री जी.आर. वाईकर, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

25

हरदा

डॉ. महेश जैन, सहायक संचालक, लोक शिक्षण.

26

राजगढ़

श्री के.पी.एस.तोमर, सहायक संचालक, कार्या.संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, भोपाल संभाग

27

विदिशा

श्रीमती कोकिला यादव, उप संचालक, लोक शिक्षण

28

इंदौर

श्री रमेश भण्डारी, अपर मिशन संचालक, राज्य शिक्षा केन्द्र

29

झाबुआ

डॉ. महेश व्यास, प्राचार्य, डाईट जिला धार

30

धार

श्री एस.बी.सिंह., संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, इंन्दौर संभाग

31

अलीराजपुर

प्राचार्य, डाईट, अलीराजपुर

32

खंडवा

डॉ. रामधार मावलीय, सहायक संचालक, लोक शिक्षण, इंदौर संभाग

33

बुरहानपुर

डॉ. सुभाष पाचपौर, अपर संचालक, लोक शिक्षण

34

खरगौन

श्री पी.आर.तिवारी, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

35

बड़वानी

प्राचार्य, डाईट खरगौन

36

रीवा

डॉ. रश्मि शुक्ला, प्राचार्य, शास. शिक्षा महाविद्यालय, रीवा

37

सीधी

श्री ब्रजेश मिश्रा, सहायक संचालक, कार्या. संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण रीवा संभाग

38

सतना

श्री एस.एस.एच.रिजवी, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

39

उमरिया

श्री किशोर कुमार सोनी, ओ.एस.डी, लोक शिक्षण

40

शहडोल

श्री राजकुमार सक्सेना, ओ.एस.डी. लोक शिक्षण

41

अनूपपुर

श्री जी.एस.तोमर, ओ.एस.डी., लोक शिक्षण

42

सिंगरोली

श्री सी.डी.द्विवेदी, सहायक संचालक, कार्या.संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, रीवा संभाग

43

ग्वालियर

श्री ए.के. दीक्षित, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केन्द्र

44

भिण्ड

श्री धीर सिंह सिकरवार, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, ग्वालियर संभाग

45

मुरैना

श्रीमती ममता चतुर्वेदी, सहायक संचालक, कार्या. संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, ग्वालियर

46

श्योपुर

श्री बी.पी.अहिरवार, संयुक्त संचालक, विधि प्रकोष्ठ, ग्वालियर

47

शिवपुरी

श्री दीपक पाण्डे, सहायक संचालक, कार्या. जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिवपुरी

48

दतिया

श्री डी.एस.कुशवाह, सहायक संचालक, लोक शिक्षण

49

अशोकनगर

श्री के.पी. चतुर्वेदी, सहायक संचालक, कार्या. संयुक्त संचालक, रीवा संभाग

50

गुना

श्री विकास जोशी, प्राचार्य, शास. महात्मा गाँधी, उ.मा.वि., भेल भोपाल