रविवार, अक्टूबर 11, 2009

उपभोक्ता फोरम में शिकायत की तो फर्जी बिजली चोरी का केस बना डाला, बिजली अधिकारीयों के खिलाफ जालसाजी का आपराधिक प्रकरण दर्ज

उपभोक्ता फोरम में शिकायत की तो फर्जी बिजली चोरी का केस बना डाला, बिजली अधिकारीयों के खिलाफ जालसाजी का आपराधिक प्रकरण दर्ज

नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

मुरैना 10 अक्टूबर 09, बिजली देने को नहीं और बिल आसमान से टपक कर तीन गुने और चार गुने आते किस्से तो मुरैना में रोजाना ही सैकड़ों सुनने को मिलते हैं, बिजली नहीं मिलने की शिकायत करने वालों पर पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज करा कर जनता की शिकायती आवाज दबा कर बोलती बन्द कराना यह किस्से भी सैकड़ों मुरैना में सुनते आये हैं ! चलो एक आम बात है सरकार की दादा गिरी है, जनता गरीब की लुगाई है सो सरकारी भौजाई है चाहे जैसे मसलो, कुचलो, कूटो पीटो !

हर चीज की इन्तिहा होती है, असली ट्रान्सफार्मर मोहल्लों से उखाड़ कर कारखानों को बेच दिये, चोरी के राजस्थानी और चम्बल के ग्रामीण क्षेत्रों से चुराये ट्रान्सफार्मरों पर रंग रोगन कर बिजली वालों को मोहल्लों में खपाते भी सैकड़ो बार हमने देखा, मरे मराये ट्रान्सफार्मरों को भी संघर्ष करते और बार बार दम तोड़ते तथा उनकी मरम्मत के नाम पर सैकड़ों फर्जी बिल बनते देखे हैं ! बिजली वालों को लोड चेकिंग के नाम पर जनता को हड़काते भी देखा, सब कुछ देखा पर अंत तो रावण का भी हुआ कंस का भी और दुर्योधन का भी आखिर महिषासुर का भी !

आखिर वक्त उनका भी आ गया और वे शहर के एक वरिष्ठ अभिभाषक से पंगा ले बैठे ! वकील साहब ईमानदारी से बिजली कनेक्शन लेकर ईमानदारी से बिल भुगतान करने वाले आदमी थे, लेकिन अपनी लपक पड़ी हुयी बुरी आदत के चलते बिजली वाले उनसे भी रिश्वत मांग बैठे, गोया तुर्रा ये कि वकील साहब के बिजली कनेक्शन के साथ न्यूट्रल वायर देना बिजली कम्पनी वालों को रास नहीं आया, अब देखें बिजली का कैसे उपयोग करेंगें वकील साहब ! बेचारे वकील साहब ने सैकड़ों हजारों अनुनय विनय बिजली साहबों से लिखित और मौखिक कर डालीं पर ससुरा मेरा टेसू झईं अड़ा, खाने को मांगे दही बड़ा, वाली तर्ज पर 5000 रू. ठोक के रिश्वत मांगते रहे पठठे बिजली वाले, नही तो न्यूट्रल नहीं देंगें ! वकील साहब को इस दरम्यान बिजली के बिल भी मिलते रहे, और भुगतान भी होते रहे ! आखिर कार वकील साहब ने अपनी शिकायत मुरैना जिला उपभोक्ता फोरम में करके न्यूट्रल वायर दिये जाने की गुजारिश की !

जैसे ही उपभोक्ता फोरम का नोटिस बिजली वालों को मिला बिजली वालों की भवें रावण की तरह वक्राकार और ऑंखें रेड रोजी हो गयीं, बिजली वालों ने अपने वकील साहब को लम्बी चोड़ी मलाई चटाई (काफी समय से चटा रहे हैं) और पूछा हे प्रभु लालबुझक्कड़ जे साला उपभोक्ता तो वकील है और टेंशन कर रिया है, जाको का इलाज है, बिजली वालों के वकील साहब बोले लेओ कर लेओ बात, लाल बुझक्कड़ बुझ के फिर न बूझो कोय, लोड चेक के नाम पे चोरी केस कर देयो !

बिजली वाले लपक के गये, भूल गये कि मामला पहले से अदालत में है और चलती सुनवाई में किसी साक्ष्य को छेड़ना या बिगाड़ना या खत्म करना अपराध होवे है , ससुरी अदालत और कानून की ऐसी तैसी करके खेंच के एक अंग्रेजी की बोतल में फर्जी पंचनामा तैयार कर डाला और पंचनामा जो विद्युत अधिनियम की किसी एक धारा (126/135/138) में बनाना था ससुरा तीनों धाराओं में एक साथ ठोक दिया, अपनी टेबल पर बैठे पंचनामा तैयार करने का मजा ही कुछ और होता है, हालांकि अधिनियम के मुताबिक उपभोक्ता को आपत्ति करने के लिये 7 दिन का समय भी देना पड़ता है और सक्षम उच्च अधिकारी के यहाँ यह आपत्ति उपभोक्ता द्वारा करनी होती है , इस मामले में करिश्मा यह किया गया कि उपभोक्ता को कानों कान खबर न हुयी और उसके खिलाफ पंचनामा बना कर बिजली चोरी का मामला बनाने का पूर्व नियोजित षडयंत्र वकील साहब बिजली वाले की टेबल पर बैठ कर रच लिया गया तथा बिजली घर की टेबल पर इसे अंजाम भी दे दिया गया !

बिजली वाले वकील साहब और बिजली वाले अफसर बस जरा सी चूक यह कर गये कि उपभोक्ता के उपकरणों के नाम गलत लिख गये और उनकी वाटेज खपत भी गलत लिख गये, हालांकि विद्युत अधिनियम में उपकरण के नाम के साथ उसकी वाटेज खपत की सारणी दी हुयी है , पर नशा तो नशा है चाहे पद में मगरूर अफसरी का हो या बोतल का या किसी हसीना के मोहपाश में फंसे किसी दिलफेंक का ! पूरे 28 हजार 500 रूपया का चोरी का केस वकील साहब पर ठोक दिया और पंचनामे में लिख दिया कि वकील साहब ने दस्तखत करने से इंकार किया प्रतिरोध के कारण जप्ती नहीं हो सकी ! इंजीनियर साहब को वकील साहब ने अपने प्रीमाइसेज में घुस जाने दिया और वहाँ के बर्तन भांड़े भी दिखा डाले लेकिन फिर भी प्रतिरोध किया कागज पर दस्तखत से इंकार किया है न मजे की बात, यानि दो विरोधाभासी बातें जो कानून में कभी एक साथ नहीं होतीं पर इंजीनियर साहब ने कर डालीं यानि पूरा घर बेहिचक टटोल आये उसका प्रतिरोध वकील साहब ने नहीं किया पर फिर भी वकील साहब ने प्रतिरोध किया ! जबकि सच यह था कि वकील साहब वहाँ पिछले कई साल से रहते ही नहीं थे और यह प्रीमाइसेज कई सालों से किसी अन्य पर किराये पर था और म.प्र. सरकार इस प्रीमाइसेज का हर साल निरीक्षण करके बाकायदा मौका मुआयना करके एक रिपोर्ट जारी करती चली आ रही है वह भी बाकायदा सरकारी कागज पर सील सिक्के लगा कर ! यानि प्रीमाइसेज वकील साहब पर नहीं बल्कि किसी और पर था ! फिर भी केस वकील साहब पर ही ठोक दिया कसूर यह था कि कई साल पहले वकील साहब वहाँ रहते थे ! यह भी मजे की बात रही कि 5000 रू तक के मामलों की सुनवाई मुरैना में ही वरिष्ठ अधिकारी कर सकते हैं लेकिन उससे ऊपर के यानि 28 हजार का मामला कानून के मुताबिक ई.डी./चीफ इंजीनियर साहब ही सुन सकते हैं लेकिन फर्जी पंचनामा बनाते बनाते इंजीनियर बिजली जूनियर इंजीनियर ने सभी वरिष्ठ अधिकारीयों को ठेंगा दिखाते हुये स्वयं पंचनामा बनाने वाले जूनियर इंजीनियर ने खुद के यहाँ ही सुनवाई की तारीख ल्रगा कर ठोक के जालसाजी और कूटरचना कर डाली ! इसमें एक पूर्व कार्यपालन यंत्री भी शामिल था !

वकील साहब द्वारा उपभोक्ता फोरम में चल रही सुनवाई में इसे सबसे पहले जालसाज इंजीनियरों ने वकील साहब को चोर बताते हुये उनका प्रकरण खारिज कराने के लिये कूटरचित प्रतिवेदन और जालसाजी से तैयार दस्तावेजों का उपयोग किया किन्तु उपभोक्ता फोरम में यह फर्जीवाड़ा उनके काम नहीं आ सका उपभोक्ता फोरम ने वकील साहब को तुरन्त न्यूट्रल वायर दिये जाने और उपभोक्ता अदालत में मामला आने के बाद चोरी का केस बनाये जाने से फर्जीवाड़ियों के मंसूबे नाकामयाब कर दिये ! उपभोक्ता फोरम में जवाब देने से पूर्व जालसाजों और कूटरचियों ने अपना केस और जवाबदावा पुख्ता बनाने के लिये वकील साहब के खिलाफ इस्तगासा लगा कर सेशन कोर्ट में केस भी चालू करा दिया था ! यानि दो दो बार दो अदालतों में जाली कूटरचित दस्तावेज ठोक के इस्तेमाल किये गये ! सेशन अदालत ने भी जाली व कूटरचित दस्तावेजों की जाँच कराने, विद्युत अधिनियम के प्रावधानों का पूर्णत: पालन हुये बगैर बिना पूर्व परीक्षण न केवल केस को अदालत में पंजीकृत कर लिया बल्कि बिना किसी कार्यवाही के बिना इस्तगासा की अवाश्यकतानुसार गवाही बयान या परीक्षण के सीधे उपभोक्ता पर चार्ज फ्रेम कर डाले एवज में जज साहब को दो लाख रूपये का अप्रत्यक्ष लाभ जिसमें नकदी 30 हजार रू. शामिल है का लाभ फर्जीवाड़ियों ने पहुँचा दिया और जज साहब अंधे होकर कानून की मंशा और चाल से सर्वथा परे सुनवाई में तथा हर तारीख पर उपभोक्ता को हृास कर निरूत्साहित व गरियाने में लगे रहे !

मामला अंतत: मेरे पास आया और लगभग पूरे 60 दिन की दिन रात की इन्वेस्टीगेशन से मैं खुद भौंचक्का रह गया और इस प्रकार का मामला जिसमें इंजीनियर, सरकार, और अदालत सभी शामिल हैं के बारे में आये निषकर्षों व साक्ष्यों ने मेरे रोंगटे खड़े कर दिये ! जैसे जैसे इन्वेस्टीगेशन आगे बढ़ा और भी कई हैरत अंगेज राज खुलते चले गये हालांकि अन्य केसों को मैंने अपनी इन्वेस्टीगेशन में शामिल नहीं किया लेकिन जो राज सामने आये वे इतने खतरनाक हैं कि मुरैना में भारी गड़बड़ी की ओर सीधा संकेत देते हैं और यह गड़बड़ वकील, पुलिस और अदालतों तक अपनी जड़ें पेवस्त किये हुये है, जिसका खुलासा फिर आगे कभी करूंगा लेकिन हमारे देश व लोकतंत्र के बदनुमा दाग हमारे आस पास ही हैं और घुन की तरह देश को खोखला बनाने में जुटे हैं !

पुलिस का कानून पालन - कानून की ऐसी तैसी

इस मामले में अपनी इन्वेस्टीगेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मैंनें फरियादी वकील साहब को तत्काल कानूनी कार्यवाही करने की सलाह दी और वकील साहब ने मेरी सलाह के मुताबिक एक एफ.आई.आर. सिविल लाइन्स पुलिस थाने को 24 सितम्बर को दी थाने द्वारा इसकी पावती भी वकील साहब को दी गयी लेकिन दूसरे दिन दोबारा थाने बुलाया गया, वकील साहब साथ में मुझे भी ले गये मैंने पूरे केस को पुलिस के सामने तड़ातड़ एक्सप्लेन और प्रूव भी कर दिया , लेकिन मेरे सामने ही पुलिस पुलिस न रही और अदालत बन गयी (किस केस को दर्ज करना है किसको नहीं यह पुलिस की मर्जी है, दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा में पुलिस को केस दर्ज करने हेतु चयन का अधिकार नहीं है) मगर पुलिस केस का चयन करती है कि केस रजिस्टर करना है कि नहीं, मैंने अंग्रेजो की जमाने की पुलिस सन 2009 में मुरैना में देखी हालांकि आगे की कानूनी प्रक्रिया भी मैंनें चेक करवाने के लिये दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 (3) के तहत पंजीकृत डाक द्वारा 26 सितम्बर को मुरैना पुलिस अधीक्षक को भिजवाया मगर हैरत अंगेज रूप से वहाँ भी दण्ड प्रक्रिया संहिता की यह धारा कचरे की टोकरी में फेंक दी गयी, यानि सौ बातों की एक बात नो कानून, नो पालन, मनमर्जी मुताबिक मुरैला पुलिस खुद ही अदालत बन कर फैसला करती है कि किस केस का क्या करना है ! जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस सम्बन्ध में कई सख्त रूलिंग दी हैं मगर उसकी रूलिंग मुरैना आकर निष्प्रभावी हो जातीं हैं !

अंतत: यह प्रकरण 8 अक्टूबर को म.प्र. पुलिस महानिदेशक एस.के. राउत के यहाँ इण्टरनेट के जरिये क्रमांक Morena/1615/2009 पर पंजीबध्द किया गया ! अब देखते हैं इसमें आगे क्या होता है, फिलहाल इस प्रकरण का काफी हिस्सा लम्बे चौड़े आर्थिक अपराध , भ्रष्टाचार, अनुपात हीन संपत्ति, गबन और रिश्वत तथा उच्च अधिकारीयों व पुलिस एवं न्यायालय से जुड़ा होने के कारण आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो म.प्र. तथा सी.बी.आई की ओर भी जा रहा है, देखते हैं वहाँ भी क्या होता है तथा फरियादी वकील साहब म.प्र. उच्च न्यायालय में इसे दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 में भी ग्वालियर में प्रस्तुत करने जा रहे हैं देखते हैं उच्च न्यायालय इस सम्बन्ध में क्या आदेश जारी करते हैं !

फरियादी द्वारा प्रस्तुत प्रथम सूचना रिपोर्ट नीचे यथावत प्रस्तुत है जो कि सिविल लाइन थाना मुरैना में 24 सितम्बर को तथा 26 सितम्बर को एस.पी. मुरैना को भेजी गयी किन्तु कायम नहीं होने पर पुलिस महानिदेशक के यहाँ दर्ज कराई गयी !           

 

प्रति,

     श्रीमान थाना प्रभारी महोदय,

      थाना सिविल लाइन्स मुरैना

 

विषय :- अधोवर्णित आरोपीगण के विरूध्द जालसाजी, कूटरचना, भ्रष्टाचार, अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने, पद का दुरूपयोग कर धमका कर अवैध धन वसूलने हेतु बाध्य करने, फर्जी व कूटरचित दस्तावेज रचने, मिथ्या साक्ष्य गढ़ने एवं उसका उपयोग तथा न्यायालयों व न्यायायिक प्रक्रम में उपयोग कर प्रार्थी को क्षति पहुँचाने के मामलों में आरोपीयों को कठोर दण्ड दिलाये जाने हेतु अपराध पंजीबध्द कर कार्यवाही करने बावत् !

 

महोदय,

         विषयान्तर्गत प्रार्थी की प्रथम सूचना रिपोर्ट निम्न प्रकार है -

फरियादी आवेदक का विवरण -

1-                     नाम - पदम चन्द गुप्ता एडवोकेट

2-                    उम्र -  59 वर्ष

3-                    पता- पदम चन्द गुप्ता एडवोकेट, पुत्र श्री नत्थी लाल गुप्ता, शिवा धर्म कांटा, गाँधी कुआ के पास, ए.बी.रोड ग्वालियर साइड मुरैना हाल- राठी काम्पलेक्स, एम.एस. रोड मुरैना

आरोपीगण का विवरण -

1-                      भागीरथ प्रसाद गोयल, आयु 39 वर्ष लगभग, पुत्र अमरलाल गोयल निवासी कैलारस जिला मुरैना हाल निवासी - भवन क्रमांक- HIG-I/ 892 हाउसिंग बोर्ड कालोनी (जौरा खुर्द) मुरैना, एवं पदस्थ जूनियर इंजीनियर, मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड मुरैना ! 

2-                     महेन्द्र भास्कर, लाइन हैल्पर, मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड मुरैना !

3-                     आर.के.एस.राठौर, पूर्व कार्यपालन यंत्री, मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड मुरैना !  

4-                     जण्डैल सिंह, लाइन हैल्पर, मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड मुरैना ! 

5-                     श्रीमती ममता गोयल पत्नी भागीरथ प्रसाद गोयल, आयु 37 वर्ष लगभग, निवासी कैलारस जिला मुरैना हाल निवासी - भवन क्रमांक- HIG-I/ 892 हाउसिंग बोर्ड कालोनी (जौरा खुर्द) मुरैना

 

अपराध एवं घटना का विवरण -

1-                        प्रार्थी फरियादी शहर मुरैना के प्रतिष्ठित परिवार से संबध्द होकर, शांतिप्रिय, स्वच्छ छवि का नागरिक प्रतिष्ठित एडवोकेट एवं जिला अभिभाषक संघ मुरैना का पूर्व सचिव है, आरोपीगण द्वारा प्रार्थी का उत्पीड़न किये जाने, अवैध धन वसूली के लिये धमकाने, बाध्य करने तथा विद्वेष पूर्वक प्रताड़ित एवं अपमानित किये जाने, फर्जी व कूट रचित कार्यवाहियाँ कर प्रार्थी की छवि को नुकसान पहुँचा कर मिथ्या कूटरचित, फर्जी एवं मनगढ़न्त साक्ष्यो व दस्तावेजों के आधार पर न्यायालयीन मुकदमे बाजी में फंसा कर बदनाम करने, प्रार्थी द्वारा पूर्व से संचालित व संस्थित आरोपीगण के विरूध्द न्यायालयीन प्रकरण को प्रभावित कर प्रार्थी के प्रकरण को हानि पहुँचा कर न्यायालय की राय बदलने हेतु मिथ्या साक्ष्य रच कर उसका न्यायालय में उपयोग कर प्रार्थी को न्याय प्राप्ति से वंचित करने व ख्याति की अपहानि कर अवैध धन वसूली हेतु मजबूर करने, आरोपीगण द्वारा भ्रष्टाचार कर अनुपातहीन अवैध संपत्ति अर्जित कर शासन की छवि खराब कर आम नागरिकों का शोषण एवं उत्पीड़न कर, ब्लैकमेलिंग कर अनावश्यक एवं अनुचित रूप से पद व कानून का दुरूपयोग कर प्रार्थी का उत्पीड़न, प्रताड़ना, शोषण व ख्याति की अपहानि की गयी है जिसके समस्त दस्तावेजी साक्ष्य संलग्न है !

2-                       प्रार्थी फरियादी द्वारा आरोपीगण के विरूध्द प्रार्थी के वैध विद्युत कनेक्शन क्रमांक 0484403-31-30-00079365 Single Phase- Non Domestic. पर कनेक्शन प्रदाय एवं प्रारंभ दिनांक से ही आरोपीगण एवं इनके अन्य आपराधिक साथी सहयोगियों द्वारा प्रार्थी के कनेक्शन पर न्यूट्रल वायर उपलब्ध न कराये जाने से प्रार्थी विद्युत उपयोग से वंचित रहा जबकि आरोपगण्ा व उनके अन्य आपराधिक सहयोगी साथी भलीभांति जानते थे कि फेज वायर के साथ न्यूट्रल वायर न होने से विद्युत परिपथ नहीं बनता और यह परिपथ पूर्ण बन्द परिपथ नहीं कहलाता एवं उपभोक्ता के लिये अप्रयोज्य (Useless) व अर्थहीन तथा निरूददेश्य होकर व्यर्थ व अप्रयोगी रहता है ! प्रार्थी द्वारा बार बार अनेक बार आरोपीगण व उनके अन्य आपराधिक साथी सहयोगियों से अनुरोध एवं विनय मौखिक तथा लिखित तौर पर की गयी, प्रार्थी ने कई बार आरोपीगण एवं उनके सहयोगियों की सेवा सुश्रूषा आवभगत आर्थिक रूप से व अन्य प्रकार से की किन्तु आरोपीगण द्वारा प्रार्थी से रिश्वत रू. 5000 नकद आरोपी भागीरथ प्रसाद गोयल, जण्डैल सिंह एवं महेन्द्र भास्कर द्वारा मांगे जाते रहे और धमकाया जाता रहा कि अगर पैसे नहीं दोगे तो न न्यूट्रल वायर दिया जायेगा न बिजली उपयोग कर पाओगे ! साथ ही आरोपीगण व इनके अन्य आपराधिक सहयोगी साथियों द्वारा प्रार्थी फरियादी को निरन्तर विद्युत बिल दिये जाते रहे और प्रार्थी से बिना सम्यक व निर्धारित क्षमता बिजली प्रदाय व उपयोग के जबरन डरा धमका और बाध्य कर बिजली बिल वसूले जाते रहे ! अंतत: लम्बे समय तक आरोपीगण द्वारा प्रार्थी को दी गयी पीड़ा, उपेक्षा, प्रताड़ना व शोषण, भ्रष्टाचार, फर्जी कार्यवाहीयों की धमकी, बिना समुचित, सम्यक व निर्धारित बिजली प्रदाय किये जाने, सम्यक पूर्ण बन्द विद्युत परिपथ (Closed Electric Circuit) उपलब्ध कराये बिना जबरन बिल वसूली किये जाने से व्यथित एवं त्रस्त होकर प्रार्थी ने एक शिकायत दिनांक 27 सितम्बर 2008 को न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष प्रस्तुत कर विधिक तौर पर न्याय प्राप्ति हेतु काय्रवाही प्रारंभ की ! न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम मुरैना में प्रार्थी द्वारा संस्थित एवं संचालित कार्यवाही के दरम्यान ही प्रकरण के साक्ष्य नष्ट करने, साक्ष्य विरूपित करने, विलोपित करने के उददेश्य से प्रार्थी द्वारा न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष दायर शिकायत की न्यायायिक कार्यवाही को प्रभावित किया गया और विद्वेषपूर्वक प्रार्थी फरियादी को न्याय एवं पूर्ण न्याय प्राप्ति से वंचित करने हेतु कई फर्जी कार्यवाहीयॉ सम्पादित कर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी जॉच प्रतिवेदन जालसाजी कर तैयार कर दिया और विद्युत अधिनियम की धारा 126/135/138 के अन्तर्गत संयुक्त धाराओं में कूटरचित कर मिथ्या साक्ष्य रच कर प्रार्थी द्वारा न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम में प्रस्तुत शिकायती वाद को क्षति पहुँचाने, प्रार्थी को न्याय व पूर्ण न्याय प्राप्ति से वंचित करने, न्यायालय को गलत राय कायम करने हेतु प्रेरणार्थ तथा प्रार्थी से बदला लेने, डरा धमका कर कर प्रकरण वापस लेने हेतु बाध्य करने, प्रार्थी को फर्जी मुकदमेबाजी में फंसा कर प्रताड़ित, शोषण व उत्पीड़न, अपमानित कर प्रार्थी की छवि खराब करने के उददेश्य से विद्वेष व शरारत पूर्वक उसका न्यायालय में उपयोग किया ! सभी दस्तावेजी साक्ष्य संलग्न है ! 

3-                       आरोपीगण द्वारा लोगों का डरा धमका कर अपने पद का दुरूपयोग कर ब्लेकमेलिंग व विद्युत अधिनियम व अन्य संगत कानूनों का दोषपूर्ण दुरूपयोग कर अवैध धन ऐंठने, रिश्वत वसूलने भ्रष्टाचार पूर्वक जनता का विद्युत उपभोक्ताओं का शोषण करने व हफ्ता व मासिक अवैध धन किश्त वसूली के आधार पर प्रतिमाह लाखों रूपये की विद्युत चोरी करवा कर विद्युत चोरों से सांठ गांठ कर शासन को राजस्व क्षति पहुँचाने, विद्युत बिल नियमित अदा करने वाले ईमानदार नागरिकों को विद्युत प्रदाय न करने, नियमित विद्युत प्रदाय न करने, उनकी सतत विद्युत आपूर्ति में विघ्न व बाधायें उत्पन्न करने, अनियमित वोल्टेज तथा वोल्टेज फ्लक्च्ुयेशन्स के जरिये ईमानदार विद्युत उपभोक्ताओं के विद्युत उपकरणों को, भवनों को, जान जीवन व संपत्ति को क्षति पहुँचाने को अपना व्यवसाय बना रखा है और इस प्रकार आरोपीगण द्वारा लम्बे समय से अपनी आपराधिक व गैर कानूनी षडयंत्र मण्डली द्वारा षडयंत्र पूर्वक काफी गैर कानूनी संपत्ति व ब्लैक मनी अनुपात हीन रूप से अर्जित की गयी है ! तथा अपात्र एवं तुलनात्मक तौर पर क्रय शक्ति विहीन होकर भी कई अचल संपत्तियों के बयनामे (रजिस्ट्री) तथा बैंक बैलेन्स, एफ.डी., शेयर मार्केट, वायदा व्यापार में स्वयं के तथा आने परिवारीजनों व सम्बन्धियों एवं रिश्तेदारों के नाम से व अज्ञात व नकली नामों से करा कर लगा रखे हैं ! दस्तावेजी साक्ष्य मय भवन क्रमांक HIG-I/ 892 हाउसिंग बोर्ड कालोनी (जौरा खुर्द) मुरैना की रजिस्ट्री क्रमांक 659 दिनांक 28 मई 2008 की रजिस्ट्री की प्रति संलग्न है ! आरोपीगण द्वारा मुरैना के अधीक्षण यंत्री कार्यालय से निकट सटे स्टोर से लाखों रू. के विद्युत उपकरण एवं सामान बाजार में एवं प्रायवेट औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अवैध रूप से चोरी कर विक्रय कर दिया तथा लाखों रू. विद्युत वितरण कम्पनी के हक से छीनकर अवैध सम्पत्ति अर्जित की, जिस पर मुख्य अभियन्ता द्वारा माह सितम्बर 2009 में औचक जाँच पड़ताल की गयी ! दस्तावेजी साक्ष्य ग्वालियर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र ''स्वदेश'' की सम्बन्धित प्रकाशित समाचार ''मुख्य अभियन्ता ने किया बिजली घर के स्टोर का निरीक्षण'' के मुख्य शीर्षक एवं स्टोर से चोरी की शिकायत होने पर हुआ निरीक्षण तथा एक सुपरवायजर के हवाले है उक्त स्टोर के उपशीर्षको से प्रकाशित इस समाचार पत्र की दिनांक 11 सितम्बर 2009 की प्रति संलग्न है !    

अत: उपरोक्तानुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रस्तुत कर श्रीमान से अनुरोध है कि उक्त वर्णित आरोपीगण एवं इनके अन्य आपराधिक साथियों सहभागीयों के विरूध्द आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर दण्ड दिलाये जाने हेतु कार्यवाही की जावे ! धन्यवाद !

 

दिनांक 23 सितम्बर 09

 

संलग्न दस्तावेजी साक्ष्य सूची

1-                      जिला उपभोक्ता न्यायालय मुरैना में मुझ फरियादी द्वारा प्रस्तुत शिकायती आवेदन दिनांक 27 सितम्बर 2008 की प्रति !

2-                     बिना मौका पहुँचे, बिना किसी अपेक्षा, बिना सम्यक व उचित आदेश के प्रार्थी के विरूध्द आरोपीगण द्वारा बनाये गये फर्जी पंचनामा (अवैधतत: संयुक्त एक साथ तीन धाराओं 126/ 135/ 138 तहत विद्युत अधिनियम 2003) दिनांक 20 अक्टूबर 2008 की प्रति !

3-                     फर्जी व अवैध तैयार पंचनामा 20 अक्टूबर 2008 का जिला उपभोक्ता न्यायालय में प्रार्थी के प्रकरण को प्रभावित करने व न्यायालय की गलत राय कायमी हेतु न्यायायिक प्रक्रिया में न्यायालय में उपयोग किये जाने सम्बन्धी जवाब उल्लेख की प्रति !

4-                     प्रार्थी स्वयं एवं बीरबल कुशवाह का शपथ पत्र दिनांक 15 दिसम्बर 2008 की प्रतियाँ !

5-                     आरोपीगण द्वारा फर्जी व अवैध तैयार पंचनामा दिनांक 20 अक्टूबर 2008 का प्रार्थी को समस्त क्षतियाँ कारित करने, डराने धमकाने, ब्लैकमेल करने और जिला उपभोक्ता फोरम से प्रकरण वापस लेकर न्याय प्राप्ति से वंचित करने तथा प्रार्थी के विरूध्द विद्युत चोरी का फर्जी प्रकरण बनाकर प्रताड़ित करने हेतु न्यायालय श्रीमान विशेष न्यायालय विद्युत अधिनियम एवं द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुरैना के न्यायालय में न्यायायिक प्रक्रिया में उपयोग किया !

6-                     न्यायालय जिला उपभोक्ता फोरम का प्रार्थी आवेदक के समर्थन में पारित आदेश दिनांक 07 जनवरी 2009 !

7-                      पंजीयत विक्रय पत्र क्रमांक 659 भवन क्रमांक HIG-I/ 892 हाउसिंग बोर्ड कालोनी (जौरा खुर्द) मुरैना की रजिस्ट्री क्रमांक 659 दिनांक 28 मई 2008 की रजिस्ट्री की प्रति !

8-                     प्रार्थी आवेदक के यहाँ इन्स्टाल्ड कम्प्यूटिंग इण्टेलीजेण्ट टर्मिनल (इण्डस्ट्रियल टर्मिनल) सिस्टम बॉक्स का निर्माता कम्पनी द्वारा प्रदत्त मैन्युअल और कॉन्फिगरेशन्स तथा फीचर्स प्रपत्र की छाया प्रति जिसमें आरोपीगण द्वारा तैयार फर्जी पंचनामा में लिखित, कूटकृत, कूटगढ़ित व कूटरचित वाटेज खपत 250 वाट, दिनांक 20 अक्टूबर 2008 से सर्वथा भिन्न वॉटेज खपत प्रदर्शित है !

9-                     समाचार पत्र दैनिक भास्कर में शीर्षक ''कालोनी का ट्रांसफार्मर फैक्ट्री में'' प्रकाशन दिनांक 14 मई 2009 की छाया प्रति !

10-                  ग्वालियर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र ''स्वदेश'' की सम्बन्धित प्रकाशित समाचार ''मुख्य अभियन्ता ने किया बिजली घर के स्टोर का निरीक्षण'' के मुख्य शीर्षक एवं स्टोर से चोरी की शिकायत होने पर हुआ निरीक्षण तथा एक सुपरवायजर के हवाले है उक्त स्टोर के उपशीर्षको से प्रकाशित इस समाचार पत्र की दिनांक 11 सितम्बर 2009 की प्रति !

 

दिनांक 23 सितम्बर 2009      

प्रार्थी / फरियादी

पदम चन्द गुप्ता एडवोकेट 

पुत्र श्री नत्थी लाल गुप्ता,

शिवा धर्म कांटा, गाँधी कुआ के पास,

ए.बी.रोड ग्वालियर साइड मुरैना

 हाल- राठी काम्पलेक्स, एम.एस. रोड मुरैना

 

 

गुरुवार, अक्टूबर 08, 2009

और अब 'प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री' के राजनीति से सन्यास की हाँ-ना

और अब 'प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री' के राजनीति से सन्यास की हाँ-ना

तनवीर जांफरी

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      भारतीय जनता पार्टी के विगत् लोकसभा चुनावों में 'प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री' (प्राईम मिनिस्टर इन वेटिंग) घोषित लाल कृष्ण आडवाणी हालांकि लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कुछ समय के लिए 'भूमिगत' हो गए थे। मीडिया 'लौहपुरुष' के दर्शन के लिए कई दिनों तक उनकी तलाश करता रहा। परन्तु आपने दर्शन नहीं दिए। शायद वह जानते थे कि उनके पास उस समय तत्काल मीडिया को देने के लिए कोई संतोषजनक उत्तर नहीं है। बहरहाल झूठ, आडंबर और अहंकार का पिटारा आंखिरकार फूट ही गया। और देश की जनता ने भाजपा द्वारा कमंजोर प्रधानमंत्री के रूप में प्रचारित किए जाने वाले डॉ मनमोहन सिंह को एक बार पुन: भारत का प्रधानमंत्री निर्वाचित कर दिया। कांफी प्रतीक्षा के बाद 16 मई के पश्चात जब आडवाणी एक बार फिर सामने आए, उस समय उनके साथ ही साथ उनके लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद न ग्रहण करने, यहां तक कि राजनीति से आडवाणी के सन्यास लेने तक की ंखबरें आनी शुरु हो गईं। और आज 5 माह बीत जाने के बाद भी इसी प्रकार की ंखबरों का बांजार उसी प्रकार गर्म है।

              देश की जनता को आडवाणी के राजनीति से सन्यास लेने की बार-बार आने वाली ंखबरों से ऐसा आभास हो रहा है जैसे कि आडवाणी स्वयं तो राजनीति से बिदाई चाह रहे हैं परन्तु शायद उन्हें ऐसा करने से कोई रोक रहा है। चूंकि राजनैतिक सन्यास की यह बात अडवाणी जैसे उच्चकोटि के राजनीतिज्ञ से जुड़ी है, इसलिए निश्चित रूप से राजनीति पर नंजरें रखने वाला देश का प्रत्येक जागरूक व सुधी व्यक्ति पूरी दिलचस्पी के साथ इन ंखबरों पर अपनी नंजरें जमाए हुए है कि देखें आंखिर आडवाणी का 'बहुचर्चित राजनैतिक सन्यास' किस 'घड़ी' में अमल में आता है। परन्तु 6 माह से लगातार केवल चर्चाओं में रहने तथा इसके अमल में न आने के परिणामस्वरूप अब ऐसा भी लगने लगा है कि कहीं उनका राजनीति से सन्यास भी प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री जैसा ही एक 'शोशा' तो नहीं है जोकि केवल चर्चा के लिए हो परन्तु अमल में आने या कार्यान्वित होने के लिए नहीं।

              विगत् लोकसभा चनाव निश्चित रूप से भाजपा द्वारा लाल कृष्ण आडवाणी के व्यक्तित्व को सामने रख कर लड़े गए थे। भाजपा के आला नेताओं को इस बात की पूरी उम्मीद थी कि आडवाणी का ऊंचा राजनैतिक ंकद पार्टी को सत्ता ंजरूर दिला देगा। परन्तु भारतीय मतदाताओं ने भाजपा नेताओं की ऐसी सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इन 6 महीनों के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित पार्टी के ही कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की हार के लिए आडवाणी को ंजिम्मेदार भी ठहराया। कंधार विमान अपहरण कांड के मुद्दे पर आडवाणी द्वारा डाले जाने वाले संफेद झूठ के पर्दे को भी भाजपा नेताओं ने ही बेनंकाब किया। और इन दिनों महाराष्ट्र, हरियाणा तथा अरुणाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा द्वारा चुनाव प्रचार की जो रणनीति तैयार की गई है, उसे देखकर भी यही प्रतीत होता है कि अब पार्टी के रणनीतिकार आडवाणी के राजनैतिक व्यक्तित्व को करिश्माई व्यक्तित्व मानने को हरगिंज तैयार नहीं। इस बार भाजपा ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में सबसे पहला नाम एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी का रखा है। हालांकि अपनी बढ़ती उम्र तथा कमंजोरी के चलते वे व्यक्तिगत् रूप से चुनाव प्रचार में भाग नहीं ले सकेंगे। परन्तु उनके कुछ चुनिंदा भाषणों को सीडी व डीवीडी तथा उनके संदेशों के माध्यम से मतदाताओं के बीच उन्हें ले जाने का प्रयास किया  जा रहा है। पोस्टरों तथा अन्य प्रचार सामग्रियों में भी वाजपेयी की ंफोटो को शीर्ष स्थान दिया जा रहा है। यहां ंगौरतलब यह है कि पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने लाल कृष्ण आडवाणी के राजनैतिक ंकद को ही इतना ऊंचा मान लिया था कि उन्हें वाजपेयी के भाषण की सीडी, उनके संदेश अथवा उनके चित्रों की आवश्यकता ही नहीं महसूस हुई थी। परन्तु चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के रणनीतिकारों को यह एहसास हुआ कि आडवाणी को करिश्माई नेता समझना दरअसल उनकी एक बड़ी भूल थी। इन विधानसभा चुनावों में पुन: वाजपेयी के चित्र व उनके भाषणों को आगे रखना एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि पार्टी को अब भी वाजपेयी के व्यक्तित्व पर अधिक विश्वास है न कि आडवाणी जैसे 'लौहपुरुष' पर।

              प्रश्न यह है कि राजनीति में अपमान की ऐसी पराकाष्ठा आडवाणी कब तक सहन करते रहेंगे। राजनीति से सन्यास के विषय पर संघ अथवा अपने गुरु (स्वामी जी) से चर्चाएं करने अथवा उनसे सलाह लेने के बजाए वे स्वयं इस निर्णय को लेने में क्यों हिचकिचा रहे हैं? ऐसा नहीं लगता कि पार्टी का कोई वर्ग उन्हें राजनीति से सन्यास लेने से रोक रहा है। बजाए इसके ऐसा ंजरूर प्रतीत होता है कि आडवाणी स्वयं राजनीति से अपने सन्यास की चर्चाएं छेड़कर पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं की नब्ंज टटोलना चाह रहे हैं। परन्तु इत्तेंफांक से किसी ओर से भी ऐसे कोई समाचार अब तक सुनने को नहीं मिले जिससे कि यह पता चल सके कि कोई बड़ा पार्टी नेता या पार्टी कार्यकर्ता आडवाणी के राजनीति से सन्यास के ंफैसले का प्रबल विरोध कर रहे हों।

              लोकसभा के चुनाव परिणाम आने से पूर्व ही आडवाणी ने स्वयं यह बात कही थी कि यदि वे सत्ता में नहीं आए अथवा प्रधानमंत्री नहीं बने तो वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे। परन्तु ऐसा करने के बजाए उन्होंने एक बार फिर अपने लंबे राजनैतिक अनुभव का प्रयोग अपने राजनैतिक सन्यास के विषय पर करना शुरु कर दिया है। उनके सन्यास की ंखबरें भी मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित की जाने लगी हैं। परन्तु उनके राजनीति से सन्यास लेने अथवा न लेने के मंथन के बीच अब कोई 'अमृत' निकलता नंजर नहीं आता। जैसा कि राजनैतिक हालात बयान कर रहे हैं, उन्हें देखकर तो यही लगता है कि संभवत: अगले संसदीय चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े जाएंगे। उस स्थिति में यह प्रश्  ंजरूर उठेगा कि मनमोहन सिंह को कमंजोर प्रधानमंत्री बताने वाले 'लौहपुरुष' जब कथित रूप से कमंजोर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पराजित नहीं कर सके फिर राजनीति से सन्यास न ल पाने की स्थिति में वे 2014 में राहुल गांधी से कैसा मुंकाबला कर सकेंगे। क्योंकि 2014 आते-आते एक ओर तो राहुल गांधी और अधिक परिपक्व राजनीतिज्ञ बन चुके होंगे जबकि आडवाणी जी 84 के बजाए 89 की दहलींज पर ंकदम रख चुके होंगे। और इतिहास इस बात का गवाह है कि 89 की उम्र में अब तक किसी भी नेता ने भारतीय प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण नहीं की है।

              उपरोक्त सभी परिस्थितियां एवं राजनैतिक हालात सांफतौर पर यह संकेत दे रहे हैं कि आडवाणी को राजनीति से सन्यास के अपने इरादे को सलाह-मशविरा या चर्चा के बीच रखने के बजाए उसे तत्काल अमले में लाना चाहिए तथा अपनी बची-खुची इंात आबरू को इतिहास के पन्नों के लिए संभाल कर रख देना चाहिए। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता का इस बात के लिए शुक्रगुंजार भी होना चाहिए कि उन्होंने आडवाणी को न केवल देश के गृहमंत्री पद पर बिठाया बल्कि भारत का उप प्रधानमंत्री बनाकर उनका स्थान देश के उन चंद गिने-चुने नेताओं में बना दिया जोकि देश के उप प्रधानमंत्री का पद ग्रहण कर चुके हैं। ऐसे में आडवाणी यदि चाहें तो ंजंफर के इस शेर को अपने सन्यास का आधार भी बना सकते हैं :-

                  निकलना खुल्द* से आदम का सुनते आए थे लेकिन।

                 बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले॥

खुल्द*- जन्नत, स्वर्ग।                                                           

जा रहा है। पोस्टरों तथा अन्य प्रचार सामग्रियों में भी वाजपेयी की ंफोटो को शीर्ष स्थान दिया जा रहा है। यहां ंगौरतलब यह है कि पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने लाल कृष्ण आडवाणी के राजनैतिक ंकद को ही इतना ऊंचा मान लिया था कि उन्हें वाजपेयी के भाषण की सीडी, उनके संदेश अथवा उनके चित्रों की आवश्यकता ही नहीं महसूस हुई थी। परन्तु चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के रणनीतिकारों को यह एहसास हुआ कि आडवाणी को करिश्माई नेता समझना दरअसल उनकी एक बड़ी भूल थी। इन विधानसभा चुनावों में पुन: वाजपेयी के चित्र व उनके भाषणों को आगे रखना एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि पार्टी को अब भी वाजपेयी के व्यक्तित्व पर अधिक विश्वास है न कि आडवाणी जैसे 'लौहपुरुष' पर।

तनवीर जांफरी

 

सोमवार, सितंबर 28, 2009

विजय पर्व विजयादशमी की शुभकामनायें

विजय पर्व विजयादशमी की शुभकामनायें

आप सभी पाठकों, मित्रों, शुभचिन्‍तकों को ग्‍वालियर टाइम्‍स परिवार की ओर से, व्‍यक्तिगत मेरी ओर से विजय पर्व विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनायें , आपको सर्वत्र सर्व प्रकार, सर्वविधि दसों दिशाओं में विजय प्राप्‍त हो, सुख एवं खुशहाली प्राप्‍त हो । समृद्धि सदैव आपके चरण चूमे , हमारा देश खुशहाल हो, मंहगाई घटे, सभी मुस्‍कराते रहें हमारा देश समृद्ध और सदैव विजयी रहे । पुन:श्‍च विजयादशमी की शुभ कामनायें नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द'' , प्रधान संपादक ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह

 

रविवार, सितंबर 27, 2009

भिण्‍ड कलेक्‍टर के.सी. जैन एवं भिण्‍ड एस.पी. डॉ. प्रसाद का निलंबन समाप्त

भिण्‍ड कलेक्‍टर के.सी. जैन एवं भिण्‍ड एस.पी. डॉ. प्रसाद का निलंबन समाप्त

Bhopal:Saturday, September 26, 2009

राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री के.सी. जैन का निलंबन समाप्त कर उन्हें बहाल करते हुए मंत्रालय, भोपाल में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया है। श्री जैन को विगत 13 सितंबर को शासन द्वारा निलंबित किया गया था।

इसी प्रकार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय पदस्थ किया गया है। डॉ. प्रसाद को 13 सितबंर को निलंबित किया गया था।

 

 

शनिवार, सितंबर 26, 2009

सी.बी.आई. मुरैना आई, भ्रष्‍टाचार, गबन, रिश्‍वतखोरी के खिलाफ छेड़ी मैदानी जंग, चम्‍बल में हडकम्‍प, रातो रात पड़े छापे

सी.बी.आई. मुरैना आई, भ्रष्‍टाचार, गबन, रिश्‍वतखोरी के खिलाफ छेड़ी मैदानी जंग, चम्‍बल में हडकम्‍प, रातो रात पड़े छापे

नरेन्‍द्र सिंह तोमर '' आनन्‍द' एवं असलम खान

मुरैना 26 सितम्‍बर 09, सी.बी.आई की मध्‍यप्रदेश शाखा ने भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वतखोरी जैसे मामलों में आम जनता से जागृत, सचेत होने और सीधे सी.बी.आई से इसकी शिकायतें करने हेतु मुरैना में 23 सितम्‍बर को जागरूकता तथा सम्‍पर्क शिविर का आयोजन यहॉं कलेक्‍ट्रेट परिसर के डी.आर.डी.ए. हॉल में किया ।

सी.बी.आई. की मध्‍यप्रदेश शाखा के एस.पी. श्री योगेन्‍द्र कोयल और उनकी टीम सहित मुरैना के सी.एस.पी. श्री कमल मौर्य, जिले के पत्रकारगण तथा कुछ शिकायतकर्ता मौके पर मौजूद थे । सी.बी.आई भोपाल के एस.पी. श्री योगेन्‍द्र कोयल पत्रकारों से रूबरू होकर सी.बी.आई के कामकाज और कार्यप्रणाली पर विस्‍तृत प्रकाश डालते हुये पत्रकारों के सवालों के उत्‍तर भी देते रहे साथ ही मौके पर ही शिकायत कर्ताओं के आवेदन भी ग्रहण करते रहे ।

सी.बी.आई के मुरैना आने की खबर अंत तक गोपनीय रहने से यद्यपि अधिक शिकायत कर्ता वहॉं नहीं पहुँच सके लेकिन फिर भी दो शिकायत कर्ताओं ने अपने शिकायती आवेदन श्री कोयल को दिये ।

23 सितम्‍बर को ही भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष एवं मुरैना सांसद नरेन्‍द्र सिंह तोमर के अनेक व्‍यस्‍तता भरे कार्यक्रमों के कारण जहॉं प्रशासन और महत्‍वपूर्ण पुलिस अधिकारी इस खास मौके से वंचित रहे वहीं इतने महत्‍वपूर्ण शिविर को अंतिम समय तक गोपनीय रखे जाने से आम नागरिकों को भी इसकी भनक नहीं लग सकी ।

श्री कोयल ने सी.बी.आई द्वारा भ्रष्‍टाचार, गबन, और रिश्‍वतखोरी जैसे मामलों में पत्रकारों से चर्चा करते हुये उन्‍हें बताया कि आम जनता यानि कोई भी आम नागरिक सीधे सी.बी.आई को शिकायत कर सकता है तथा उन्‍होनें अपने फोन व मोबाइल नंबर एवं ई मेल पते भी पत्रकारों को उपलब्‍ध कराये एवं जनता के लिये इन्‍हें प्रकाशित कर सार्वजनिक करने का आह्वान भी किया । श्री कोयल ने बताया कि ये नंबर 24 घण्‍टे चालू रहते हैं और किसी भी समय उनसे कोई भी सम्‍पर्क कर सकता है ।

सी.बी.आई की कार्यप्रणाली और भ्रष्‍टाचार विरोधी मुहिम

श्री योगेन्‍द्र कोयल ने भारत सरकार और सी.बी.आई. द्वारा छेड़े गये भ्रष्‍टाचार, रिश्‍वतखोरी और गबन जैसे मामलों के खिलाफ मैदानी अभियान की भूमिका व कार्यप्रणाली पर विस्‍तृत प्रकाश डालते हुये बताया कि केन्‍द्र सरकार के किसी भी कार्यालय, केन्‍द्र सरकार के किसी लोक उपक्रम, कार्पोरेट सेक्टर, लोक उद्यम, केन्‍द्र सरकार के किसी भी विभाग, बीमा, बैंक, डाकघर , रेल्‍वे, आयकर, क्रेडिटकार्ड, केन्‍द्र सरकार की योजनाओं, भारत सरकार द्वारा सीधे अनुदानित स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं के मामलों में भ्रष्‍टाचार , गबन, एवं रिश्‍वतखोरी के मामले सीधे ही सी.बी.आई स्‍वयं हैण्‍डल करती है और त्‍वरित एवं तत्‍पर सीधी कार्यवाही करती है ।

राज्‍य सरकार के ऐसे सभी विभाग या कार्यालय जो कहीं से पार्शियली या अंशत: या सारत: केन्‍द्र सरकार से निधि संबद्ध या धन प्राप्‍त होकर संचालित, मानिटर्ड या प्रशासित है उनसे संबंधित मामले भी सी.बी.आई राज्‍य सरकार से सहबद्ध होकर हैण्‍छल करती है इनके भी भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वत से जुड़ मामले सी.बी.आई को भेजे जा सकते हैं ।

राज्‍य सरकार के पिभागों, कार्यालयों, लोक उपक्रमों, लोक उद्यमों एवं लोक सेवाओं, अधिकारीयों कर्मचारीयों से जुड़े भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वत के मामले भी सी.बी.आई. को भेजे जा सकते हैं, ऐसे मामलों में सी.बी.आई. अपने कव्‍हर नोट के साथ राज्‍य सरकार की संबंधित जॉच या अपराध जॉच एजेन्‍सी की ओर प्रकरण अग्रेषित कर राज्‍य सरकार की सम्‍बन्धित अपराध शाखा या जॉच एजेन्‍सी मसलन आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो, लोक आयुक्‍त, या सतर्कता विभाग को त्‍वरित व तत्‍पर कार्यवाही करने के लिये आग्रह करती है तथा मामले के अंत तक उस पर नजर रखती है ।

श्री कोयल ने किसान क्रेडिट कार्ड , किसान ऋण योजनाओं, स्‍वरोजगार योजनाओं, बेरोजगारों के शोषण आदि से जुड़े मामले भी सी.बी.आई. को दिये जाने का आग्रह किया ।

मौके पर हुयी दो शिकायतें

सम्‍पर्क शिविर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ही दो आवेदक श्री कोयल से मिले और अपनी शिकायतें उन्‍हें सौंपी । एक आवेदक पहले से ही अपनी शिकायत लिखित तौर पर तैयार कर के लाया था (संभवत: उसे पहले से ही सी.बी.आई के आने की जानकारी थी, वह पूरी तैयारी से आया था) दूसरा आवेदक एक महिला थी जिसे शायद अचानक जानकारी मिली थी और बिना तैयारी के आयी थी जिस पर श्री कोयल ने उसे अपनी शिकायत लिखित रूप से विवरण रूप में बताने का निर्देश दिया और उसने अपनी शिकायत वहीं जल्‍दी जल्‍दी लिखी और श्री कोयल को सौंपी ।

लालौर मुरैना के सत्‍यनारायण शर्मा ने अपनी शिकायत सौंपते हुये बताया कि उनके नाम पर उनकी जमीन को मार्टगेज कर किसी ने यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया से 2 जाख रूपये का ऋण ले लिया है और उन्‍होंने खुद कभी बैंक से कोई ऋण नहीं लिया और अब उनसे जबरदस्‍ती बैंक द्वारा 1 लाख 65 हजार रूपये की पैनल्‍टी सहित ऋण वसूली की जा रही है, उनके द्वारा पुलिस में एफ.आई.आर. भी दर्ज करायी गयी किन्‍तु आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुयी, पत्रकारों ने बताया कि मुरैना की बैंकों में यह आमतौर पर वर्षों से चल रहा है और ऐसे सैकड़ों मामले हैं जिनमें किसी के भी नाम पर किसी अन्‍य ने फर्जी ऋण निकाल लिये हैं जिसमें अंचल में अनेक दलाल सक्रिय है तथा बैंक प्रबंधन इसमें अपने दलालों के माध्‍यम से कूटरचना व जालसाजी करके किसी के भी नाम पर कोई भी ऋण निकाल लेता है । सी.बी.आई ने सारी टिप्‍स एवं पाइण्‍टस नोट कर लिये तथा सत्‍यनारायण शर्मा नामक किसान का मामला अपने संज्ञान में लेकर कार्यवाही के लिये ग्रहण कर लिया ।

कल्‍पना मुदगल नामक युवती ने अपनी शिकायत करते हुये बताया कि वह एक एन.जी.ओ. चलाती है (कल्‍पना मुदगल के एन.जी.ओं. के खिलाफ मुरैना के तत्‍काली कलेक्‍टर राधेश्‍याम जुलानिया ने फर्जी कार्यवाही कर अनुदान हड़पने और जालसाजी का मामला पुलिस में पंजीबद्ध कराया था यह मामला लंबित है) कल्‍पना मुदगल की शिकायत थी कि उसके एन.जी.ओं के बैंक खाते से उसी के एन.जी.ओं. के अन्‍य पदाधिकारीयों ने उसके फर्जी हस्‍ताक्षर बना कर पूरा बैंक खाता साफ कर दिया है, उसने मामले की पुलिस एफ.आई.आर. भी दर्ज करायी लेकिन अभी तक उसे न्‍याय नहीं मिला है ।

पत्रकारों ने की व्हिसिल ब्‍लोइंग

पत्रकारों ने श्री कोयल के साथ चर्चा में भाग लेते हुये कई मामलों की व्हिसिल ब्‍लोइंग की पत्रकारों ने श्री कोयल कों किसानों के सहकारी समितियों द्वारा वर्षों से फर्जी बीमों और क्‍लेम मांगने पर क्‍लेम न मिलने तथा बीमा कम्‍पनीयों द्वारा यह कहे जाने पर कि सम्‍बन्धित सहकारी समिति ने उनके यहॉं कोई पैसा नही जमा कराया के लम्‍बे चौड़ फर्जीवाड़े, स्‍कूल शिक्षा विभाग में छात्रों के फर्जी बीमा किये जाने और सरकारी स्‍कूलों के छात्रों को आज तक कभी कोई क्‍लेम न मिलने, जिला शिक्षा विभाग द्वारा बीमा कम्‍पनीयों से सांठगॉंठ कर लाखों करोड़ो छात्र बीमा के फर्जीवाड़े, एन.जी.ओ. मूवमेण्‍ट के नाम पर जिले की फर्जी स्‍वयंसेवी संस्‍थाओ द्वारा करोड़ों रू. फर्जीवाड़ा कर हड़पने उनके साथ भारत सरकार के और मध्‍यप्रदेश सरकार के अधिकारीयों से सीधे सांठगांठ कर करोड़ों रू. का प्रतिवर्ष फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट की ओर भी ध्‍यान आकर्षित कराया । इस सम्‍बन्‍ध में कुछ पत्रकारों ने सी.बी.आई. को साक्ष्‍य सबूत देने और भारत सरकार द्वारा फर्जी व फरार घोषित संस्‍थाओं को मुरैना में प्रशासन व राज्‍य सरकार के साथ कई कार्यक्रमों में कार्य करने की जानकारी भी उपलब्‍ध कराई तथा भारत सरकार एवं राज्‍य सरकार से अनुदानित स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत कार्यवाही न करने, अपनी सूचनायें व जानकारीयॉं सार्वजनिक न करने, इण्‍टरनेट पर प्रकाशित न करने फण्‍ड, पदाधिकारी, व हितग्राहीयों की सूची सार्वजनिक न किये जाने पर भी सी.बी.आई. को व्हिसिल ब्‍लोइंग की । इसके अलावा करीब दो दर्जन और भ्रष्‍टाचार, गबन तथा रिश्‍वत से जुड़े अपराधों की व्हिसिल ब्‍लोइंग की गयी ।

सायबर क्राइम पर मौन रहा

हालांकि सायबर क्राइम से जुड़े अपराध सी.बी.आई के हिट लिस्‍ट में हैं लेकिन मुरैना में सायबर क्राइम पर मौन छाया रहा और न पत्रकारों ने न सी.बी.आई ने इस विषय को चर्चा में लिया ।

पब्लिक नेटवर्क बनाने की मुहिम

सी.बी.आई. ने खास वजह बताते हुये कहा कि जिन जिलों में सी.बी.आई. का पर्याप्‍त नेटवर्क नहीं हैं वहॉं सी.बी.आई. अपना पब्लिक नेटवर्क तैयार कर रही है एक सक्रिय, सक्षम व सशक्‍त पब्लिक नेटवर्क तैयार करना जो कि सी.बी.आई. का सहयोगी नेटवर्क हो सी.बी.आई का प्रमुख उद्देश्‍य है तथा मुरैना जिला  ऐसे ही एक जिला है जहॉं हमें अपना नेटवर्क खड़ा करना है और हमने आज इसकी इस सम्‍पर्क शिविर के साथ शुरूआत की है । हम जिला स्‍तरीय कार्यक्रम चला रहे हैं और आगे सभी जिलों में ऐसे कार्यक्रम चलाये जायेंगें, हम चाहते हैं कि भ्रष्‍टाचार, गबन और रिश्‍वतखोरी के खिलाफ लोग खुलकर मुखर होकर सामने आयें, सी.बी.आई. से जुड़ें ।

सी.बी.आई को करें शिकायत तभी मिटेगा भ्रष्‍टाचार

श्री कोयल ने कहा कि हर जगह भ्रष्‍टाचार है, गबन और रिश्‍वतखोरी है लेकिन जब त‍क आप हमें शिकायत नहीं करेंगे, सुराग या साक्ष्‍य नहीं देंगे तब तक हम कार्यवाही कर पाने में असमर्थ रहते हैं हमें आप खबर दीजिये या सुराग दीजिये हम कार्यवाही करेंगें । श्री कोयल ने यहॉं तक कहा कि आप तो बस हमें सुरागी संकेत दे दीजिये बकाया काम हम कर लेंगे ।

चड्डी गीली हो जाती है सी.बी.आई के नाम से

एक पत्रकार द्वारा बार बार कई बार यह पूछे जाने और दोहराये जाने पर कि साहब पुलिस के नाम से तो लोगों को पसीने आते हैं लेकिन आपके नाम से तो आदमी की सीधी चड्डी गीली हो जाती है अगर कोई किसी की झूठी खबर आपको दे दे तो कोई तो मुफत में ही मारा जायेगा और उसकी चड्डी गीली हो जायेगी । इस पर श्री कोयल ने पहले तो कोई जवाब देना उचित नहीं समझा लेकिन बार बार पूछे जाने पर उन्‍होंने बताया कि हम हर खबर का हर सूचना का गोपनीय तरीके से पहले सत्‍यापन कराते हैं और सत्‍यता की सुगंध पाने के बाद ही कार्यवाही करते हैं और फिर कार्यवाही में देर नहीं लगाते । सबूत बटोरना हमारा काम है हमारे शिकायत कर्ता का नहीं और यदि इसके बाद भी अगर सूचना गलत पायी गयी तो हम अपनी कमजोरी इसे मानते हैं अपने सूचनाकर्ता या शिकायतकर्ता की नहीं और हम अपने खबर देने वाले को सुरक्षा व संरक्षण देते हैं पुलिस की तरह उसे उल्‍टा नहीं पुलिस केस में फंसा देते । उल्‍लेखनीय है कि सम्‍बन्धित पत्रकार प्रसिद्ध वकील भी था और अनेक भ्रष्‍टों का संरक्षक एवं शासकीय कम्‍पनीयों तथा सी.बीआई के निशाने पर कम्‍पनीयों, विभागों व अधिकारीयों का अभिभाषक है । पत्रकार की चिन्‍ता ताड़ते हुये ग्‍वालियर टाइम्‍स से सी.बी.आई. के एक अधिकारी ने अलग से गोपनीय चर्चा में अंतत: पूछ ही लिया कि यह श्रीमान कहीं किसी निशाने से तो नहीं जुड़े है इनकी चड्डी गीली क्‍यों हो रही है ।

रातोंरात मचा हड़कम्‍प और धड़ाधड़ हुयी छापेमारी

सी.बी.आई की शहर और अंचल में हरकत की खबर से मुरैना के कई सरकारी विभागों और कार्यालयों में हड़कम्‍प मच गया । और मुरैना सांसद नरेन्‍द्र सिंह तोमर के शाम तक चले कार्यक्रमों से फारिग होने के बाद कई विभागों ने फटाफट अपने रिकार्ड खंगालने और फूंकने तथा ओ.के करना शुरू कर दिये । रात 9 बजे से रात 1 बजे तक कई स्‍वयंसेवी अनुदानित संस्‍थाओं के कार्यालयों, छात्रावासों और संस्‍थाओं पर प्रशासन छापेमारी करता रहा । पिछले तीन दिन से चल रहा छापा मारी एपीसोड और एन.जी.ओं. की खाना तलाशी अभी तक जारी है । सूत्र बताते हैं कि दो चार एन.जी.ओं. लपेट में आभी गये हैं । एन.जी.ओ; की खाना तलाशी के लिये विशेष तौर पर पेजीयक फर्म्‍स एवं संस्‍थायें म.प्र ग्‍वालियर भी टीम के साथ घूम रहे है , उधर खबर है कि सी.बी.आई गोपनीय तौर पर अभी चम्‍बल में ही डेरा डाले हुये है और ग्‍वालियर चम्‍बल में कई मामलों के सुराग टटोल रही है ।

सी.बी.आई के सम्‍पर्क्‍ पते कैसे करें शिकायत

समाचार काफी विस्‍तृत हो जाने के कारण हम सी.बी.आई के सम्‍पर्क पते व सम्‍पर्क एवं शिकायत के तरीके पृथक से देंगें तथा वेबसाइट पर सी.बी.आई से सम्‍पर्क लिंक और जानकारी भी उपलब्‍ध करायेंगे साथ ही मातृ संस्‍था प्रसिद्ध स्‍वयंसेवी संस्‍था नेशनल नोबल यूथ अकादमी एवं ग्‍वालियर टाइम्‍स संयुक्‍त रूप से चम्‍बल में सी.बी.आई. को भ्रष्‍टाचार गबन और रिश्‍वत से जुड़ी शिकायतों को पहुँचाने के निये पर्चा पेम्‍पलेट छपवा कर बंटवाने ग्रामीण शिविर आदि लगा कर भी जागस्‍कता व प्रचार प्रसार करेंगें जिसमें सी.बी.आई को शिकायत करने तथा संपर्क तरीके आदि प्रमुख रूप से प्रचारित किये जायेंगे । अधिक जानकारी के लिये लॉगइन करें www.gwaliortimes.com     Or On Direct C.B.I. Website  www.cbi.gov.in    

 

शुक्रवार, सितंबर 25, 2009

जनसम्पर्क कर्मचारियों ने श्री वशिष्ठ को भावभीनी विदाई दी

जनसम्पर्क कर्मचारियों ने श्री वशिष्ठ को भावभीनी विदाई दी

भिण्ड 23 सितम्बर 2009

भिण्ड/ जिला जनसम्पर्क कार्यालय भिण्ड के कर्मचारियों द्वारा जिला जनसम्पर्क अधिकारी श्री अनिल कुमार वशिष्ठ को भावभीनी विदाई कार्यालय परिसर में दी गई। इस मौके पर एनआईसी प्रमुख श्री अजय त्रिपाठी, एसडीएम लहार श्री एसके दुबे, जिला कोषालय अधिकारी श्री योगेन्द्र सिंह भदौरिया व कार्यालय के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित थे।

      इस मौके पर जनसम्पर्क अधिकारी श्री अनिल कुमार वशिष्ठ का स्थानांतरण भिण्ड कार्यालय से संभागीय कार्यालय ग्वालियर हो जाने पर कार्यालय के कर्मचारियों ने माल्यार्पण कर भावभीनी विदाई दी। विदाई देने वालों में कार्यालय के बडे बाबू श्री रघुवीर सिंह, श्री अंगद सिंह पाल, श्री सुदामा प्रसाद, श्री विनोद यादव, श्री रमेश सिंह भदौरिया, श्री रामदीन जाटव, श्री बडेलाल ओझा आदि शामिल थे।

 

जनसम्पर्क अधिकारी श्री अनिल कुमार वशिष्ठ का विदाई समारोह सम्पन्न

जनसम्पर्क अधिकारी श्री अनिल कुमार वशिष्ठ का विदाई समारोह सम्पन्न

भिण्ड 23 सितम्बर 2009

      जिला जनसम्पर्क अधिकारी श्री अनिल कुमार वशिष्ठ को पत्रकार समूह द्वारा सर्किट हाउस में भावभीनी विदाई देने का कार्यक्रम रखा गया कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सांसद प्रतिनिधि श्री अजय शर्मा द्वारा किया एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रधान संपादक संजय की आंख ने की। इस मौके पर संचालन कार्य को गति देते हुये श्री शर्मा द्वारा सभी समाचार पत्रों के पत्रकारों द्वारा विदाई सम्बन्धित उद्गार प्रस्तुत किए गये। विशेष रूप से चौथी दुनिया के ब्यूरों प्रमुख श्री मुकेश मिश्रा द्वारा इस कार्यक्रम में अहम भूमिका अदा की गई।

      श्री मिश्रा द्वारा जनसम्पर्क अधिकारी के कार्य व्यवहारिता, दक्षता एवं कर्त्वयता का सटीक उदाहरण प्रस्तुत कर श्री वशिष्ठ को नैतिक एवंर् कत्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में सराहा गया। विदाई समारोह में उपस्थित पत्रकारो द्वारा उत्कृष्ट कण्ठ से श्री वशिष्ठ के कार्य व्यवहार की प्रशंसा की। अध्यक्षता करते हुये श्री एसएस सिकरवार ने अपने उदबोधन में कहा कि श्री अनिल कुमार वशिष्ठ की कार्य शैली व्यक्तित्व एवं कृतित्व के दोनो ही धारा है। समाज एवं पत्रकार जगत के लिए निर्णित रही जो एक याददास्त रहेगी। प्रमुख रूप से उदबोधन में श्री मायाराम मिश्रा ने कहा कि श्री वशिष्ठ जी का स्थानांतरण भले ही हो गया हो लेकिन वो हमेशा पत्रकारों के दिलों में रहेगें। अन्य उदबोधन देने वालों में श्री गुणाकेश पाराशर, श्री किशोर शर्मा, श्री सुभाष त्रिपाठी, श्री मनोज कटारे, श्री अशोक सिंह भदौरिया एडवोकेट, श्री भारत सिंह रावत, श्री विकास जोशी, श्री गणेश भारद्वाज, श्री प्रवीण परिहार, श्री सोरभ शर्मा, श्री अजय शर्मा, श्री संतोष शर्मा, श्री अनिल भारद्वाज, श्री मनोज श्रीवास, श्री बबलू शर्मा, श्री रामेन्द्र सिंह चौहान, जनसम्पर्क विभाग के बडे बाबू श्री रघुवीर सिंह, श्री अंगद सिंह पाल, श्री सुदामा प्रसाद, श्री विनोद यादव, श्री रमेश सिंह भदौरिया, श्री रामदीन जाटव, श्री बडेलाल ओझा आदि शामिल थे।