रविवार, अप्रैल 04, 2010

एयरटेल की नेटवर्क फिर ध्‍वस्‍त, शिकायतें न दर्ज हो रहीं न सुनवाई हो रही है, बड़े बड़े दावों के पीछे ढोल की पोल

एयरटेल की नेटवर्क फिर ध्‍वस्‍त, शिकायतें न दर्ज हो रहीं न सुनवाई हो रही है, बड़े बड़े दावों के पीछे ढोल की पोल 

क्‍या आप भी किसी मोबाइल सेवा प्रदाता कम्‍पनी की ठगी का शिकार हैं तो इसे ध्‍यान से पढ़ें

हर तीसरे दिन लुप्‍त हो जाता है एयरटेल का नेटवर्क

यूं ही नहीं चलते लाखों के इनामी टी.वी. कार्यक्रम कम्‍पनीयों के , इस तरह करोड़ो अरबों बटोरतीं हैं कम्‍पनीयॉं, और चलाती हैं देश की आवाज और क्रेजी किया रे जैसे लुभावने कार्यक्रम

मुरैना 4अप्रेल 10 , विगत 8 फरवरी से गड़बड़ाया एयरटेल (भारती एयरटेल) का नेटवर्क पिछले दिनों की तरह आज फिर ध्‍वस्‍त हो गया ।

विगत 8 फरवरी से ठप्‍प हुये एयरटेल संचार प्रणाली में मजे की बात यह भी है कि उपभोक्‍ताओं को जम कर कम्‍पनी द्वारा चूना भी लगाया जा रहा है । जहॉं कम्‍पनी द्वारा घोषित टोल फ्री शिकायत नंबर 198 कभी भी नहीं लगता वही कम्‍पनी जबरन बाध्‍य कर शिकायतें पहले खुद ही पैदा करती है और उसके बाद शिकायत दर्ज कराने के पैसे वसूलती है ।

जहॉं कम्‍पनी कुछ नंबरों पर एस.एम.एस. से शिकायत भेजने के लिये शुल्‍क नहीं लेती थी मसलन 121, अब इस नंबर पर भी एस.एम.एस. भेजने के पैसे काटे जाते हैं वह भी 1 रू. प्रति एस.एम.एस. की दर से शुल्‍क वसूलती है , आज हमने जब 198 , 121 सभी नंबरों के फेल होने पर 121 पर एस.एम.एस. भेजे तो पूरे 6 रू. काट लिये गये ।

उल्‍लेखनीय है कि कम्‍पनी के नेटवर्क टावर विगत 8 फरवरी से चम्‍बल में उपलब्‍ध नहीं हो रहे हैं । सैकड़ों उपभोक्‍ता कम्‍पनी के पास शिकायत दर्ज कराने को झकमारी करते फिर रहे हैं , अव्‍वल तो कम्‍पनी शिकायत ही दर्ज नहीं करती और कोई उपभोक्‍ता पैसे खर्च कर शिकायत दर्ज भी करवा दे तो फिर उस पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती । उपभोक्‍ता पैसे खर्च करता रहता है और ठगा जा कर कम्‍पनी की चालबाजी और धोखाधड़ी का शिकार होता रहता है ।

कम्‍पनी के तमाम उपभोक्‍ता मोबाइल आफिस के नाम से इण्‍टरनेट सेवायें प्रयोग करते हैं , उनके साथ कम्‍पनी न केवल धोखाधड़ी कर रही है बल्कि जम कर ठगी भी कर रही है । कुछ उपभोक्‍ताओं से मासिक शुल्‍क एकमुश्‍त काट कर कम्‍पनी महीने भर इण्‍टरनेट सेवायें प्रदान करने का वायदा करके साधारण संचार नेटवर्क तक उपलब्‍ध नहीं करा पाई वही कुछ उपभोक्‍ता 10 रू प्रति दिवस का भुगतान करके भी इण्‍टरनेट छोडि़ये साधारण फोन पर बात भी नहीं कर पाये । और विगत 8 फरवरी से तकरीबन हर दूसरे दिन अपने गांठ से पैसे खर्च करके शिकायतें भी करते रहे और रोजाना 10 रू भी कटाते रहे फिर भी वही ढाक के तीन पात ही रहे ।

इससे भी आगे बढ़ कर कम्‍पनी और भी कई करिश्‍मे दिखाती है , मसलन इस कम्‍पनी की मोगाइल सेवाओं पर बिना चालू किये ही अपने आप ही अश्‍लील गानों की कालर टयून नामक सेवा प्रारंभ हो जाती है और जबरन रातों रात आपके मोबाइल फोन से 60- 70 रूपये गायब हो जायेंगें ।

और भी तमाशा ये हैं कि आप के फोन पर कोई भी सुविधा आप प्राप्‍त करें या न करें यदि आपने अपना बैलेन्‍स 100 रूपये से ऊपर मोबाइल में रखा है तो रातों रात सैकड़ों रूपये गायब होकर चन्‍द पैसे का बैलेन्‍स मात्र शेष रह जायेगा । कई उपभोक्‍ताओं के इस तरह सैकड़ो हजारों रूपये साफ हो चुके हैं । जिसकी शिकायतें जागो ग्राहक जागो और ट्राई तक हो चुकीं हैं , ज्‍यादा पीछे पड़ने वाले ग्राहक के पैसे तो कम्‍पनी लौटा देती है लेकिन लापरवाह , सुस्‍त या शिकायत न करने वाले या पीछे न पड़ने वालों के पैसे कम्‍पनी हजम कर जाती है । हमने इस समाचार के सम्‍बन्‍ध में सभी साक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिये हैं और हमारे पास सुरक्षित हैं । जनहित में सूचित करते हैं कि ऐसी किसी भी कम्‍पनी से पीडि़त होने पर बी.एस.एन.एल. के फोन से टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 पर शिकायत तुरन्‍त दर्ज करायें ।     

 

 

एयरटेल की नेटवर्क फिर ध्‍वस्‍त, शिकायतें न दर्ज हो रहीं न सुनवाई हो रही है, बड़े बड़े दावों के पीछे ढोल की पोल

एयरटेल की नेटवर्क फिर ध्‍वस्‍त, शिकायतें न दर्ज हो रहीं न सुनवाई हो रही है, बड़े बड़े दावों के पीछे ढोल की पोल 

क्‍या आप भी किसी मोबाइल सेवा प्रदाता कम्‍पनी की ठगी का शिकार हैं तो इसे ध्‍यान से पढ़ें

हर तीसरे दिन लुप्‍त हो जाता है एयरटेल का नेटवर्क

यूं ही नहीं चलते लाखों के इनामी टी.वी. कार्यक्रम कम्‍पनीयों के , इस तरह करोड़ो अरबों बटोरतीं हैं कम्‍पनीयॉं, और चलाती हैं देश की आवाज और क्रेजी किया रे जैसे लुभावने कार्यक्रम

मुरैना 4अप्रेल 10 , विगत 8 फरवरी से गड़बड़ाया एयरटेल (भारती एयरटेल) का नेटवर्क पिछले दिनों की तरह आज फिर ध्‍वस्‍त हो गया ।

विगत 8 फरवरी से ठप्‍प हुये एयरटेल संचार प्रणाली में मजे की बात यह भी है कि उपभोक्‍ताओं को जम कर कम्‍पनी द्वारा चूना भी लगाया जा रहा है । जहॉं कम्‍पनी द्वारा घोषित टोल फ्री शिकायत नंबर 198 कभी भी नहीं लगता वही कम्‍पनी जबरन बाध्‍य कर शिकायतें पहले खुद ही पैदा करती है और उसके बाद शिकायत दर्ज कराने के पैसे वसूलती है ।

जहॉं कम्‍पनी कुछ नंबरों पर एस.एम.एस. से शिकायत भेजने के लिये शुल्‍क नहीं लेती थी मसलन 121, अब इस नंबर पर भी एस.एम.एस. भेजने के पैसे काटे जाते हैं वह भी 1 रू. प्रति एस.एम.एस. की दर से शुल्‍क वसूलती है , आज हमने जब 198 , 121 सभी नंबरों के फेल होने पर 121 पर एस.एम.एस. भेजे तो पूरे 6 रू. काट लिये गये ।

उल्‍लेखनीय है कि कम्‍पनी के नेटवर्क टावर विगत 8 फरवरी से चम्‍बल में उपलब्‍ध नहीं हो रहे हैं । सैकड़ों उपभोक्‍ता कम्‍पनी के पास शिकायत दर्ज कराने को झकमारी करते फिर रहे हैं , अव्‍वल तो कम्‍पनी शिकायत ही दर्ज नहीं करती और कोई उपभोक्‍ता पैसे खर्च कर शिकायत दर्ज भी करवा दे तो फिर उस पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती । उपभोक्‍ता पैसे खर्च करता रहता है और ठगा जा कर कम्‍पनी की चालबाजी और धोखाधड़ी का शिकार होता रहता है ।

कम्‍पनी के तमाम उपभोक्‍ता मोबाइल आफिस के नाम से इण्‍टरनेट सेवायें प्रयोग करते हैं , उनके साथ कम्‍पनी न केवल धोखाधड़ी कर रही है बल्कि जम कर ठगी भी कर रही है । कुछ उपभोक्‍ताओं से मासिक शुल्‍क एकमुश्‍त काट कर कम्‍पनी महीने भर इण्‍टरनेट सेवायें प्रदान करने का वायदा करके साधारण संचार नेटवर्क तक उपलब्‍ध नहीं करा पाई वही कुछ उपभोक्‍ता 10 रू प्रति दिवस का भुगतान करके भी इण्‍टरनेट छोडि़ये साधारण फोन पर बात भी नहीं कर पाये । और विगत 8 फरवरी से तकरीबन हर दूसरे दिन अपने गांठ से पैसे खर्च करके शिकायतें भी करते रहे और रोजाना 10 रू भी कटाते रहे फिर भी वही ढाक के तीन पात ही रहे ।

इससे भी आगे बढ़ कर कम्‍पनी और भी कई करिश्‍मे दिखाती है , मसलन इस कम्‍पनी की मोगाइल सेवाओं पर बिना चालू किये ही अपने आप ही अश्‍लील गानों की कालर टयून नामक सेवा प्रारंभ हो जाती है और जबरन रातों रात आपके मोबाइल फोन से 60- 70 रूपये गायब हो जायेंगें ।

और भी तमाशा ये हैं कि आप के फोन पर कोई भी सुविधा आप प्राप्‍त करें या न करें यदि आपने अपना बैलेन्‍स 100 रूपये से ऊपर मोबाइल में रखा है तो रातों रात सैकड़ों रूपये गायब होकर चन्‍द पैसे का बैलेन्‍स मात्र शेष रह जायेगा । कई उपभोक्‍ताओं के इस तरह सैकड़ो हजारों रूपये साफ हो चुके हैं । जिसकी शिकायतें जागो ग्राहक जागो और ट्राई तक हो चुकीं हैं , ज्‍यादा पीछे पड़ने वाले ग्राहक के पैसे तो कम्‍पनी लौटा देती है लेकिन लापरवाह , सुस्‍त या शिकायत न करने वाले या पीछे न पड़ने वालों के पैसे कम्‍पनी हजम कर जाती है । हमने इस समाचार के सम्‍बन्‍ध में सभी साक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिये हैं और हमारे पास सुरक्षित हैं । जनहित में सूचित करते हैं कि ऐसी किसी भी कम्‍पनी से पीडि़त होने पर बी.एस.एन.एल. के फोन से टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 पर शिकायत तुरन्‍त दर्ज करायें ।     

 

 

मुरैना की बिजली सप्‍लाई पूरे 13 घण्‍टे के लिये निरंतर अकारण बन्‍द

मुरैना की बिजली सप्‍लाई पूरे 13 घण्‍टे के लिये निरंतर अकारण बन्‍द

मुरैना 3 अप्रेल 2010 , आज सुबह 6 बजे से शाम 5:30 बजे तक मुरैना के सम्‍पूर्ण जिला की बिजली सप्‍लाई अकारण ही बन्‍द कर दी गयी । और लोग पानी बिजली की मूल भूत सुवधाओं के लिये सारे दिन जझते रहे , विद्युत कम्प्‍नी में कोई फोन नहीं उठा रहा था । शायद ये खेल जानबूझ कर किसी के इशारे पर था , यह रहस्‍य हम अवश्‍य खोलेंगें  लेकिन कुछ प्रतीक्षा कीजिये ।  पूरी तरह बिका हुआ दैनिक भास्‍कर के. एस. आयल्‍स की अगली रिपोटों को हमें प्रकाशन  नहीं करने दे रहा वहीं हमारे नियमित समाचारों का प्रकाशन भी नहीं होने दे रहा । अब आप फैसला कीजिये, हम जारी रहें या या भ्रष्‍ट पत्रकारिता के सिरमौर जिन्‍होंनें इस देश को गर्त में डुबोया है । इस खेल का बादशाह भी एक के.ण्‍स. आयल्‍्स का रिश्‍तेदार आई एस. आफिसर ही है । उल्‍लेखनीय है कि दैनिक भास्‍कर और के.एस. आयल्‍स के खास अटूट रिश्‍ते हैं ।

 

शुक्रवार, अप्रैल 02, 2010

विशेष आलेख: आटिज्म: शीघ्र हस्तक्षेप जरूरी – श्रीमती राजबाला अरोरा

 

विशेष आलेख: आटिज्म: शीघ्र हस्तक्षेप जरूरी श्रीमती राजबाला अरोरा

आलेख - राजबाला अरोरा

लेखिका ग्‍वालियर की विख्‍यात समाज सेविका हैं  

        ' एक 6 साल की बच्ची है । केवल माँ पापा बोलने के अलावा कुछ नहीं बोलती है । ऑंख से ऑंख नहीं मिला पाती है । खड़े - खड़े हिलती रहती है अचानक किलकारी मार कर हँस पड़ती है लेकिन कभी कभी अचानक माँ या अन्य को काट लेती है । किसी चीज की इच्छा होने पर इशारा भी नहीं करती फिलहाल रिहैबिलिटेशन सेंटर पर उसके व्यवहार को नियन्त्रित करने की थेरैपी लेरही है ।

 '' एक आठ साल का डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चा है । ममा, पापा, दादी के अलावा कुछ नहीं बोलता। पानी के लिए फ्रिज के पास खड़ा हो जाता है । लम्बे समय से स्कूल में मंदबुद्वि बालक समझ कर उसे ए बी सी पढ़ना लिखना सिखाया जा रहा था । होम वर्क में भी वही काम । व्यस्त रखने के लिए उसे शीट पर रंगने का कार्य दे दिया जाता । पढ़ाई लिखाई में पूरी तरह असफल  होने पर जब उसे साइकोलॉजिस्ट को दिखाया गया तो पता चला कि उसे मानसिक मंदता के साथ - साथ आटिज्म की भी समस्या है ।  तब उसे स्कूल से निकाल कर रिहैबिलिटेशन सेंटर में डाला गया है, जहाँ वह काफी कुछ सीख रहा है । पानी के लिए गिलास की तरफ इशारा करता है । ए बी सी डी अक्षरों को पहचानने लगा है ।

'' एक तीस- पैती  ी उम्र का व्यक्ति है जो एकदम शान्त रहता है । कुछ भी नहीं बोलता है। सेंटर में उसे तब लाया गया जब उसके सीखने का दौर निकल गया । लेकिन अब वह थोड़ा बहुत लोगों को पहचानने लगा है ।

'' एक साढ़े तीन साल की प्यारी सी बच्ची है । डा. माता पिता की वह बहुत लाड़ली है । लेकिन वह भी ऑंख से ऑंख मिला कर बात नहीं करती । कुछ ही शब्दों का प्रयोग करती है । वस्तु की ओर केवल इशारा करती है । उसकी डा. माँ ने बताया कि ढ़ाई वर्ष की उम्र तक वह काफी शब्द बोलती थी लेकिन अब वह कई शब्द भूलने लगी है ।

       ऐसे ही कुछ अनुभव हैं मेरे, जो मुझे एक स्वयं सेवी के रूप में बतौर स्पेशल एजूकेटर नि:शक्तजनों की सेवारत कुछ समाज सेवी संस्थाओं में काम के दौरान मिले । उपर्युक्त सभी उदाहरण आटिज्म के लक्षण स्पष्ट दर्शाते हैं ।  ऐसे कई आटिज्म प्रभावित बच्चे हो सकते हैं जिनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई हो। माता - पिता की उदासीनता या झिझक के चलते ऐसे बच्चे असामान्य जीवन जीने को विवश हैं  । आटिज्म से प्रभावित माता पिता या अभिभावकों की झिझक को खत्म कर उन्हें अपने बच्चे के पुनर्वास की दिशा में प्रेरित करना ही मेरे इस लेख का उद्देश्य है जो मैं 2 अप्रैल से प्रारंभ विश्व आटिज्म सप्ताह के मौके पर आपसे बांटना चाहती हूँ ।

       'आटिज्म को हिन्दी में स्वलीनता, स्वपरायणता अथवा स्वत: प्रेम कहते हैं । जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ' आटिज्म ' यानि स्वलीनता से ग्रसित व्यक्ति बाहरी दुनिया से बेखबर अपने आप में ही लीन रहता है । सुनने के लिए कान स्वस्थ है, देखने के लिए ऑंखें ठीक हैं फिर भी वह अपने आस पास के वातावरण से अनजान रहता है ।

       आज दुनिया की लगभग 7 करोड़ आबादी आटिज्म से प्रभावित हैं । विश्व में आटिज्म प्रभावितों की संख्या एड्स , मधुमेह और कैंसर से पीड़ित रोगियों की मिली जुली संख्या से भी अधिक होने की सम्भावना है। मोटे तौर पर प्रति एक हजार जनसंख्या में एक आटिज्म से प्रभावित होता है । वर्ष 1980 से अब तक किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों के ऑंकड़ों पर नजर डालें तो ज्ञात होगा कि इस बीच आटिज्म समस्या में आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ोत्तरी हुई है । सम्भवत: इसका कारण लोगों में इसके प्रति बढ़ती जागरूकता, डायग्नोसिस के तरीकों में बदलाव तथा सम्बन्धित सेवाओं की सुलभता रही है ।

       पहली बार सन् 1938 में वियना युनिवर्सिटी के हास्पिटल में कार्यरत हैंस एस्परजर ने आटिज्म शब्द का इस्तेमाल किया था । एस्परजर उन दिनों आटिज्म स्प्रेक्ट्रम (ए.एस.डी.) के एक प्रकार पर खोज कर रहे थे । बाद में 1943 में जॉन हापकिन हास्पिटल के कॉनर लियो ने सर्वप्रथम 'आटिज्म ' को अपनी रिपोर्ट में वर्णित किया था । कॉनर ने ग्यारह बच्चों में पाई गई एक जैसी व्यवहारिक समानताओं पर आधारित रिर्पोट तैयार की थी ।

       अध्ययनों व सर्वेक्षणों के आधार पर यह बात सामने आयी है कि आटिज्म की समस्या लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में कई गुना ज्यादा है ।जिसका अनुपात 1: 4.3 है । भारत में अब तक एक  करोड़ से ज्यादा आटिज्म से प्रभावित हैं ।

       ' आटिज्म ' मस्तिष्क विकास जनित जटिल किस्म का स्नायु विकार है, जो आजीवन रहता है । यह विकार जीवन के प्रथम तीन वर्षो में ही परिलक्षित होता है और व्यक्ति की सामाजिक कुशलता और संप्रेषण क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालता है । यह समस्या वंशानुगत है, हालाँकि कौन सा जीन इस समस्या का कारक है? अज्ञात है । आटिज्म परवेसिव डेवलॅपमेंटल डिस्आर्डर (पी.डी.डी.) के  पाँच प्रकारों में से एक है ।आटिज्म को केवल एक लक्षण के आधार पर पहचाना नहीं जा सकता, बल्कि लक्षणों के पैटर्न के आधार पर ही आटिज्म की पहचान की जा सकती है । सामाजिक कुशलता व संप्रेषण का अभाव, किसी कार्य को बार-बार दोहराने की प्रवृत्ति तथा सीमित रुझान इसके प्रमुख लक्ष्ण हैं। एक आम आदमी के लिए आटिज्म की पहचान करना काफी मुश्किल है । इसके मूल में दो कारण हो सकते हैं । एक तो आटिस्टिक व्यक्ति की शारीरिक संरचना में प्रत्यक्ष तौर पर कोई कभी नहीं होती । अन्य सामान्य व्यक्तियों जैसी ही होती है । दूसरा बच्चे की तीन वर्ष की उम्र में ही आटिज्म के लक्ष्ण दिखाई देते हैं, इससे पहले नहीं ।

       आटिज्म को  इंडिविजुअल विथ डिस्एबिलिटी एजुकेशन एक्ट (आई.डी.ई.ए.) के अंतर्गत लिया गया है । इस अधिनियम में आटिज्म प्रभावितों की शीघ्र पहचान, परीक्षण तथा स्पीच थेरैपी की सेवाएं सम्मिलित हैं । आई.डी.ई.ए. अधिनियम 21 वर्ष तक के आटिज्म प्रभावितों के शिक्षा हेतु मार्गदर्शी की भूमिका का निर्वहन करता है व साथ ही उनका हित संरक्षण भी । दिल्ली स्थित रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आर.सी.आई.) ऑटिज्म सहित अन्य विकलांगताओं से ग्रसित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं संरक्षण कार्य का दायित्व निभाती है ।

       आटिज्म प्रभावित बच्चों की सबसे बड़ी समस्या वाक् व भाषागत होती है । ऐसे बच्चों में मस्तिष्क में आए स्नायु विकार के कारण संप्रेषण की डीकोडिंग न हो पाने के कारण बोलने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है । आटिज्म से प्रभावित बच्चे को वाक् व भाषा की समस्या के साथ - साथ व्यवहार जनित समस्या भी हो सकती है । पूर्व में वर्णित ' ' का उदाहरण देखें तो पाएंगे कि ऐसे बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पाने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं । परिणाम स्वरूप उनका व्यवहार असामान्य हो जाता है ।

       विभिन्न थेरैपी, एक्सपर्ट का मानना है कि आटिज्म से प्रभावित बच्चों को थेरैपी देना केवल थेरैपिस्ट का ही दायित्व नहीं है, अपितु माता पिता की सक्रिय भागीदारी ही ऐसे बच्चों के पुनर्वास में सहायक होती है। स्ट्रक्चर्ड टीचिंग प्रोग्राम के तहत थिरैपिस्ट द्वारा दिये गए थेरैपी प्लान को अगर बच्चे के माता पिता या अभिभावक घर पर भी उसी क्रम से दोहराएं तो आशातीत परिणाम अर्जित किये जा सकते हैं।

       नेशनल रिहेब्लिटेशन काउंसिल के अनुसार स्पीच थैरेपी तभी लाभकारी होगी जब बचपन से ही स्पीच थैरेपी का प्रारंभ, उसकी स्वाभाविक संप्रेषण कला को बढ़ावा मिले,बच्चे द्वारा संप्रेषण कला सीख लेने के पश्चात सीखे गये ज्ञान का सामान्यीकरण हो। साथ ही बच्चे के भाषागत् अथवा व्यवहारगत समस्या को दूर कर गुणात्मक सुधार लाने के बड़े लक्ष्य तय कर लिए जाएं । फिर उन बड़े लक्ष्यों में एक लक्ष्य को चुनकर उसे छोटे-छोटे पड़ाव में निर्धारित कर देना चाहिए । तत्पश्चात थिरैपिस्ट की मदद से योजनाबध्द तरीके से वांछित परिणाम प्राप्त होने तक थेरैपी जारी रखनी चाहिए । थेरैपी देते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यावश्यक है । थेरैपी दौरान जब बच्चा आशा के अनुरूप कार्य कर लेता है तो उसका उत्साहवर्धन करने के उद्देश्य से तुरन्त उसे कोई टोकन, टॉफी या शाबासी अवश्य देना चाहिए । दूसरी बात बच्चे को स्पीच थेरैपी देते वक्त टीचर एवं बच्चे का अनुपात 1:1 होना चाहिए । क्योंकि कई बार देखने में आता है कि आटिज्म से प्रभावित बच्चे को अन्य समस्याओं जैसे बधिरता अंधत्व, सेरेब्रल पालसी (प्रमस्तिष्क पक्षापात) या फिर मानसिक मंदता जैसे एक या एक से अधिक समस्याओं से भी जूझना पड़ता है । ऐसे में आटिज्म के साथ जुड़ी अन्य समस्याओं को भी ध्यान में रखकर स्पीच थेरैपी दिया जाना चाहिए। सीखने की यह प्रक्रिया दीर्घ कालिक है । संयम, समर्पण व सतत प्रयास पर ही सफलता का दारोमदार टिका है । आटिज्म से प्रभावित बच्चों में मानसिक मंदता से ग्रसित बच्चों के उलट इनका आई.क्यू . लेवल आमतौर पर सामान्य या उससे अधिक ही होता है । ऐसे बच्चे नृत्य, कला, संगीत अथवा तकनीक के क्षेत्र में काफी कुशल भी हो सकते हैं ।

       आटिज्म से प्रभावित बच्चे / व्यक्ति के जीवन में गुणात्मक सुधार लाना तथा उसे आत्म निर्भर बनाना ही इलाज का मुख्य ध्येय होना चाहिए । इसके लिए शीघ्र हस्तक्षेप यानि अर्ली इंटरवेंशन के जरिये समस्या की शीघ्र अतिशीघ्र पहचान कर उसका निदान करना होगा । बिहेवियरल ऐनेलिसिस, स्ट्रक्चर्ड टीचिंग सिस्टम, डेवलपमेंटल मॉडल, स्पीच लैंग्वेज थेरैपी, सामाजिक दक्षता थैरेपी एवं आक्यूपेशनल थेरैपी की मदद से आटिज्म से प्रभावित बच्चे के जीवन को काफी हद तक सुधार कर उसे समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता है ।

 

कुछ अन्य शोध

आज कई रिसर्च इंस्टीटयूट द्वारा आटिज्म के कारणों व निदान पर निरन्तर शोध कार्य जारी है । ये शोध आटिज्म प्रभावितों के लिए कितने लाभकारी हैं भविष्य में तय होगा।

·               बी.एम.सी. पीडियाट्रिक्स की रिर्पोट के मुताबिक प्रेशराइज्ड आक्सीजन चैम्बर में आटिस्टिक बच्चों को दिन में दो बार, चार हफ्ते तक रखने से 80 प्रतिशत बच्चों में सुधार के लक्षण दिखाई दिए । उनकी अतिक्रियाशीलता (हाइपर एक्टिविटी), तुनक मिजाजी, एवं बोलने की क्षमता का विकास हुआ । समझा जाता है कि मस्तिष्क में आक्सीजन का स्तर बढ़ने से बच्चों को फायदा हुआ होगा। फ्लोरिडा, इन्टरनेशनल चाइल्ड डेवलॅपमेंट रिर्पोट ने इस पर शोध किए जाने की जरूरत है ।

·               जापान के एक शोधर् कत्ता के अनुसार कम उम्र में पिता बनने वाले पुरूषों के बच्चों की तुलना में अधिक उम्र में पिता बनने वाले पुरूषों के बच्चों को स्वलीनता यानि आटिज्म का खतरा बढ़ जाता है।

·               संगीत भी आटिस्टिक बच्चों में मददगार साबित हो सकता है । एवर्स्टन में नार्थवेस्टर्न युनिवर्सिटी की प्रयोगशाला में किए गए शोध के अनुसार वाद्ययन्त्र बजाने से ब्रेनस्टेम (मस्तिष्क का निचला हिस्सा) में स्वचालित प्रक्रिया पर असर पड़ता है । कई वर्षो का संगीत प्रशिक्षण ध्वनियों से भाषा और भावनाओं को व्यक्त करने में भी सुधार हो सकता है।

 

 

इति ।

      

 

             

 

शनिवार, मार्च 27, 2010

सरकार द्वारा शुरू जनहितेषी कार्यक्रमों को जाना ग्रामीणों ने

सरकार द्वारा शुरू जनहितेषी कार्यक्रमों को जाना ग्रामीणों ने

सूचना शिविर मालनपुर एवं गोहद से लाभान्वित हुये ग्रामीणजन

भिण्ड 25 मार्च 2010

       प्रदेश सरकार द्वारा समाज के सर्वहार वर्ग के लिए शुरू किये गये जनहितेषी कल्याणकारी कार्यक्रमों से अवगत कराने के लिए जिला जनसम्पर्क कार्यालय भिण्ड द्वारा गुरूवार को मालनपुर एवं गोहद में आयोजित सूचना सह विकास प्रदर्शनी से अनेक ग्रामीणजन लाभान्वित हुये है। ग्रामीणों ने चित्र प्रदर्शनी को निहारकर उपलब्ध कराए गये प्रचार साहित्य को पढकर अपनी जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान उप संचालक सुनील सिलावट जनसम्पर्क भिण्ड से किया जिसका समाधान कारक उत्तर लोगों को दिया गया। शिविर में उपस्थित लोगों को आम लोगों के हित में शुरू किये विभिन्न कल्याण कारी जानकारी दी गई। जानकारी प्राप्त होने से मालनपुर के नौसाद खॉन,ऐचाया पंचायत के मातापुरा टोला के रामौतार कुशवाह, गांधीनगर गोहद के अमर सिंह, जंगलपुरा चितोरा के नन्हे खॉ, देहगांव के मुन्नासेन और नगर पंचायत गोहद के वनखण्डीलाल ने बताया कि वेभी उपलब्ध कराये गये प्रचार साहित्य का अध्ययन करकर अन्य लोगों को योजनाओं की जानकारी देगें और पात्रता अनुसार लोगों को लाभान्वित कराने के कार्य में जुटेगें।

 

प्राकृतिक प्रकोप से घटित हानि के लिए आर्थिक सहायता के मापदण्ड तय

प्राकृतिक प्रकोप से घटित हानि के लिए आर्थिक सहायता के मापदण्ड तय

भिण्ड 25 मार्च 2010

       कलेक्टर रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि प्राकृतिक प्रकोप से होने वाली विभिन्न प्रकार की हानि के लिए शासन द्वारा दी जाने वाली सहायता की राशि के मापदण्ड निर्धारित किए गये है।

फसल हानि के लिए आर्थिक सहायता

कुल खाते की धारित कृषि भूमि के आधार पर खातेदार/कृषक की श्रेणी के तहत  लघु एवं सीमांत कृषक 0 हैक्टेयर से 2 हेक्टेयर तक कृषि भूमि धारित करने वाले कृषक / खतोदार को 25 से 50 प्रतिशत फसल हानि होने पर दी जाने वाली अनुदान सहायता राशि- वर्षा आधारित फसल के लिए 2000 रूपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसल के लिए 3500 रूपये प्रति हेक्टेयर, बारामाही (पेरीनियल) 6 माह से कम अवधि की पसल के अवधि की फसल के लिए 7500 रूपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।

50 प्रतिशत से अधिक फसल हानि होने पर दी जाने वाली अनुदान सहायता राशि

वर्षा आधारित फसल के लिए 3000 रूपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसल के लए 7500 रूपये प्रति हेक्टेयर, 3 बारामहही (पेरनियल) 6 माह से कम अवधि की फसल के लिए 7500 रूपये प्रति हेक्टेयर, 4 बारामाही (पेरीनियल) 6 माह से अधिक अवधि की फसल के लए 10000 रूपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी।

लघु एवं सीमांत कृषक से भिन्न कृषक-2 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि धारित करने वाले कृषक / खातेदार को

25 से 50 प्रतिशत फसल हानि होने पर दी जाने वाली अनुदान सहायता राशि के तहत वर्षा आधारित फसल के लिए 1500 रूपये प्रति हेक्टेयर, 2 सिंचित फसल के लिए 2500 रूपये प्रति हेक्टेयर, 3 बारामाही पेरीनियल 6 माह से कम अवधि की फसल के लिए 3500 रूपये प्रति हेक्टेयर, 4 बारामाही पेरलियल 6 माह से अधिक अवधि की फसल के लिए 5000 रूपये प्रति हेक्टेयर की पात्रता होगी।

फलदार पेड़ या उन पर लगी फसले 25 से 50 प्रतिशत फसल हानि होने पर  200 रूपये प्रति पेड, 2 संतरा, नीबू के बगीचे, पपीता, केला, अंगूर, अनार आदि की फसले 4000 रूपये प्रति हेक्टेयर, पान बरेजे आदि की हानि के लिए 12000 रूपये प्रति हेक्टेयर या 500 रूपये प्रति पारी की पात्रता होगी।

 

50 प्रतिशत से अधिक फसल हानि होने पर सहायता

फलदार पेडके लिए  300 रूपये प्रति पेड, संतरा, नीबू के बगीचे, पपीता, केला, अंगूर, अनार आदि की फसले 6000 रूपये प्रति हेक्टेयर, पान, बरेजे आदि की हानि के लिए 20000 रूपये प्रति हेक्टेयर या 500 रूपये प्रति पारी की पात्रता होगी। 

पशु/पक्षी (मुर्गी/मुर्गा) हानि के लिए आर्थिक सहायता के तहत

बैल/भेंस/घोडा हेतु 6000 रूपये, गाय हेतु  3000 रूपये, बगरी/भेंड के तहत 800 रूपये, ऊंट हेतु 6000  गधा हेतु 2000 सुअर 1500 हेतु , भैंस, घोडा गाय एवं ऊंट के बच्चों हेतु 1000 रूपये, भेड़, सुअर, गधा, बकरी का बच्चा हेतु  250 रूपये, मुर्गी/मुर्गा (10 सप्ताह से अधिक आयु के) 40 रूपये, चूजा (4 से 10 सप्ताह तक की आयु के) 20 रूपये की पात्रता होगी।

नष्ट हुए मकानों के लिए आर्थिक अनुदान सहायता

पूर्ण नष्ट मरम्मत योग्य नही, पक्का मकान- वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर अधिकतम 25000 रूपये, कच्चा मकान वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर अधिकतम 2000 रूपये, 3 झुग्गी/ झोपडी विधिसंगत निर्माण वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर 6000 रूपये की पात्रता होगी।

गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त (जहां क्षति 50  प्रतिशत से अधिक हो) पक्का मकान- वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर अधिकतम 5000 रूपये, कच्चा मकान वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर अधिकत 300 रूपये झुग्गी/झोपडी विधिसंगत निर्माण, वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर 2000 रूपये की पात्रता होगी।

आंशिक क्षतिग्रस्त जहॉ क्षति 15 प्रतिशत से 50 प्रतिशत हो पक्का मकान

 वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर अधिकतम 2500 रूपये, कच्चा मकान वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर अधिकतम 1500 रूपये, झुग्गी/झोपडी विधिसंगत निर्माण- वास्तविक क्षति के आंकलन के आधार पर 1000 रूपये की पात्रता होगी।

कपडों, बर्तनों एवं खाद्यान्न की क्षति के लिए आर्थिक अनुदान सहायता

प्राकृति प्रकोप या अग्नि दुर्घटना के कारण मकान नष्ट हो जाने या क्षतिग्रस्त हो जाने अथवा घरों में पानी घुस जाने से पीडित परिवार के कपडे एवं खाद्यान्न गीले होकर क्षतिग्रस्त हो जाने पर दैनिक उपयोग के कपडों एवं बर्तनों की हानि के लिए प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार को मान से 2000 रूपये दो हजार रूपये मात्र की आर्थिक अनुदान सहायता दी जाएगी। यह सहायता राशि मकान की हुई क्षति के लिए दी जाने वाली सहायता राशि के अतिरिक्त होगी।

प्राकृतिक प्रकोप या अग्नि दुर्घटना के कारण मकान नष्ट हो जाने या क्षतिग्रस्त हो जाने अथवा घरों में पानी घुस जाने से पीडित परिवार के कपडे एवं खाद्यान्न गीले होकर क्षतिग्रस्त हो जाने पर प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार के मान से 50 किलो ग्राम खाद्यान्न (गेहू/चावल) एवं 5 लीटर कैरोसिन तात्कालिक सहायता के रूप में दिया जायेगा। यह सहायता एक आपदा के प्रभावित परिवार को केवल एक बार ही दी जायेगी।

मृत व्यक्ति के परिवार/ निकटतम वारिस को आर्थिक सहायता अनुदान

 नैसर्गिक विपत्तियों अर्थात तूफान, भूकम्प, बाढ, ओलावृष्टि, भूस्खलन के साथ साथ आकाशीय बिजली गिरने अथवा आग से पीडितों (खलिहान या मकान में आग लगने की दुघर्टना/ वारिस को 100000 रूपये ( एक लाख रूपये मात्र) की सहायात दी जाएगी।

सर्प, गुहेरा या जहरीले जन्तु के काटने से अथवा नाव दुघर्टना से मृत्यु हो जाने पर अथवा बस या अधिकृत अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नदी या जलाशय में गिरने या पहाडी आदि से खड में गिरने के कारण इन वाहनों पर सवार व्यक्तियों की मृत्यु होने पर मृत व्यक्ति के परिवार के निकटतम व्यक्ति / वारिस को 50000 रूपये (पचास हजार रूपये मात्र) की सहायता दी जाएगी।

 

आग से नष्ट होने वाली फसलों की सुरक्षा के लिए कृषक सजग बने

आग से नष्ट होने वाली फसलों की सुरक्षा के लिए कृषक सजग बने

भूलचूक से हो सकती है बडी दुर्घटना

भिण्ड 25 मार्च 2010

       जिला प्रशासन भिण्ड द्वारा कृषकों को विद्युत तारों एवं ऐसे खुले स्थान जहां भण्डार के लिए रखी गई फसल को आग लगने की आशंका हो सकती है उन स्थानों पर खाद्यान्न को खुला नही रखने की सलाह दी गई है।

       कलेक्टर रघुराज राजेन्द्रन ने कृषकों को सलाह देते हुये कहा कि छोटी सी भूलचूक से भी खाद्यान्न में लगी आग बडी घटना का रूप ले सकती है जिसके चलते न सिर्फ कृषकों की उत्पादित फसल नष्ट हो जाने का खतरा होगा। वरन आग की दुघर्टना से बडी जनहानि होने की आशंका रहती है। जिसके कारण किसानों की वर्ष भर की फसल कुछ ही मिनटों में नष्ट हो जाने से कृषकों की आर्थिक स्थिति कमजोर बनाती है। आग से  कृषकों की फसल नष्ट न हो इसके लिए जरूरी है कि कृषक एवं उनके परिजन फसलों की सुरक्षा के दायित्व प्रति सजग बने और फसलों का भण्डारण सुरक्षित स्थानों पर करें। जिला स्तर पर आकस्मिक दुघर्टना की जानकारी के लिए नियंत्रण कक्ष बनाया गया है जिसका दूरभाष क्रमांक 230023 है। इस नम्बर पर कोई भी व्यक्ति अपनी जानकारी दे सकते है।

 

पेंशन राशि वितरित नही करने पर कलेक्टर ने किया निलंबित

पेंशन राशि वितरित नही करने पर कलेक्टर ने किया निलंबित

न.पा. भिण्ड कर्मी ने 10 महीनों तक लंबित रखा प्रकरण

भिण्ड 25 मार्च 2010

       कलेक्टर रघुराज राजेन्द्रन ने नगर पालिका भिण्ड के सामाजिक सुरक्षा पेंशन का दायित्व निर्वाहन कर रहे कर्मचारी को शिथिलता बरतने पर निलंबित किया है। अधिकृत जानकारी में बताया गया है कि धीरेश तिवारी सहायक ग्रेड-3 द्वारा विगत 10 महीनों से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्वावस्था पेंशन, विधवा पेंशन का वितरण समय पर न कर प्रकरणों को लंबित रखा गया। कलेक्टर ने  मुख्य नगर पालिका अधिकारी भिण्ड द्वारा संबंधित लिपिक को निलंबित किये जाने के संबंध में निलंबन की कार्यवाही की गई। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण भिण्ड नियत किया गया है। यह कार्यवाही तत्काल प्रभाव से की गई है।