सोमवार, अप्रैल 13, 2009

लोकसभा निर्वाचन 2009 : वोट डालने मतदाता फोटो परिचय पत्र जरूरी न होने पर 13 वैकल्पिक दस्तावेज

लोकसभा निर्वाचन 2009 : वोट डालने मतदाता फोटो परिचय पत्र जरूरी न होने पर 13 वैकल्पिक दस्तावेज

ग्वालियर 12 अप्रैल 09। फर्जी तथा छद्म मतदान रोकने तथा मतदाता मतदान कर सकें यह सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिये हैं कि लोकसभा चुनाव में लोगों को वोट डालने के लिए मतदाता फोटो परिचय पत्र साथ लाना होगा। जो मतदाता यह फोटो परिचय पत्र साथ नहीं ला पाते हैं तो उनकी पहचान मतदाता सूची पर लगे फोटो से मिलान करके की जाएगी। लेकिन ऐसा होने पर जबकि किसी मतदाता की पहचान मतदाता सूची में लगे फोटो से स्थापित नहीं की जा सके तो फिर यह पहचान आयोग द्वारा निर्धारित 13 वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर की जाएगी। जिन लोगों को फोटो परिचय पत्र जारी नहीं हुए हैं या जिनके कार्ड खो गये हैं उनकी पहचान भी इन 13 दस्तावेजों से की जा सकती है।

       आयोग ने अपने निर्देश से सभी निर्वाचन क्षेत्रों के रिटर्निंग अफसरों और पीठासीन अधिकारियों को अवगत करा दिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई ऐसा मतदाता अपना फोटो परिचय पत्र प्रस्तुत करे जो दूसरे विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीयन अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो तो उस पर भी विचार किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए जरूरी होगा कि उस मतदाता का नाम उस संबंधित मतदान केन्द्र की मतदाता सूची में हो जहाँ चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है।

       आयोग ने इस निर्देश को व्यापक तौर पर आम लोगों, मतदाताओं और सभी उम्मीदवारों की जानकारी में लाने को भी कहा है। आयोग ने इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को मतदाता फोटो परिचय पत्र (ऐपिक) जारी कर दिए गए हैं उन्हें मतदान के वक्त इन्हें अपने साथ लाना होगा। इसी तरह जिन्हें ये फोटो परिचय पत्र जारी नहीं हुए हैं उन्हें मतदान के लिए आयोग द्वारा निर्धारित 13 वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज अपने साथ लाना होगा।

       रिटर्निंग अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी पीठासीन अधिकारियों को विशेष रूप से समझाकर आयोग का इस निर्देश के आशय और इसकी विषयवस्तु बता दें। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना है कि इस आदेश की एक प्रति निर्वाचन क्षेत्रों में पीठासीन अधिकारियों के पास सभी मतदान केन्द्रों अथवा बूथ पर उपलब्ध हो।

13 वैकल्पिक दस्तावेज

       भारत निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित पहलुओं एवं कानूनी और तथ्यात्मक स्थिति पर विचार करने के बाद यह निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी 29 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं को चुनाव में वोट डालने के पहले अपनी पहचान के लिए स्वयं का मतदाता फोटो परिचय पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई मतदाता यह फोटो परिचय पत्र प्रस्तुत न कर सके तो उसकी पहचान के लिए मतदाता सूची में लगे उसके फोटो से मिलान किया जा सकेगा। लेकिन यदि किसी मतदाता की पहचान मतदाता सूची में उसके फोटो या इसकी अनुपलब्धता से या फिर अस्पष्टता के कारण नहीं हो सके तो उस मतदाता को आयोग के 13 वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत कर अपनी पहचान स्थापित करनी होगी।

ये दस्तावेज हैं-

1. पासपोर्ट।

2. ड्रायविंग लायसेंस।

3. इंकमटेक्स परिचय पत्र (पेनकार्ड)।

4. राज्य अथवा केन्द्र सरकार या सार्वजनिक उपक्रम, स्थानीय निकाय, पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए गए फोटोयुक्त परिचय पत्र।

5. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अथवा पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, किसान पास बुक (जिनके 28 फरवरी 2009 तक खाते खोले गए हों।)

6. संपत्ति के दस्तावेज जैसे - पट्टे, रजिस्टर्ड डीड आदि, फोटोग्राफ के साथ।

7. सक्षम अधिकारी द्वारा 28-2-2009 तक जारी किए गए फोटोयुक्त अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग संबंधी प्रमाण पत्र।

8. फोटोग्राफ युक्त पेंशन दस्तावेज जैसे पूर्व सैनिक की पेंशन बुक, पेंशन पेमेंट ऑर्डर, पूर्व सैनिक की विधवा या आश्रित का प्रमाण पत्र, वृध्दावस्था पेंशन आदेश और विधवा पेंशन आदेश (28-2-2009 तक जारी)।

9. स्वतंत्रता सैनानी का फोटोयुक्त पहचान पत्र।

10. 28 फरवरी, 2009 तक जारी किए हथियार लायसेंस।

11. सक्षम अधिकारी द्वारा 28 फरवरी, 2009 तक जारी किए गए फोटोयुक्त शारीरिक विकलांगता प्रमाण पत्र।

12. 28 फरवरी, 2009 तक जारी किए गए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मध्यप्रदेश के जॉब कार्ड।

13. स्वास्थ्य बीमा योजना के फोटोयुक्त स्मार्ट कार्ड (श्रम मंत्रालय की योजना, 28 फरवरी, 2009 तक जारी)

उपरोक्त में से कोई भी दस्तावेज सिर्फ परिवार के मुखिया के पास उपलब्ध होने पर इसका उपयोग परिवार के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए भी किया जा सका है, बशर्ते कि सभी सदस्य एक साथ आएं और परिवार का मुखिया उनकी पहचान करे

 

रविवार, अप्रैल 12, 2009

चम्‍बल के परिणाम जातिवाद पर ध्रुवीकृत, अफवाहों और कयासों का दौर जारी

ग्‍वालियर चम्‍बल- पार्टीयों से हटकर, प्रत्‍याशीयों की व्‍यक्तिगत छवि पर होगा चुनाव संग्राम

चम्‍बल के परिणाम जातिवाद पर ध्रुवीकृत, अफवाहों और कयासों का दौर जारी

 

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

चुनाव चर्चा-1

वैसे तो समूचे देश में ही अबकी बार का आम चुनाव कुछ खास और निराले अंदाज में हो रहा है और देश में परिपक्‍व होते लोकतंत्र की एक हल्‍की सी झलक भी इन चुनावों में देखने को मिलेगी ।

अबकी बार पार्टीयों का जादू और जंजाल लगभग पूरी तरह बेअसर है, न कोई मुद्दा है न कोई लहर, पार्टी का नाम बेअसर । चुनाव जैसे पूरी तरह प्रत्‍याशी पर आधारित होकर रह गये हैं ।

पार्टी के बजाय प्रत्‍याशी चयन पर आधारित चुनाव एक स्‍वस्‍थ व परिपक्‍व लोकतांत्रिक अवधारणा का स्‍पष्‍ट संकेत है 1 अब विज्ञापनों से मतदाता बेवकूफ बनने की स्‍िथति में नहीं है, न उस पर जय हो का कोई असर है और न भय हो का । बल्कि ये विज्ञापन आम जनता जनार्दन यानि आम मतदाता यानि गरीब की लुगाई के लिये महज जसपाल भट्टी के उल्‍टा पुल्‍टा जैसे शो मात्र बन कर रह गये हैं और जनता नेताओं की जोकरनुमाई हरकतों का ठहाका मार कर आनन्‍द ले रही है । जैसे चुनाव विज्ञापन अभियान न होकर ठहाका टाइप कामेडी सीरियल चल रहे हों ।

देश में जो अबकी बार सबसे अच्‍छी चीज उभर कर आ रही है वह आम मतदाता का पार्टीवाद से मोह भंग होने का है । अब प्रत्‍याशीवाद पर टिकते जा रहे ये चुनाव यह संकेत भी देगें कि देश को स्‍वतंत्र रूप से सोचने दीजिये, उसे स्‍वतंत्र निर्णय लेने दीजिये , बहुत हुआ व्हिप जारी करने का खेल, किसी एक पार्टी का निर्णय देश का निर्णय नहीं होता, पार्टी गलत करे या सही अब सांसदों की रबर ठप्‍पा भूमिका बन्‍द कराईये । उसे अपने दिल व दिमाग से सोचने दीजिये, सांसदों के नाम पर पालतू कुत्‍ते पालना और टुकड़े फेंक कर दुम हिलवाना बन्‍द करिये ।

राजनीतिक विश्‍लेषण तो यह तीव्र संकेत देता है कि आने वाले दो तीन चुनाव बाद यानि सत्रहवीं या उन्‍नीसवीं लोकसभा तक क्षेत्रीय दलों का भी अस्तित्‍व समाप्‍त हो जायेगा और तकरीबन इक्‍कीसवीं लोकसभा तक पूर्णत: निर्दलीय सरकार या राष्‍ट्रीय सरकार अस्तित्‍व में आ जायेगी ।

नेताओं ने देश को प्रयोग शाला बना रखा है, जिसका तीव्र आक्रोश जनता में स्‍वाभाविक है, लगभग नब्‍बे फीसदी सांसद संसद में अपनी पार्टीयों में अपने आकाओं के महज राजनीतिक चमचे मात्र बन कर पूरे पॉंच साल का वक्‍त गुजार आते हैं और अपने साहब से पांच साल तक सिर्फ ये पूछते रहते हैं कि साब दस्‍तखत कहॉं करना है । न उनमें खुद का दिमाग होता है, न खुद की सोच न खुद का विचार, या तो जो पार्टी कह दे या जो उनका आका कह दे, उन्‍हें सिर्फ वही भूमिका कठपुतली के मानिन्‍द निभानी होती है या फिर महज रबर सील की तरह उनके ठप्‍पे लगते रहते हैं । कुछ ऐसी प्रयोगशाला और अपरिपक्‍व बीमार लोकतंत्र हमारे देश में चलता रहा है, नेताओं ने जनता को चूहा, बंदर या खरगोश की तरह अपने सभी प्रयोग आजमाये हैं, हर भावना में देश को बहाया है, देश ने कभी राम के मंदिर पर विश्‍वास किया तो कभी गरीबी हटाओ पर, कभी सांप्रदायिकता के विरोध को अपनाया तो कभी रामराज्‍य की अवधारणा को, कभी बेरोजगारी मिटाने पर यकीन किया तो कभी सामाजिक न्‍याय पर, कभी धारा 370 को देश की तकदीर माना तो कभी भ्रष्‍टाचार का खात्‍मा उसका सपना बना । मतदाता बेचारा हर बार बार बार बार नेताओं पर विश्‍वास करता रहा, लेकिन उसका सपना कभी नहीं पूरा हुआ । आजादी के 62 साल तक नेता दनादन उसे सपना दिखाते रहे, वह देखता रहा और इन्‍तजार करता रहा कि वह सुबह कभी तो आयेगी । उस सुबह को न आना था न आयी ।

अब नेताओं के पास मतदाता को दिखाने के लिये कुछ नहीं बचा, न झूठे सपने का कोटा बचा और न वायदों का पिटारा । अब आपस में ही एक दूसरे पर आक्‍थू आक्‍थू में भिड़े हैं, अब हालात ये हैं कि एक कह रहा है, तेरी नाक चपटी, दूसरा कह रहा है तेरी मैया नकटी, एक बोलता है कि तू भेड़ा तो दूसरा कह रहा है कि तू केंड़ा । एक दूसरे पे कीच उछालते राजनीतिक दलों के दल दल में सबके कपड़े गन्‍दे हैं, होली खिल रही है मगर कीच की । एक बोला तू सवा सौ साल की बुढि़या तो दूसरा बोला अभी तो मैं जवान तू बुढ्ढा ।

वा रे देश वाह रे नेता, कौन है जो नंगा पैदा नहीं हुआ, कौन है जो हमाम में नंगा नहीं हैं । बहुत हुआ अब एक दूसरे को कित्‍ता नंगा करोगे । लगता है देश नेताओं की ब्‍ल्‍यू फिल्‍म सरे आम सरे राह देख रहा है । कैसे देश चलाओगे, नंगई प्रतियोगिता है या चुनाव । अब तो लगाम दो कीच फिकाई को । मतदाता चकरघिन्‍नी हो रहा है, उसे इतने बुरे गन्‍दे और नंगों में से कम बुरे और कम नंगे कम गन्‍दे को चुनना है, चुन लेने दो । शन्ति से चुन लेने दो । देश को पता है नंगो पर पैसा बहुत है, उल्‍ला रहे हैं, उलीच रहे हैं, दूसरों की नंगई बताते बताते अपने चड्डी खेल कर दिखा रहे हैं कह रहे हैं देखो मेरी नंगई सलामत है । स्‍टाप इट । स्‍टाप इट इमीजियेटली स्‍टाप इट । गरीब निर्दलीयों को भी अपनी बात इस देश में कहने दो, उनमें कहीं अधिक अच्‍छे लोग अच्‍छे उम्‍मीदवार हैं, केवल उन पर पैसा नहीं है इसलिये वे अपना प्रचार तक नहीं कर पा रहे ।

दादा सोमनाथ की बद्दुआ काश कामयाब हो कि ''तुम सब हार जाओ'' सब निर्दलीय जीत जायें ।

क्रमश: जारी अगले अंक में ........ 

मंगलवार, मार्च 17, 2009

व्‍यंग्‍य/ मसखरे नेताजी, पोल पोलिंग की भाग-1 चुनाव से जुड़ी रोचक बातें, क्‍या वाकई जीता हुआ उम्‍मीदवार जनप्रतिनिधि होता है

व्‍यंग्‍य/ चुनाव से जुड़ी रोचक बातें, क्‍या वाकई जीता हुआ उम्‍मीदवार जनप्रतिनिधि होता है

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

मसखरे नेताजी, पोल पोलिंग की भाग-1

विशेष टीप-  गणित की 7 प्रमेय विशेष प्रसिद्ध रहीं हैं, जिन्‍हें विश्‍व में कभी कोई गणितज्ञ हल नहीं कर पाया । इन प्रमेयों को भारत के रेल्‍वे के एक मामूली और नाकारा समझे जाने वाले रोजाना बेइज्‍जत किये छोटे से क्‍लर्क रामानुजम ने हल करके रद्दी के यानि कचरे के डिब्‍बे में फेंक दिया था । जो कि विश्‍व प्रसिद्ध गणितज्ञ को नजर आयीं तों उसने रामानुजम को विश्‍व का महान गणितज्ञ नवाजा । स्‍वामी विवेकानन्‍द की कहानी भी कोई भिन्‍न नहीं हैं । उन महान विद्वानों को नतमस्‍तक होते हुये मैं भी ऐसी अबूझ 7 चुनावी प्रमेय अर्थात समस्‍यायें यानि पहेलियॉं प्रस्‍तुत करने की धृष्‍टता कर रहा हूँ जो अभी तक अनसुलझीं हैं, जो इन्‍हें सुलझायेगा निसंदेह भारत के इन दोनों रत्‍नों यानि भारत रत्‍न (अभी तक ये महान भारतीय भारत रत्‍न से नहीं नवाजे गये हैं क्‍योंकि ये राजनीतिज्ञ नहीं थे, न इनका कोई रिश्‍तेदार कभी विधायक या सांसद ही बन पाया) की टक्‍कर का मेरी नजर में महान भारतीय, पूज्‍य भारतीय होगा ।     

क्‍या आपने कभी ध्‍यान दिया है कि आपके यहॉं के निर्वाचन क्षेत्र से कुल कितने उम्‍मीदवार चुनाव में खड़े हुये और उनमें से हरेक को कितने कितने वोट मिले ।

आईये भारतीय लोकतंत्र की कुछ मजेदार रोचक बातों पर मुलाहिजा गौर फरमायें ।

मान लीजिये कि एक विधानसभा या एक लोकसभा चुनाव सम्‍पन्‍न हुआ और चुनाव में कुल 16 प्रत्‍याशी खड़े हुये जिसमें इस क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्‍या 500 है । जब चुनाव हुआ तो कुल 480 लोगों ने वोट डाले ।

चुनाव में हर मतदाता ने अपनी अपनी पसन्‍द का वोट डाला यानि अपने मनपसन्‍द प्रत्‍याशी को वोट किया ।

मतगणना हुयी और चुनाव परिणाम मान लीजिये कि निम्‍न प्रकार रहा %

 

क्रमांक

प्रत्‍याशी

प्राप्‍त मत    

1.     

रामलाल

212

2

मनोहर सिंह

37

3

रामकली

10

4

लालूराम

5

5

करियाचन्‍द

50

6

रामनिवास

30

7

छिद्दी लाल

21

8

ओमवीर सिंह

11

9

रामबेटी

9

10    

राजकुमारी

4

11    

धनियाराम

3

12    

सेठ गिरधारी लाल

5

13    

केशव चन्‍द्र

16

14    

गिरवरलाल

18

15    

धनुई

40

16

करोड़ीमल

9     

कुल वोट

 

480

 

अब ऊपर की सारणी के मुताबिक सर्वाधिक 212 वोट पाने वाला प्रत्‍याशी रामलाल है ।

कुल वोट चूंकि 480 पड़े हैं जिसका आधा यानि 50 फीसदी 240 होता है अर्थात क्षेत्र के आधे से अधिक मतदाताओं ने रामलाल को वोट नहीं दिया । केवल 212 लोगों ने रामलाल को वोट दिया है । इस प्रकार रामलाल केवल 212 लोगों का प्रतिनिधि सिद्ध हुआ । और 480 में से 212 घटाईये तो प्राप्‍त संख्‍या 268 होती है । अत: सिद्ध हुआ कि विजयी प्रत्‍याशी रामलाल 268 लोगों यानि मतदाताओं का प्रतिनिधि नहीं हैं ।

अब जिन 268 लोगों ने रामलाल को वोट नहीं दिया उनका रामलाल किस हिसाब से प्रतिनिधि कहलायेगा । क्‍या रामलाल उनका प्रतिनिधि माना जाना चाहिये । क्‍या वे 268 मतदाता जिन्‍होंने रामलाल को वोट नहीं दिया, रामलाल को अपना प्रतिनिधि मानेंगें । या रामलाल के पास अपनी समस्‍या लेकर जायेंगें ।

नहीं कदापि नहीं, वे कतई रामलाल को अपना प्रतिनिधि नहीं मानते इसलिये उन्‍होंने रामलाल को वोट नहीं दिया । अब इन 268 लोगों पर भी रामलाल को उनका जनप्रतिनिधि कह कर थोपा जाना क्‍या उचित है । क्‍या वे 268 मतदाता अगले 5 वर्ष तक बिना प्रतिनिधि के भारत के लोकतंत्र में रहेंगे । (वर्तमान व्‍यवस्‍था में तो रह रहे ही हैं) क्‍या रामलाल के खिलाफ आये 268 वोट उसके मिले 212 वोटों से अधिक नहीं हैं । क्‍या वाकई इस तरह रामलाल जीता या हारा । फिर रामलाल को समूचे क्षेत्र का जनप्रतिनिधि कैसे माना जाये । ये 268 लोग तो 5 साल तक रामलाल से मिलने तक नहीं जायेंगें, और रामलाल भी हरेक को इन 268 में ही गिनेगा और अधिकतर (चेले चमचों को छोड़ कर ) लोगों को सुनेगा ही नहीं । देश में यही चल रहा है कि नहीं ।    

चलिये आप इस पहेली को सुलझाईये, मैं दूसरी पहेली तब तक आपको देता हूँ । और विचार करिये कि कितना निर्दोष और निष्‍पक्ष है हमारा निर्वाचन और कितनी वोट पावर से समृद्ध या कमजोर (ऋणात्‍मक)होता है हमारा जनप्रतिनिधि । इस पहेली को बूझें तो जानें । या फिर वर्तमान या पूर्व विधायक या सांसद या चुनाव लड़ने के इच्‍छुक भावी सांसद या विधायक से इसका समाधान अवश्‍य पूछें । और मुझे अवश्‍य बतायें, मैं इसका समाधान अवश्‍य प्रकाशित करूंगा ।  

 

क्रमश: जारी....

गुरुवार, मार्च 12, 2009

कॉग्रेस के 12 प्रदेशों के लोकसभा प्रत्‍याशीयों की घोषणा, म.प्र. से 12 प्रत्‍याशी घोषित

कॉग्रेस के 12 प्रदेशों के लोकसभा प्रत्‍याशीयों की घोषणा, म.प्र. से 12 प्रत्‍याशी घोषित

मुरैना, गुना, छिन्‍दवाड़ा और खण्‍डवा में सीधे मुकाबले के आसार, ग्‍वालियर पर तिकोना संघर्ष

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

लम्‍बे समय से प्रतीक्षित कॉंग्रेस प्रत्‍याशीयों की सूची की घोषणा के साथ ही मध्‍यप्रदेश की चुनावी तस्‍वीर लगभग साफ होती जा रही है और आने वाले चुनाव में ऊँट किस करवट बैठेगा यह परिदृश्‍य लगभग दृष्टिगोचर सा होता जा रहा है ।

मध्‍यप्रदेश के सन्‍दर्भ में अभी तक घोषित प्रत्‍याशीयों की सूची के तले ग्‍वालियर त्रिकोणीय संघर्ष में और मुरैना, गुना, छिन्‍दवाड़ा ओर खण्‍डवा में सीधे मुकाबले के आसार है यद्यपि इन सभी सीधे मुकाबलों में अधिक दम नहीं जान पड़ रही किन्‍तु मुकाबला तो होगा ही, देखना यह है कि रिकार्ड मत से इनमें से कौन विजयी होगा ।

मुरैना में अब तक बहुजन समाज पार्टी, माकपा, कांग्रेस, भाजपा, गोंगपा, और समाजवादी पार्टी अपने अधिकृत प्रत्‍याशी घोषित कर चुके हैं, केवल राष्‍ट्रीय जनता दल, भाजशपा, लोजशपा, और राकांपा जैसे दलों के प्रत्‍याशीयों की घोषणा शेष है ।

अभी तक के परिदृश्‍य में मुरैना में सीधा मुकाबला बहुजन समाज पार्टी और भाजपा के बीच होना तय है । जिसमें अभी तक की आनुमानिक विश्‍लेषण से भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष नरेन्‍द्र सिंह तोमर की जीत लगभग सुनिश्चित है यदि अन्‍य बकाया दल किसी ताकतवर राजपूत प्रत्‍याशी को नहीं लड़ाते तो संभव है कि तोमर की रिकार्ड जीत हो । माकपा और सपा प्रत्‍याशीयों की बदौलत नरेन्‍द्र सिंह तोमर की राह और अधिक आसान हो गयी है, माकपा और सपा प्रत्‍याशी बहुजन समाज पार्टी को खासी क्षति पहुँचायेंगे ।

ग्‍वालियर में जैसा कि सुनने में आया है कि फूल सिंह बरैया भी चुनाव लड़ने जा रहे हैं, ऐसी सूरत में ग्‍वालियर मे गंभीर त्रिकोणीय संघर्ष संभव होगा और चुनाव परिणाम अनिश्चित होगा ।

गुना, छिन्‍दवाड़ा में हालांकि सीधे मुकाबले भाजपा और कॉंग्रेस के बीच होंगें किन्‍तु यहॉं लगभग एकपक्षीय परिणाम कॉंग्रेस के पक्ष में होंगे ।

खण्‍डवा में भाजपा के नन्‍द कुमार सिंह चौहान का कॉंग्रेस के अरूण यादव से सीधा संघर्ष संभव है जिसमें अभी स्‍पष्‍ट नहीं है कि परिणाम किसके पक्ष में जायेगा ।

चम्‍बल की दूसरी सीट भिण्‍ड दतिया लोकसभा सीट पर अभी दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने प्रत्‍याशी घोषित नहीं किये हैं किन्‍तु जैसा कि कयास है यह सीट कॉंग्रेस के पक्ष में एक प्रत्‍याशी विशेष के आने पर एकपक्षीय होकर आ सकती है अन्‍यथा इस सीट पर भी सीधा या त्रिकोणीय मुकाबला होगा । ग्‍वालियर भिण्‍ड सीटों के त्रिकोणीय मुकाबले बहुजन समाज पार्टी और फूल सिंह बरैया की मैदानी स्थितियों पर आधारित होंगे ।           

 

नई दिल्‍ली 12 मार्च 09, आगामी लोकसभा चुनाव के लिये कांग्रेस इ ने 12 प्रदेशों के प्रत्‍याशीयों की घोषणा कर दी है । अधिकृत घोषित प्रत्‍याशीयों की प्रदेशवार सूची आज शाम 5 बजे तक निम्‍न प्रकार है,

 

MADHYA PRADESH

The candidates selected by the CEC for the ensuing Elections to the Lok Sabha from Madhya Pradesh.

Sl.No.

No & name of Constituency

Selected Candidate

1

1 MORENA

RAM NIWAS RAWAT

2

3 GWALIOR

ASHOK SINGH

3

4 GUNA

JYOTIRADITYA SCINDIA

4

6 TIKAMGARH (SC)

VRINDHAWAN AHIRWAR

5

7 DAMOH

CHANDRABHAN SINGH

6

10 REWA

SUNDARLAL TIWARI

7

15 BALAGHAT

VISHVESHWAR BHAGAT

8

16 CHHINDWARA

KAMALNATH

9

24 RATLAM (ST)

KANTILAL BHURIA

10

25 DHAR-(ST)

GAJENDRA SINGH RAJUKHEDI

11

28 KHANDWA

ARUN YADAV

12

29 BETUL . ST

OZA RAM

 

बुधवार, फ़रवरी 18, 2009

ई गवर्नेन्स और वेब पत्रकारिता पर एडवांस इण्टरनेट प्रशिक्षण मुरैना में होगा

ई गवर्नेन्स और वेब पत्रकारिता पर एडवांस इण्टरनेट प्रशिक्षण मुरैना में होगा

मुरैना 17 फरवरी 09/ सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्था नेशनल नोबल यूथ अकादमी द्वारा मुरैना में आगामी अप्रेल माह से एडवांस्ड इण्टरनेट प्रौद्योगिकी और ई गवर्नेन्स तथा ई व्यवसाय व ई रोजगार पर आधारित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है ।

       वेब सेवाओं की विशिष्ट उपलब्धियों और अनुभवों को प्रख्यात इण्टर नेट विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थीयों के साथ शेयर किया जायेगा । प्रशिक्षण उपरान्त कुछ पाठयक्रमों के लिए भारत सरकार द्वारा आयोजित परीक्षा देकर भारत सरकार का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकेगा । प्रशिक्षण में विद्यार्थी , बेरोजगार, सरकारी कर्मचारी और पत्रकार साहित्यकार तथा इण्टरनेट व्यावसायी शामिल हो सकेंगे । संचालित होने जा रहे कायर्क्रम में एडवांस इण्टरनेट , वेब पत्रकारिता और साहित्यकारिता, वेब डिजाइनिंग तथा कामन सर्विस सेण्टर व ई गुमटी संचालन, इण्टरनेट आपरेशन्स ई गवर्नेन्स एवं सामुदायिक सेवायें आदि प्रमुख है । प्रशिक्षण के इच्छुक युवा 28 फरवरी तक तथा विलम्ब शुल्क सहित 15 मार्च तक नेशनल नोबल यूथ अकादमी के गांधी कालोनी स्थिति कार्यालय पर संपर्क कर सकते है ।

       यह प्रशिक्षण अपने प्रकार का पहला प्रशिक्षण होगा जिसमें वेब सर्वर के संचालक और वेब डिजायनर सीधे ही प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देंगे ।