बुधवार, अक्टूबर 07, 2020

उपचुनावों के लिये भाजपा प्रत्याशीयों की घोषणा ,सभी 28 प्रत्याशीयों की सूची देंखें

 


 

शुक्रवार, सितंबर 11, 2020

भिंड जिला की गोहद विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिये कांग्रेस ने घोषित किया उम्मीदवार , पहली सूची आई 15 टिकट घोषित

कांग्रेस प्रत्याशीयों की 15 विधानसभा क्षेत्रों के लिये उपचुनाव हेतु सूची जारी , 3 सामान्य तो शेष 12 आरक्षित सीटों हेतु प्रत्याशी घोषित हुये , दिमनी सै रवीन्द्र सिंह तोमर , अंबाह से सत्यप्रकाश शेकरवार (गलत सरनेम लिख कर आया है सूची मैं एस सी सीट पर राजपूतों का सरनेम लिख दिया गया है ) जौरा सीट पर इस सरनेम का असर पडेगा , ग्वालियर सीट से प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुकाबले में कांग्रेस ने किसी सुनील शर्मा को टिकिट दिया है , कांग्रेस प्रत्याशीयों की पहली सूची आते ही , उपचुनावों के परिणाम करीब करीब साफ हो गये , और आने वाले उपचुनावों के बाद किसकी सरकार म प्र में 2023 तक रहेगी इस पर से कुहासा हट गया । कांग्रेस की पहली सूची में सिंधिया समर्थकों और दिनेश गुर्जर के लेन देन और सिफारिश‌ वालों को ही टिकिट दिये गये हैं ।

 

शुक्रवार, सितंबर 04, 2020

सायबर क्राइम कैसे पहचानें , कार्यवाही न करने वालेे पुलिस वालों को जेल कैसे भिजवायें

 

सायबर क्राइम और हेकिंग कैसे पहचानें और क्या कानूनी कार्यवाही करें कि हैकर्स और आनलाइन आपको सोशल मीडिया तथा अन्य जगह हतोत्साहित करने वाले क्रिमिनल्स को सजा दिलाकर जेल भिजवायें -- नरेन्द्र सिंह तोमर '' आनंद'' एडवोकेट , सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट एडवोकेट
बहुत खतरनाक है माइक्रोसाफ्ट का एज क्रोमियम ब्राउजर ..... हेकर्स के लिये बेहद आसान और प्राक्सी वेबसाइट ... नकली वेबसाइटों की ओर रीडायरेक्ट करना .... नये एज क्रोमियम वेब ब्राउजर की विशेषता है , सेव्ड पासवर्ड का हैकर्स के लिये आसानी से इस्तेमाल करना तथा मनमाने नकली प्रदर्शन करना आदि नये एज क्रोमियम ब्राउजर की खासियतें हैं , बच कर रहिये , इसे एंटीवायरस भी सिक्यारिटी प्रदान नहीं करता है , इसमें व्हाटस वेब भी नहीं चलता है और इस एज क्रोमियम ब्राउजर को डिनाई कर देता है ,जबकि इसके उलट इंटरनेट एक्सप्लोरर , गूगल क्रोम ब्राउजर सही काम करते हैं , जबकि फायर फॉक्स को एंटीवायरस सिक्योरिटी प्रदान नहीं करता , हालांकि इसमें व्हाटस एप्प वेब सही चलता है .... अत: इंटरनेट इस्तेमाल करते समय या सर्फिंग करते समय ब्राउजर का चयन काफी सोच समझ कर करें और सिस्टम के सेव पासवर्डों को हर 36 र्घंटे पर बदलते रहें , हालांकि मात्र अकेला माइक्रोसाफ्ट अपने ई मेल में हर 72 घंटे पर पासवर्ड बदलने की सुविधा देता है लेकिन अन्य कोई नहीं , लिहाजा आप कोई सा अकाउंट इस्तेमाल करें दो चरणीय सत्यापन अवश्य लागू करें ।
हैकर इसके बाद अपने आपकी मोबाइल सिम को कनेक्ट करने/ हैक करने का प्रयास करेगा , आप बड़ी आसानी से पकड़ सकेंगें कि हैकर अगल बगल में है या दूर से रिमोट कंट्रोल किया जा रहा है , दूर से कंट्रोल करने वाला मोबाइल सिम कंट्रोल नहीं कर पायेगा और लोकल में ही अगर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी का एजेंट या मांबाइल सिम बेचने वाले कारिंदे या इंटरनेट सामान रूटर या वायरलेस डिवाइसेज , कैमरे वाइफाइ या वेबकैम बेचने या इस्तेमाल करने वाले किसी के द्वारा गड़बड़ी की जा रही होगी तो आसानी से पकड़ में आ जायेगी , यह गड़बड़ी ट्रांसमिशन टावर से भी की जा रही होगी तो आसानी से पकड़ में लाने के लिये अपने मोबाइल फोन को एक टावर से दूसरे स्थान की ओर ले जाते वक्त स्विच आफ करके ले जाइये , दूसरे तीसरे चौथे टावर लोकेशन पर इसी तरह अलग अलग चेक कर लीजिये , गड़बड़ी वाला टावर आसानी से पकड़ में आ जायेगा , आपको आई टी एक्ट 2000 के संशोधित अधिनियम व सभी संशोधित प्रावधानों का बेहतर ज्ञान किसी अच्छे सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट एडवोकेट से पाना चाहिये ।
उसके उपरांत ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश और दिशा निर्देशों के अनुसार पुलिस को एफ आई आर धारा 154 द प्र सं के तहत देना चाहिये , उसके उपरांत जिला पुलिस अधीक्षक को द प्र सं की धारा 154(3) के तहत और वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयो को द प्र सं की धारा 36 के तहत आई जी , डी आई जी से लेकर डीजीपी तक इसी धारा 36 के तहत शामिल हैं एफ आई आर भेजना चाहिये, अपराध के सबूत इकठ्ठे करना और अपराध सिद्ध करना पुलिस का काम है , यदि फिर भी पुलिस कार्यवाही न करे तो ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य के अनुसार आप पुलिस को केस देने के 15 दिन गुजरने ( 15 दिन गुजरने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सन 2019 में जारी किया है ) के बाद कभी भी आप जिला अदालत में धारा 200 का परिवाद लायें और जिला अदालत उसे रिजेक्ट करे या न सुने तो हाईकोर्ट में धारा 482 की पिटीशन लायें हाईकोर्ट एफ आई आर दर्ज करने और विवेचना करने व उसका धारा 173 के तहत रिपोर्ट यानि कि चालान पेश करने का आदेश जारी करेगा । इसमें खास ख्याल रखने वाली बात यह होगी कि आपने खुद ने जो भी जानकारी या साक्ष्य या सबूत इकठ्ठे करें हैं उन्हें बाकायदा किसी तकनीकी स्पेश्लिस्ट या किसी ऐसे एडवोकेट की मदद से जिसने कि बी एस सी गणित से या इंजीनियरिंग करने के बाद एल एल बी की हो ,
उसकी यानि ऐसे एडवोकेट की सहायता से एक डायरी में सारे ब्यौरे कलमबद्ध कर लेने चाहिये , यह न केवल हाईकोर्ट में काम देंगें बल्कि बाद में एफ आई आर के अदालत में मुकदमें में यानि क्रिमिनल केस के रूप में चलने में मुलजिमों को सजा दिलाने में काम आयेंगेंं , क्योंकि इलेक्ट्रानिक एविडेसेज और इलेक्ट्रानिक रिकार्डस कितने भी बार डिलीट करने के बावजूद कभी ख्त्त्म नहीं होते , ये डिलीट हो जाने के बाद भी बड़ी आसानी से रिकवर हो जाते हैं । चूंकि इन मामलों में एफ आई आर दर्ज न करने वाले या इससे जिम्मेवार सभी पुलिस कर्मी भी इस अपराध में मुलजिम बनते हैं और उनकी नौकरी तो जाती ही है , वेतन पेंशन तो जप्त होते ही हैं , जेल भी तुरंत ही जाना पड़ता है , लिहाजा वे आखरी दम तक साक्ष्य सबूत नष्ट करेंगें और आपको अदालतों तक जाने से रोकेंगें ही , क्योंकि उन्हें अपनी हर चीज जाजी और सीधे सीधे सजा और जेल नजर आती है , इसलिये इस प्रकार के मामले में जिला स्तर पर भी और हाई कोर्ट के स्तर पर भी एडवोकेट सही सोचसमझ कर चयन करें , जिसे पुलिस के खिलाफ और सायबर क्राइमों का लड़ने का बेहतरीन ज्ञान और तजुर्बा हो । ........
-- नरेन्द्र सिंह तोमर ,एडवोकेट , म. प्र. उच्च न्यायालय , खंडपीठ ग्वालियर एवं समस्त अधीनस्थ जिला एवं सत्र न्यायालय ।

सोमवार, मार्च 26, 2018

प्रोबोनो एडवोकेट ने म.प्र. पुलिस हेडक्‍वार्टर में साइबर क्राइम और गुंडागर्दी की दर्ज कराई इत्‍तला

प्रोबोनो एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ने भारत सरकार की ओर से म. प्र. पुलिस के डी. जी. पी. के सायबर सेल में दर्ज कराई एफ. आई. आर. और एडिशनल इत्तलायें दीं. मामला सायबर क्राइम , आई. टी. एक्ट, आई. पी. सी. एवं लीगल एड सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987. से संबंधित.
मामला ग्‍वालियर पुलिस जोन के सायबर सेल के पुलिस अधीक्षक के हवाले किया गया , विवेचना व अनुसंधान जारी है


मंगलवार, फ़रवरी 20, 2018

अब जिला न्यालयालय भी ऑनलाइन हुये , जिला ई कोर्ट में भी अब इंटरनेट के जरिये ऑनलाइन ई फाइलिंग तथा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की तरह सारी सुविधायें ई कोर्ट हुईं



अब जिला न्‍यायालय भी ऑनलाइन हुये , जिला ई कोर्ट में भी अब इंटरनेट के जरिये ऑनलाइन ई फाइलिंग तथा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की तरह सारी सुविधायें ई कोर्ट हुईं
अब वकीलों को कोर्ट कैम्‍पस में बैठकर दूकान सजा कर नहीं बैठना पड़ेगा
मुरैना / ग्‍वालियर/ भि‍ण्‍ड / जबलपुर , भोपाल, इंदौर । 20 फरवरी 18. ( ग्‍वालियर टाइम्‍स) म.प्र. हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर म.प्र. की जिला अदालतें ( जिला एवं सत्र न्‍यायालयों को भी ई कोर्ट में तब्‍दील कर दिया गया है और अब म.प्र. के जिला एवं सत्र न्‍यायालयों में भी केसो की ई फाइलिंग, नकल प्रतिलिपि लेना , किसी भी प्रकार का आवेदन देना आदि, ई पेपरबुक आदि सभी सुविधायें अब इंटरनेट के जरिये ऑनलाइन फाइल किये जा सकेंगें , इसके अलावा न्‍यायालय की फीस भी ऑनलाइन ही जमा होगी ।
अभी तक प्रोबोनो एडवोकेट लीगल एड सेवायें एवं सहायता केन्‍द्रों को दूसरे जिले का केस मिलने पर अनेक जगह काफी दूरियों पर स्‍वयं उपस्‍थ‍ित होना पड़ता था , इस सुविधा के जिला न्‍यायालयों में लागू होने के बाद अब प्रोबोनो एडवोकेटस अपने कार्यालय से ही सभी प्रकार की ई फाइलिंग एवं आवेदन आदि किसी भी जिला एवं सत्र न्‍यायालय में इंटरनेट के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत ई कोर्ट में दे सकेंगें , इसके अलावा वे कोर्ट भी ऑनलाइन ही बदल सकेंगें , जिस कोर्ट में उन्‍हें मामला सुनवाई उपयुक्‍त व उचि‍त जान पड़ेगी , या जिस जिला में केस सुना जाना चाहिये उसमें वे केस ऑनलाइन ही ट्रांसफर कर सकेंगें । यह सुविधा एकदम उसी तरह है जैसे कि वर्तमान में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में बेंच बदलने के लिये है ।
अब म.प्र. की जिला अदालतों में एडवोकेट का यूजर आई. डी. और पासवर्ड वही रहेगा जो कि उन्‍हें म.प्र. हाईकोर्ट के लिये प्राप्‍त हुआ था , वे म.प्र. हाईकोर्ट से प्राप्‍त यूजर आई. डी. व पासवर्ड का इस्‍तेमाल कर ही किसी भी जिला न्‍यायालय में लॉगिन कर सकेंगें । उन्‍हे अलग से यूजर आई. डी. व पासवर्ड नहीं लेना होगा । जबकि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इण्‍ड‍िया का ए.ओ.आर. ( एडवोकेट ऑन रोल) यूजर आई. डी. व पासवर्ड पहले से ही अलग है , वह अलग व गुप्‍त ही रहेगा और सुप्रीम कोर्ट के लिये ही लॉगिन हेतु रहेगा ।
हालांकि आधि‍कारिक व घोषणा के तौर पर यह सुविधा जिला न्‍यायालयों में शुरू कर दी गई है , और म.प्र. हाईकोर्ट की यूजर आई.डी. और पासवर्ड प्राप्‍त एडवोकेटस एवं प्रोबोनो लीगल एड एवं सर्वि‍सेज के लिये यह लिंक्स ओपन हो रहीं हैं,  किन्‍तु व्‍यावहारिक तौर पर अभी कई जिला न्‍यायालयों में बहुत तेजी से इस पर काम चल रहा है और इस समय हर जिला कोर्ट में ई फाइलिंग व अन्‍य ई कार्य हेतु अभी ई फाइलिंग लिंक्‍स आनलाइन नहीं की गई हैं , केवल ई कॉमर्स कोर्ट की लिंक ही प्रदर्श‍ित होती है , ऐसी दशा में ई एडवोकेटस , म.प्र. हाईकोर्ट की संबंधि‍त बेंच के वेब पोर्टल पर उपलब्‍ध सुपवधाओं के जरिये अधनीस्‍थ जिला न्‍यायालय के वेबपोर्टल पर इन सुविधाओं का उपयोग कर जरिये म.प्र. हाईकोर्ट अपना केस ई फाइल व अन्‍य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं ।
इस प्रक्रिया के ऑनलाइन होते ही , जिला न्‍यायालयों में स्‍वत: ही वकीलों का बैठना बंद और इंटरनेट पर काम करना व आई.सीटी. में सुप्रशि‍क्ष‍ि त होना अनिवार्य हो जायेगा ।