सोमवार, फ़रवरी 08, 2010

मेहगांव के निर्वाचित जनपद सदस्यों की सूची

मेहगांव के निर्वाचित जनपद सदस्यों की सूची

भिण्ड 5 फरवरी 2010

       मेहगांव के निर्वाचित जनपद पंचायत सदस्यों की सूची रिटर्निग अधिकारी द्वारा घोषित की गई वार्ड 1 सुकाण्ड से राम राजा राजेन्द्र सिंह, वार्ड 2 कुटरोली से कलावती, वार्ड 3 पचेरा (गोरमी ) से विमलादेवी भदौरिया, वार्ड 4 परोसा से रामसिवया सखवार, वार्ड 5 सिकरौदा से उर्मिला, वार्ड 6 लावन से श्रीमती लक्ष्मी बाई पत्नी लाखन सिंह, वार्ड 7 महदौली से गीता राजबहादुर सिंह, वार्ड8 बरहद से संगीता, वार्ड 9 सौधा से दाखोबाई लक्ष्मन प्रसाद, वार्ड 10 मानहड से रविप्रताप सिंह भदौरिया, वार्ड 11 नुन्हड से राजोबाई, बार्ड 12 खेरिया से रामसिया बंसल, वार्ड 13 गाता से चमेली बाई, वार्ड 14 धनौली से उर्मिला देवेन्द्र सिंह, वार्ड 15 गिजुर्रा से अनीता पवैया, वार्ड 16 कनाथर से पुष्पा वालगोविन्द सिंह चौधरी, वार्ड 17 गोअरा से मुन्नी/देवेन्द्र सिंह, वार्ड 18 बरासों से माधुरी, वार्ड 19 गहेली से मोहर सिंह, वार्ड 20 भारौली कला से रामनरेश सिंह, वार्ड 21 मेहरा से बेदराम, वार्ड 22 बिरगंवा से कल्पना सचदेव सिंह भदौरिया, वार्ड 23 अमायन से रामलखन सोनी, वार्ड 24 खेरोली से अशोक सिंह तथा वार्ड 25 सुरूरू से बेताल सिंह पुत्र छोटेसिंह गुर्जर निर्वाचित हुए।

 

गोहद के निर्वाचित जनपद सदस्यों की सूची

गोहद के निर्वाचित जनपद सदस्यों की सूची

       भिण्ड 5 फरवरी 2010

गोहद के निर्वाचित जनपद पंचायत सदस्यों की सूची रिटर्निग अधिकारी द्वारा घोषित की गई  वार्ड 1 से रामरतन बघेल, 2 से राजेन्द्र सिंह जाटव, 3 से सुरेलता, 4 से राजेन्द्र सिंह परमार 5 से सुनील, 6 सेफूलवती, 7 से श्रीराम वरन सोलंकी, 8 से चमेली , 9 से इन्द्रावाई गुर्जर, 10 से निर्मिला देवी, 11 से सरोज, 12 से संतरोबाई कुशवाह, 13 से कल्पना शर्मा  14 से भूरी बाई कुशवाह, 15 से रामाबाई, 16 से भारत सिंह,  17 से श्रीराम गोपाल, 18 से पुष्पा, 19 से श्री राजेश परिहार, 20 से अवधेश शर्मा, वार्ड 21 से परिमाल सिंह कुशवाह, 22 से मंशाराम, 23 से फूलमती, 24 से जबरसिंह तथा 25 से गुड्डी निर्वाचित हुई।

 

अटेर के निर्वाचित जनपद सदस्यों की सूची

अटेर के निर्वाचित  जनपद सदस्यों की सूची

भिण्ड 5 फरवरी 2010

       जनपद पंचायत अटेर के जनपद सदस्यों की सूची रिटर्निग अधिकारी द्वारा शुक्रवार को घोषित की गई। वार्ड 1 से ऊषा, 2 से मकरन्द सिंह, 3 से इन्द्राबाई, 4 से सरिता तोमर, 5 से बेबी देवी ,  6 से उमादेवी, 7 से जगदीश,  8 से सुलेखा शर्मा,  9 से सवेन्द्र सिंह भदौरिया,  10 से राममाता देवी, 11 से राजवीर, 12 से श्रीमती पपीतादेवी,  13 से रामप्रकाश, 14 से महादेवी सुरेश, 15 से भीखाराम, व् 16 से मुन्नदी देवी, 17 से शकुन्तला तोमर,  18 से पप्पी राजेन्द्र सिंह, 19 से श्रीमती सुमन शर्मा, 20 से सुमरनी देवी, 21 बृजेश कुमार, 22 रामा अखिलेश,  23 इन्द्रावती,  24 से विद्यावती तथा 25 से श्रीमती श्यामाबाई निर्वाचित हुई

 

विधिक सहायता एवं सूचना शिविर से लाभान्वित हुये ग्रामीणजन

विधिक सहायता एवं सूचना शिविर से  लाभान्वित हुये ग्रामीणजन

भिण्ड 5 फरवरी 2010

       भिण्ड ब्लॉक के ग्राम दीनपुरा प्राथमिक शाला प्रांगण में 5 फरवरी को विधिक सहायता सह सूचना शिविर एवं प्रदर्शनी का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मोहम्मद अरसद के आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। शिविर में न्यायाधीश प्रथम श्रेणी आरपी अहिरवार एवं प्रशांत शुक्ला सहित अधिवक्ता जयश्रीराम बघेल, रामनिवास राठौर, सीईओ जनपद पंचायत भिण्ड अतुल सक्सैना, उप संचालक पंचायत कबीर, उप संचालक जनसम्पर्क सुनील सिलावट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी सहित बडी संख्या में ग्रामीण महिला पुरूष एवं छात्र उपस्थित थे। शिविर का शुभारंभ प्रशांत शुक्ला द्वारा महात्मा गांधी की मूर्ति पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलित किया गया।

इस मौके पर श्री अरसद ने बताया कि कानून की जानकारी के अभाव में समाज के कमजोर एवं गरीब तबकों का  शोषण न हो इस हेतु विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले किसी भी व्यक्ति की कानूनी परेशानी को दूर करने हर संभव मदद की जाएगी। पीडित व्यक्ति विधिक सहायता कार्यालय में उपस्थित होकर लाभ प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा कि निर्धन व्यक्तियों को विधिक सहायता के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है।

रामनिवास राठौर अधिवक्ता ने कहा कि समाज के कमजोर एवं पिछडे तबकों के लिए विधिक सहायता एवं साक्षरता लागू की गई इसी तरह सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं को लोक हित लागू किया गया है। आपने ग्रामीणों से विधिक साक्षरता के साथ साथ लाभप्रद योजनाओं से लाभ लेने की अपील की।

जयश्रीराम बघेल ने ग्रामीणजनों से योजनाओं का लाभ लेने के लिए सजग बनने का आव्हान किया। उन्होने बताया कि राज्य सरकार द्वारा समाज के ऐसे वर्ग जिनकी वार्षिक आय 50 हजार रूपये से कम है उन्हें दी जाने वाली विधिक सहायता की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि माता पिता एवं अभिभावक बच्चों में नेतिक एवं संस्कारिक शिक्षा  दे।

सीईओ जनपद पंचायत ने अतुल सक्सैना ने उपस्थित लोगों का आव्हान किया कि विधिक साक्षरता एवं सूचना सह शिविर की जानकारी ग्राम के अन्य लोगों तक पहुंचाऐ जिससे समाज के हर पात्र व्यक्तियों को समय पर लाभ मिले।

 

 

आओं बनाए अपना मध्यप्रदेश अभियान में समर्पित सहयोग दे

दीनपुरा के विधिक सहायता सह सूचना शिविर में ग्रामीण महिला एवं पुरूषों को प्रदेश में गणतंत्र दिवस की 60 वीं वर्षगांठ से शुरू किये गये आओं अपना मध्यप्रदेश अभियान में समर्पित भाव से सहयोग देने की अपील की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा नागरिकों को सामाजिक सरोकार की भावना से जोडने तथा प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए शुरू किये गये अभियान में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने के लिए संकल्पबद्व तरीके से लोगों को जागरूक बनाए । शिविर में आओं बनाए अपना मध्यप्रदेश अभियान में  ग्रामीणों को बताया गया कि राज्य सरकार ने खेती को लाभ का धन्धा बनाने ग्राम में समग्र स्वच्छता कार्यक्रमों को गति देने, अधों सरंचना का विकास करने, शिक्षा और स्वास्थ कार्यक्रम को गति देने, महिला सशक्तिकरण को बढाने, ग्राम में स्थाई जल संवर्धन की इकाईयां निर्मित करने, हरियाली कार्यक्रम को गति देने, सुशासन और सुरक्षा तथा कानून व्यवस्था की प्राथमिकताएं सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई। 

बूथ पर पोलियो दवा पिलाने की अपील

विधिक साक्षरता एवं सूचना शिविर दीनपुरा में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा एनसी गुप्ता ने ग्रामीण महिला एवं पुरूषों से अपील करते हुये 7 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय पल्स पोलियों अभियान के द्वितीय चरण में 0 से 5 वर्ष तक उम्र के सभी बच्चों को बूथ पर दवा पिलाने की अपील की। इस मौके पर आपने जननी सुरक्षा योजना, संस्थागत प्रस्रव सहित स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्रियान्वित विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

प्रदर्शनी से लाभान्वित हुये दीनपुरा वासी, महिलाओं ने जन जाग्रति का संकल्प लिया

       दीनपुरा में जिला जनसम्पर्क कार्यालय भिण्ड द्वारा आयोजित प्रदर्शनी को निहारने के उपरांत दीनपुरा के ग्रामीण महिला एवं पुरूष तथा छात्र छात्राओं ने ग्राम पंचायत के अन्य महिला एवं पुरूषो तथा बच्चों को जागरूक बनाने तथा समाज के सभी तबकों के लिए शुरू की गई कल्याणकारी योजना का लाभ अन्य लोगों को दिलाने के लिए का संकल्प लिया। प्रदर्शनी में आओं बनाए अपना मध्यप्रदेश, मुख्यमंत्री भूमिहीन मजदूर सुरक्षा योजना, लाडली लक्ष्मी योजना, पोषण पुनर्वास योजना, नि:शुल्क सायकल एवं गणवेश तथा पाठयपुस्तक वितरण, मुख्यमंत्री कल्याण योजना, जननी सुरक्षा योजना सहित नशा मुक्ति अभियान के छायाचित्रों की प्रदर्शनी प्रदर्शित की गई।

 

जिला पंचायत के सारणीकरण एवं निर्वाचन की घोषणा आज 10.30 बजे से शुरू होगी कार्यवाही

जिला पंचायत के सारणीकरण एवं निर्वाचन की घोषणा आज 10.30 बजे से शुरू होगी कार्यवाही

भिण्ड 5 फरवरी 2010

       जिला पंचायत भिण्ड के  21 वार्डो के सदस्यों के निर्वाचन की सारणीकरण एवं परिणाम की घोषणा की कार्यवाही 6 फरवरी को प्रात: 10.30 बजे से होगी। भिण्ड जिले में जिला पंचायतों के 21 वार्डो के लिए सारणीकरण एवं निर्वाचन परिणाम घोषित किये जाने की कार्यवाही होगी। जिसके तहत भिण्ड 3, अटेर 4,गोहद 4 एवं मेहगांव 5 तथा लहार 3 में  तथा विकास खण्ड रौन में 2 सहित 21 जिला पंचायत वार्डो के सारणीकरण एवं निर्वाचन घोषणा की कार्यवाही की जाएगी।

 

रविवार, फ़रवरी 07, 2010

मुंबई मुद्दे पर क्षेत्रीय क्षत्रपों की चुप्पी का रहस्य? - निर्मल रानी

मुंबई मुद्दे पर क्षेत्रीय क्षत्रपों की चुप्पी का रहस्य?

निर्मल रानी,    63011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा,  फोन-0171- 2535628 email: nirmalrani@gmail.com

                                  देश की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाली मुंबई ने एक बार फिर देश की राजनीति  को गर्म कर दिया है। स्वयं को मुंबई के 'केयरटेकर' अथवा स्वयंभू 'सी ई ओ'  समझने वाले ठाकरे परिवार ने एक बार फिर 'मुंबई केवल हमारी है' का दावा सार्वजनिक रूप से ठोंक दिया है । चाचा बाल ठाकरे तथा भतीजे राज ठाकरे वैसे तो मुंबई के मुख्यमंत्री पद की खींचातान को लेकर आमने सामने एक दूसरे पर तलवारें खींचे नंजर आ रहे हैं परंतु मुंबई पर 'आधिपत्य' को लेकर दोनाें ही क्षेत्रीय सूरमा एक ही स्वर 'आमची    मुंबई' का नारा देते हुए उक्त नेतागण बड़े ही तल्ंख लहजे में तमाम तरह की ंगैर संवैधानिक बातें कर रहे हैं । हिंसा जैसे घटिया दर्जे के हथकंडे भी यह तथाकथित राजनैतिक तत्व अपना रहे हैं । यह कभी उत्तर भारतीयों की रेलगाड़ी में सरेआम पिटाई करने लगते हैं तो कभी यही लोग नौकरी हेतु मुंबई पहुंचे उत्तर भारतीयों पर हमलावर हो जाते हैं । टैक्सी ड्राईवर, दूध का व्यापार करने वाले, रेहड़ी खोमचेलगाने वाले तथा मंजदूरी करने वाले उत्तर भारतीय इनके निशाने पर हैं ।

              मुंबई के इन स्वयंभू ठेकेदारों को मराठी भाषा के आगे हिंदी सुनना  भी पसंद नहीं है। यह खुले तौर पर देश से अधिक मुंबई को महत्व दे रहे हैं। और तो और देश का जो भी राष्ट्रभक्त अथवा राष्ट्र्रीय सोच रखने वाला व्यक्ति मुंबई को पूरे देश की गौरवपूर्ण महानगर बताने का 'साहस' कर बैठता है यह स्वयंभू 'सी ई आ'े      उसे धमकी देने लग जाते हैं। उदाहरण के तौर पर राहुल गांधी ने कहा कि मुंबई पूरे देश की है तो इन ठाकरे बंधुओं ने राहुल को 'रोमपुत्र' के 'ंखिताब' से 'सम्मानित' कर दिया।  समाजवादी पार्टी के मुंबई से निर्वाचित विधायक अबु आंजमी ने राष्ट्रभाषा हिंदी में शपथ लेने का 'साहस' महाराष्ट्र विधान सभा में दिखलाया तो परिणामस्वरूप उन्हें थप्पड़ खाना पड़ा व इन्हीं क्षेत्रीय क्षत्रपों के चमचों के हाथों अपमानित होना पड़ा। मुकेश अंबानी जैसा व्यक्ति जिस पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था को गर्व है उसने मुंबई को पूरे देश वासियों की क्या कह दिया कि वह भी घटिया मानसिकता रखने वाले तीसरे दर्जे के इन राजनीतिज्ञों की आलोचना का पात्र बन गए। सचिन तेंदुलकर जैसा क्रिकेट खिलाड़ी जिस पर केवल हमारा देश या देशवासी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के क्रिकेट प्रेमी भी गर्व व उसका सम्मान करते हैं,ने भी मुंबई को भारत वासियों की बताया यह 'धूर्त राजनेता' उसे भी अनाप शनाप बकने लग गए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उत्तर भारतीयों तथा मुंबई के रिश्तों को न्यायसंगत बताने की कोशिश की तो 'ठाकरे एसोसिएटस' की ओर से उद्धव ठाकरे ने ंफरमाया -संघ मुंबई की चिंता न करे ं हम यहां बैठे हैं।

              समझ नहीं आता कि ठाकरे बंधु किस आधार पर मुंबई पर अपना एकाधिकार जता रहे हैं। न तो यह मराठी खानदान से हैं न ही मराठा राजनीति से इनका कभी कोई संबंध रहा है। सूत्र बताते हैं कि बाल ठाकरे के  पिता स्वयं मंजदूरी की तलाश में मुंबई जा पहुंचे थे। शायद उसी तरह जैसे आज कोई बिहारी अथवा उत्तर प्रदेश का निवासी रोंजी-रोटी कमाने हेतु मुंबई जाया करता है। ऐसे में इस परिवार को मराठा गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज का उत्तराधिकारी बनने का 'गौरव' कब और कहां से प्राप्त हो गया यह बात समझ से परे है। बड़ी हैरानगी की बात यह भी है कि जो बाल ठाकरे आज मुंबई से उत्तर भारतीयों को यह कह कर भगाना चाह रहे हैं कि मुंबई देश की धर्मशाला नहीं है वही बाल ठाकरे पूरे देश विशेषकर उत्तर भारत में क्या सोच कर अपने राजनैतिक संगठन शिव सेना का विस्तार करने के लिए इच्छुक रहते हैं्? लगभग पूरे उत्तर भारत में कहीं न कहीं कोई न कोई व्यक्ति ऐसा ंजरूर मिल जाएगा जो स्वयं को शिवसेना (बाल ठाकरे) का पदाधिकारी बताता हुआ मिलेगा। आख़िर क्षेत्रीय क्षत्रप के रूप में अपने चेहरे को बार-बार बेनंकाब करने वाले ठाकरे को जब उत्तर भारतीयों की शक्ल ही अच्छी नहीं लगती तो वे किस आधार पर उन्हीं उत्तर भारतीयों के मध्य अपनी संगठनात्मक घुसपैठ बनाने हेतु तत्पर रहते हैं।

              जब देश की राजनीति करने की इच्छा करती है तब यही ठाकरे घराना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व भाजपा का सहयोगी बनकर 6 दिसंबर 1992 की विवादास्पद अयोध्या घटना का भी भागीदार बनता दिखाई पड़ता है। आख़िर क्या है ठाकरे घराने की राजनीति की दिशा और दशा? यह घराना भारतवासी है, हिंदु है, मराठी है अथवा मुंबईया घराना या फिर शोध कर्ताओं के अनुसार मध्य प्रदेश से जुड़ा कोई मंजदूर परिवार? जो भी हो इस घराने ने ंफिलहाल मुंबई क ो देश से अलग करने का मानो ठेका ले रखा हो।   आंखिर मुंबई की समृद्धि से इस घराने का क्या लेना देना हो सकता है? मुंबई की समृद्धि में समुद्री तट का एक अहम योगदान है। भारत की संरचना तथा इसमें समुद्री प्राकृतिक सौंदर्य और इसके माध्यम से होने वाला समुद्री रास्ते का व्यापार मुंबई की समृद्धि में बुनियाद की भूमिका अदा करता है। ठाकरे घराने कामुंबई की इस प्राकृतिक उपलब्धि से क्या लेना -देना? मुंबई की दूसरी बड़ी पहचान यहां का ंफिल्मोद्योग है। ंफिल्म उद्योग की पूरे देश व दुनिया में प्रतिष्ठा का कारण वहां बनने वाली हिंदी ंफिल्में हैं। इससे भी ठाकरे घराने का लेना तो है और हो भी सकता है। परंतु देना कुछ भी नहीं। मुंबई उद्योग के लिहांज से देश का सबसे बड़ा औद्योगिक महानगर है। धन उगाही के लिहांज से इन्हें यहां से भी लाभ ही पहुंचता है। इस ठाकरे घराने का महानगर के औद्योगिक विकास में भी क्या योगदान है?देश का सबसे बड़ा शेयर बांजार मुंबई में स्थित है। इसका आधारभूत ढांचा भी शिवसेना या ठाकरे घराने द्वारा नहीं खड़ा किया गया है।      

                           हां यदि मुबंई में ठाकरे घराने का कोई योगदान है तो ख़ुशहाल मुंबई में सांप्रदायिकता का ंजहर फैलाने का, क्षेत्रवाद की  दीवारें खींचने का और मराठों को शेष भारतीयों से अलग करने की कोशिश करने का। कुंए के मेंढक सरीखी राजनीति करने वाले बाल ठाकरे की नंजर केवल इस एकमात्र लक्ष्य पर केंद्रित है कि किसी प्रकार वे मुंबई वासियों तथा मराठों व शेष भारतीयों के मध्य नंफरत व अलगाव की खाई इतनी गहरी करने में सफल हो जाएं कि भविष्य में उनका चश्मे-चिरांग उद्धव ठाकरे मराठा मतों का ध्रुवीकरण कर पाने में सफल हो सके तथा इस रास्ते पर चलते हुए राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में सफल हो जाए। अब चाचा ठाकरे की इस 'कुशल रणनीति' को भला भतीजे राज ठाकरे से बेहतर कौन समझ सकता था। अत: राज ठाकरे ने भी बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह की कहावत को चरितार्थ करते हुए स्वयं को बाल ठाकरे व उद्धव ठाकरे से भी बड़ा मुंबई का 'केयरटेकर' अथवा स्वयंभू 'सी ई ओ'  प्रमाणित करना शुरु कर दिया है। इन दोनाें ठाकरे बंधुओं में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप उत्तर भारतीयों पर चाराें ओर से हमले तेंज हुए हैं तथा राष्ट्रभाषा हिंदी को भी इन्हीं बंधुओं के चलते अपमानित होना पड़ रहा है।

              इस पूरे घटनाक्रम में एक और अदृश्य राजनैतिक घटनाक्रम भी चल रहा है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। और वह अदृश्य घटनाक्रम है ठाकरे घराने द्वारा मुंबई को लेकर किए जाने वाले नंगे नाच के विरुद्ध देश के किसी भी क्षेत्रीय क्षत्रप का वक्तव्य न आना। राहुल गांधी, सचिन तेंदुलकर,पी चिदंबरम,मुकेश अंबानी,कांग्रेस,आर एस एस,भाजपा,समाजवादी पार्टी,बहुजन समाज पार्टी,जेडीयू,आरजेडी व वामपंथीजैसे राष्ट्रवादी सोच रखने वाले कुछ राजनैतिक  संगठनों द्वारा तो यह ंजोर देकर कहा जा रहा है कि मुंबई पर पूरे देश का अधिकार है तथा मुंबई पूरे भारत की है। परंतु देश में ठाकरे की शिवसेना की ही तरह अन्य भी दर्जनों ऐसे राजनैतिक दल हैं जिनके नेता वैसे तो क्षेत्रीय क्षत्रपों की सी हैसियत रखते हैं परंतु केंदी्रय गठबंधन सरकारों के  दौर में यही क्षेत्रीय क्षत्रप देश की राजनीति करते भी दिखाई पड़ जाते हैं। प्रश् यह है कि आज के दौर में जबकि यह सांफ नज़र आ रहा है कि ठाकरे घराना अलगाववाद की दिशा में आगे बढ़ रहा है ऐसे में कांग्रेस व भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की ही तरह तथा सचिन तेंदुलकर व मुकेश अंबानी जैसे राष्ट्रीय सोच रखने वाले राष्ट्र भक्तों की ही तरह देश के अन्य राज्यों के क्षेत्रीय क्षत्रप मिलकर एक स्वर में या फिर अलग-अलग ही सही मुंबई मुद्दे पर अपना मुंह क्यों नहीं खोल रहे हैं  ''

              मुंबई मुद्देपर क्षेत्रीय क्षत्रपों की इस रहस्यमयी चुप्पी को साधारण चुप्पी नहीं समझना चाहिए। देश की राजनीति में स्वयं को स्थापित कर पाने में असफल रहने वाले यह क्षेत्रीय क्षत्रप कहीं ठाकरे घराने द्वारा चली जा रही घटिया राजनैतिक चालों का बारीकी से अध्ययन तो नहीं कर रहे हैं और इस पूरे घटनाक्रम के परिणाम की प्रतीक्षा तक चुप्पी बनाए रखने का निश्चय तो नहीं कर चुके हैं। यदि ऐसा है फिर तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए और भी अधिक ख़तरनाक संकेत है। और यदि ऐसा नहीं है ,सभी क्षेत्रीय क्षत्रप अथवा क्षेत्रीय राजनैतिक दल अथवा क्षेत्रीय राजनैतिक नेता भारत की एकता व अखंडता को सर्वोपरि मानते हैं,कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रत्येक स्थान पर, प्रत्येक भारतीय नागरिक के आने-जाने,रहने-सहने व कामकाज करने की पूरी स्वतंत्रता के पक्षधर हैं फिर उन्हें एकमत हो कर अब तक ठाकरे घराने को यह संदेश सांफतौर से दे देना चाहिए था कि मुंबई पूरे देश की है केवल ठाकरे घराने की 'जागीर' नहीं। परंतु क्षेत्रीय सोच रखने वाले नेताओं द्वारा ऐसा करने के बजाए अभी तक रहस्यमयी ढंग से चुप्पी धारण किए जाने का निश्चय किया गया है और इस चुप्पीका रहस्य क्या है भारतवासी यह ंजरूर जानना चाहते हैं।   

                                                                     निर्मल रानी