रविवार, अगस्त 09, 2009

ग्वालियर शिक्षा का संभावनाशील 'हब' - राकेश अचल

ग्वालियर शिक्षा का संभावनाशील 'हब'

  • राकेश अचल
  • लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

 

धरती उर्वरा हो, तभी उसमें फसल अच्छी होती है। ठीक यही बात शिक्षा और ग्वालियर पर लागू होती है। ग्वालियर उत्तरी म प्र. में ही नहीं बल्कि उत्तर भारत मे भी एक महत्वपूर्ण 'एज्यूकेशन हब' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

       ग्वालियर स्वतंत्रता पूर्व से ही शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। ग्वालियर के तत्कालीन शासकों ने शिक्षा के महत्व को बहुत पहले समझ और पहचान लिया था। ग्वालियर दरबार ने भी शिक्षा को रियासत की जिम्मेदारी के रूप में लिया और 1846 में 'लश्कर मदरसा' के नाम से लश्कर में पहला आधुनिक शिक्षा विद्यालय खोला। रियासत के एक मंत्री श्री दिनकर राव राजवाड़े की व्यक्तिगत रूचि के कारण 1852 से 1859 के बीच ग्वालियर में अंग्रेजी शिक्षा भी प्रारंभ कर दी गई। ग्वालियर अकेली ऐसी रियासत थी जहां 1857 में दो हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में स्कूल खोल दिये गये थे।

       ग्वालियर में 1885 में हाईस्कूल तथा 1890 में इन्टरमीडिएट कालेज की स्थापना कर दी गई थी। 1887 में ही ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की रजत जयंती स्मारक के रूप में बनी इमारत में विक्टोरिया कालेज की स्थापना की गई। इस इमारत का लोकार्पण 1899 लार्ड कर्जन ने किया। इसी इमारत में आज महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय संचालित हो रहा हे।

       ग्वालियर में 1895 में सरदार स्कूल और मिलिट्री स्कूल की स्थापना भी की गई। 1903 में यहां दो नये कालेज और 1905 में पहला कन्या महाविद्यालय खोला गया। 1915 में पहली आयुर्वेद शाला और 1939 में कमलाराजा कन्या महाविद्यालय स्थापित किया गया। इस संस्थान में आज विभिन्न संकायों की 7500 छात्रायें अध्ययन करतीं हैं।

       आजादी से पूर्व ही 1946 में ग्वालियर में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की गई। 1949 में आयुर्वेद महाविद्यालय और 1950 में कृषि महाविद्यालय स्थापित कर दिया गया। 1957 में महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय स्थापित किया गया, जो अब स्वयं डीम्ड यूनीवर्सिटी बन चुका है।

       ग्वालियर में 1964 में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद 1984 तक शिक्षा के क्षेत्र में एक ठहराव सा आ गया। लेकिन 1985 के बाद ग्वालियर के तत्कालीन सांसद माधवराव सिंधिया ने इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर को राष्ट्रीय यात्रा, पर्यटन प्रबंधन संस्थान मिला। उन्हीं के प्रयासों से ग्वालियर में अटलबिहारी बाजपेयी सूचना प्रबंधन तकनीकी का राष्ट्रीय संस्थान मिला। खान-पान प्रबंधन की राष्ट्रीय संस्था भी ग्वालियर आ गई।

       ग्वालियर में 59 साल बाद सरकार के प्रयासों से संगीत और कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना भी हो गई है। सरकार ने ग्वालियर में चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प भी व्यक्त किया है। हाल ही में कृषि मंत्री ने यहां पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की भी घोषणा की है।

       ग्वालियर की भौगौलिक स्थिति के साथ ही यहां उपलब्ध बेहतर आवागमन और आवास सुविधाओं को देखते हुए निजीक्षेत्र के अधिकांश शैक्षणिक संस्थान और कोचिंग संस्थान ग्वालियर पहुँच चुके हैं। ग्वालियर में अब कला विज्ञान, चिकित्सा, तकनीक, पर्यटन शारीरिक शिक्षा, प्रबंधन, फैशन, एन सी सी. ही नहीं बल्कि नागरिक उड्डयन की शिक्षा देने वाले राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की सुदृढ़  उपलब्ध है।

आई आई आई टी एम. सूचना तकनीक के क्षेत्र में आई क्रांति को देखते हुए ग्वालियर में भारत सरकार ने इंडियन इंस्टीटयूट आफ इन्फारमेशन टैक्नोलाजी एण्ड मैनेजमेण्ट की स्थापना ग्वालियर में की। 60 हैक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में फैले इस राष्ट्रीय संस्थान में सूचना तकनीक और प्रशिक्षण के साथ ही बहुउद्देश्यी कार्यशालाओं, शोध परामर्श तथा कामकाजी लोगों के लिये सतत शिक्षण का काम पिछले एक दशक से हो रहा है।

       पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जोड़ा जा चुका यह संस्थान पोस्ट ग्रेज्युएट, मैनेजेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम चला रहा है। इस संस्थान ने सूचना तकनीक एवं प्रबंधन के क्षेत्र में अपना अग्रणी स्थान बना लिया है। 

आई आई टी टी एम. पर्यटन एवं यात्रा पबंधन विषय पर देश में प्रशिक्षण की सुविधा गिनेचुने शहरों में उपलब्ध है। ग्वालियर में भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान 1983 से इस विषय से जुड़े छात्रों को स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री एव डिप्लोमा प्रदान कर रहा है। इस संस्थान में देश के नामचीन विशेषज्ञ तो हैं ही, साथ ही यहां हॉस्टल की भी बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है। यह संस्थान जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में स्वयं की इमारत में संचालित है।

      एम आई टी एस. ग्वालियर में तकनीकी शिक्षा का शुभारंभ आजादी के पहले ही उपलब्ध हो गया था। ग्वालियर के तत्कालीन शासक जीवाजी राव सिंधिया ने 1957 में माधव इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी एवं साइंसेज की स्थापना की थी। यहां बी ई. से लेकर पी एच डी. तक के अध्ययन-अध्यापक का प्रबंध है यहां सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक्स, कम्प्यूटर के अलावा कृषि इंजिनियरिंग की पढ़ाई की व्यवस्था है। संस्थान में फार्मा, पोलीटेक्नोलॉजी साइंस, वायो कैमिस्ट्री आदि विषयों के अध्ययन अध्यापन के इंतजाम किये जा रहे हैं।

जीवाजी विश्वविद्यालय- ग्वालियर के एज्युकेशन हब बनने में जीवाजी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना 1966 में की गई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने इस संस्थान का लोकार्पण किया था। यह विश्वविद्यालय लगभग प्रत्येक विषय के अध्ययन की उच्चस्तरीय व्यवस्था कर रहा है।

जीवाजी विश्वविद्यालय की अध्ययन  शालाओं में विज्ञान, अर्थशास्त्र, गणित, राजनीति  शास्त्र, के अतिरिक्त प्रबंधन, इंजिनियरिंग, पर्यटन के प्रथक संस्थान हैं। यह देश का अकेला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां प्रचलित विषयों के अलावा संगीत, ज्योतिष, योग, प्राकृतिक चिकित्सा जैसे पारंपरिक विषयों पर भी अध्ययन एवं शोध कराया जाता है।

संगीत शिक्षा - ग्वालियर सूचना प्रौद्यौगिकी का ही नहीं, संगीत शिक्षा का भी प्रचीन केन्द्र है। यहां पांच सौ साल पहले राजा मानसिंह तोमर ने पहली संगीत शाला स्थापित की थी। आज यहां माधव संगीत विद्यालय, चतुर संगीत महाविद्यालय, भारतीय संगीत महाविद्यालय के साथ ही  अब पूरा का पूरा संगीत विश्वविद्यालय स्थापित कर दिया गया है। संगीत को कैरियर बनाने के इच्छुक छात्र यहां विश्वविद्यालय में रह कर संगीत पर शोध के साथ ही गुरू शिष्य परंपरा के अन्तर्गत भी ज्ञानवर्धन कर सकते हैं। शीघ्र ही यहां एक ख्याल केन्द्र भी बन रहा है।

कृषि शिक्षा- कृषि प्रधान भारत देश में कृषि विज्ञान की शिक्षा के माध्यम से भी रोजगार की अनेक संभावनायें बनी हैं। ग्वालियर में अब तक कृषि विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा ही उपलब्ध थी, किंतु इसी साल से यहां राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ पी एच डी. की उपाधि हासिल की जा सकती है। मृदा परीक्षण, मृदा उपचार, उन्नत बीजों तथा कृषि उत्पादनों पर शोध और विकास के क्षेत्र में ग्वालियर जैसी व्यवस्थायें दूसरे क्षेत्रों में कम ही हैं।

शारीरिक शिक्षा - ग्वालियर शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण और अनुसंधान का देश का ही नहीं अपितु एशिया का सबसे बड़ा केन्द्र है। यहां 1957 में तत्कालीन शासकों द्वारा 150 हैक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय अब विश्वविद्यालय बन चुका है। इस संस्थान में सभी प्रमुख खेलों के प्रशिक्षण, शोध , खेल चिकित्सा, खेल पत्रकारिता, योगा सहित सभी प्रमुख विषयों के अध्ययन, अध्यापन की विस्वस्तरीय व्यवस्थायें हैं। इस संस्थान का बहुत तेजी से विकास हो रहा है। यहां स्नातक शिक्षा से लेकर पी एच डी. तक के अध्ययन का प्रबंध है।

चिकित्सा शिक्षा- ग्वालियर में उत्तर भारत का सबसे पुराना मेडीकल कालेज है, गजराराजा मेडीकल कालेज की स्थापना ग्वालियर में 1946 में की गई थी। इस चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़ा एक विशाल अस्पताल भी है यहां एम बी बी एस., एम एस., एम डी., के अध्ययन, अध्यापन की व्यवस्था सतत् चली आ रही है। राज्य सरकार यहां शीघ्र ही एक हजार विस्तर का अस्पताल और बनाने जा रहीं है।

       एलोपैथी के अलावा यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय भी पांच दशकों से संचालित है। इसी महाविद्यालय से जुड़ी आयुर्वेदिक फार्मेसी भी है।

कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान- ग्वालियर में 35 साल पहले स्थापित किया गया कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान अब रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित हो चुका है। यहां माइक्रोबायोलॉजी में स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ ही नर्सिंग का एक विशाल कालेज है। निजी क्षेत्र में दंतचिकित्सा के अतिरिक्त नर्सिंग प्रशिक्षण के अनेक संस्थान ग्वालियर में हैं जो देश-दुनियां को प्रतिवर्ष सैकड़ों नर्स तैयार कर दे रहे हैं।

महिला शिक्षा- म प्र. में महिला शिक्षा के क्षेत्र में ग्वालियर स्वतंत्रा प्राप्ति से पहले से अग्रणीय रहा है। यहां प्रदेश का सबसे बड़ा कमलाराजा कन्या विद्यालय है। इस महाविद्यालय में अलग- अलग संकाय की 7500 सीटें हैं। ग्वालियर में महिला पोलिटेक्नीक, महिला आई टी आई. , महिला बी टी आई. और महिला शिक्षा संस्थान है। एशिया का सबसे बड़ा एन सी सी. महिला प्रशिक्षण संस्थान ग्वालियर को पहचान बन चुका है। यहां पूरे वर्ष ओरियेंटेशन कार्यक्रम चलते रहते हैं।

       अब अभिभावक अपने बच्चों का कोचिंग और अध्ययन के लिये कोटा, जयपुर, पुणे या इंदौर भेजने के बजाय ग्वालियर में ही रखना पसंद करते हैं। यहां शिक्षा की उच्च गुणवत्ता कम दामों पर उपलब्ध है। इसे देखते हुए देश के अलग अलग हिस्सों के छात्र ग्वालियर की ओर रूख करने लगे हैं।

      ग्वालियर में प्रबंधन और इंजिनियरिंग के छात्रों के लिये व्यवहारिक प्रशिक्षण की सुविधायें भी बहुतायत में हैं। भिण्ड के मालनपुर और मुरैना के बानमौर औद्यौगिक क्षेत्र में मैकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, डेयरी, ऊर्जा, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक्स के एक से बढ़कर एक संस्थान है।

      निकट भविष्य में ग्वालियर में आई टी. पार्क के अलावा एस ई.जेङ की स्थापना भी होने वाली है। ग्वालियर के विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप में भी देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों ने अपनी इकाइयां स्थापित करने का निर्णय किया है।

       अब दुनिया का शायद ही ऐसा कोई विषय होगा जिसके अध्ययन और अध्यापन की सुविधा ग्वालियर में उपलब्ध न हो। ग्वालियर में राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरिंग कालेजों के साथ ही प्रबंधन के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के संस्थान उपलब्ध है। शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में तो ग्वालियर में एशिया का अनूठा संस्थान है। ललित कलाओं और संगीत के छात्रों के लिये अब कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। छात्र यहां अध्ययन, अध्यापन के साथ ही तानसेन समारोह के माध्यम से देश के   प्रतिष्ठित संगीतज्ञों से सीधे रूबरू हो सकते हैं। कला के प्रदर्शन के लिये यहां तानसेन कला वीथिका भी है।

       सारांश यह है कि ग्वालियर में गरीब से गरीब और अमीर से अमीर छात्रों के लिये अध्ययन की श्रेष्ठतम सुविधायें उपलब्ध हैं। पब्लिक स्कूलों में रूचि रखने वालों के लिये सिंधिया स्कूल तो यहां है ही। रेलवे और उड्डयन के विषयों से जुड़े उच्च स्तरीय संस्थान ग्वालियर को 'एज्यूकेशन हब' के रूप में मान्यता दिलाने में कामयाब रहे हैं।

       ग्वालियर के आई आई टी एम. और ए बी आई. आई आई टी एम में तो प्रवेश अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षाओं के जरिये होता है। इंजिनियरिंग, चिकित्सा एवं प्रबंधन संस्थानों में राज्यस्तर की प्रवेश परीक्षा म प्र. व्यवसायिक परीक्षा मण्डल की ओर से संचालित की जाती है। म प्र. के तकनीकी प्रबंधन और चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश एवं शिक्षा शुल्क अन्य शहरी और राज्यों के मुकाबले काफी कम हैं।

 

शनिवार, अगस्त 08, 2009

जिला रोगी कल्याण समिति की बैठक 10 अगस्त को

जिला रोगी कल्याण समिति की बैठक 10 अगस्त को

भिण्ड 7 अगस्त 2009

       जिला रोगी कल्याण समिति शासीनिकाय की बैठक दिनांक 10 अगस्त 09 को प्रात: 11 बजे कलेक्टर श्री के.सी. जैन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित की गई है। बैठक में जिला चिकित्सालय में हो चुके निर्माण कार्यो की समीक्षा, प्रस्तावित कार्यो की स्वीकृत एवं अन्य विषय अध्यक्ष की अनुमति पर चर्चा की जावेगी। बैठक में निर्धारित तिथि व समय पर उपस्थित रहना सुनिश्चित करेंगें।

 

जिले मे मात्र 188 चिकित्सक पंजीकृत , शेष के खिलाफ चलाया जावेगा अभियान

जिले मे मात्र 188 चिकित्सक पंजीकृत , शेष के खिलाफ चलाया जावेगा अभियान

भिण्ड 7 अगस्त 2009

       राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में फर्जी चिकित्सा व्यवस्था के उन्मूलन हेतु कलेक्टर श्री के.सी.जैन के निर्देश पर अपात्र चिकित्सकों की सूची तैयार की गई है। इण्डियन मेडीकल कॉसिल एक्ट 1956 की धारा 15(2) में उल्लेखित उपवन्धों के अनुसार प्रदेश में केवल वही व्यक्ति एलोपेथिक चिकित्सा पद्वति में चिकित्सा व्यवसाय कर सकता है जिसका नाम मध्यप्रदेश आयुविज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 11के अन्तर्गत संधारित राज्य चिकित्सक रजिस्टर में अंकित होकर वह व्यक्ति मध्यप्रदेश मेडीकल कॉसिल द्वारा एक चिकित्सा व्यवसायी के रूप में पंजीबद्व है।

       मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा एनसी गुप्ता ने बताया कि जिले में तीन प्रकार की चिकित्सा पद्वति के तहत चिकित्सक गण सेवारत है। एलोपैथिक चिकित्सा पद्वति भारतीय चिकित्सा पद्वति, होमियों पैथी एवं बायोकेमिक  चिकित्सा पद्वति के तहत कार्यरत है। जिले में कराये गये सर्वे के उपरांत 188 चिकित्सक गण पंजीकृत पाये गये है।

       विकास खण्ड लहार एंव रौन के अन्तर्गत डा गुरूदास विश्वास मिहोना, डा मेघसिंह कुशवाह रौन, डा कृपेन्द्र सिंह भदौरिया मछण्ड, डा केशव प्रसाद शर्मा रोन, डा किशन सिंह अरोरा मिहोना, डा महबूब खान मछण्ड, डा जगदीश जादौन रौन,डा राधामोहन गुप्ता मिहोना, डा इन्दल सिंह कुशवाह रौन, डा वीरेन्द्र सिंह कुशवाह मछण्ड, डा हरनारायण शर्मा दबोह, डा लाखन सिंह पाल रौन, डा दशरथ प्रसाद रौन अचलपुरा, डा उमाशंकर गुप्ता दबोह, डा बद्रीप्रसाद सेठ दबोह, डा अवध किशोर दबोह, डा श्रीमती सत्येन्द्र कौर दबोह, डा गुरूमुख चावला दबोह, डा सर्वेश कुमार कुशवाह मिहोना, डा मदनलाल अग्रवाल दबोह, डा गोविन्द शरण गुप्ता लहार, डा भगवती शरण दबोह, डा ओमप्रकाश कौरव दबोह, डा दुलालचन्द्र दबोह, डा केआर कुशवाह जमुआ, डा बालकराम गुप्ता लहार, डा सुरेश चन्द्र शर्मा लहार, डा विनोद कुमार तिवारी लहार, डा नारायण दास गुप्ता आलमपुर, डा ज्ञानस्वरूप शर्मा मेहरा, डा रामप्रकाश द्विवेदी आलमपुर, डा ओमप्रकाश श्रीवास्तव लहार, डा केशव सिंह आलमपुर, डा कृष्णस्वरूप पुरोहित लहार, डा सहादत्त खान आलमपुर, डा कृष्ण स्वरूप पुरोहित आलमपुर, डा भवर सिंह कुशवाह रौन, डा मोहन लाल मुसलिया लहार, डा गिरिन्द्र सिंह कुशवाह रौन, डा ज्ञानस्वरूप गोस्वामी लहार, डा नन्दीराम रहावली, डा नूरखान गौरी आलमपुर, डा दीपांकर विश्वास मिहोना आदि।

 विकास खण्ड भिण्ड के अन्तर्गत डा मनीलाल जैन बंगला बाजार, डा रामशंकर बौहरे अटेर रोड, डा राजेन्द्र भिण्ड, डा विनोद सक्सैना भिण्ड, डा एसएम माहेश्वरी भिण्ड, डा डीके जैन, डा मोहन दास अग्रवाल भिण्ड, डा सुशील कुमार गुप्ता, डा गुलाब सिंह, डा केएल माहेश्वरी भिण्ड, डा जगदीश सविता भिण्ड, जतनसिंह कुशवाह लहार, डा जयगोपाल सिंकदर भिण्ड, डा राममोहन श्रीवास्वत पावई, डा खेमराज शर्मा, डा अनिल कुमार शुक्ल,डा उमाशंकर, डा रामनारायण गुप्ता, डा कैलाश नारायण मिश्रा, डा टीकाराम नरवरिया, डा बाबूराम जैन, डा कैलाश नारायण चौधरी, डा रमेश चन्द्र जैन, डा एसके जैन भिण्ड, डा वीरेद सिंह कुशवाह दबोह भिण्ड, डा ब्रहम किशोर मिश्रा डा वासुदेव नरवरिया, डा हरीश चन्द्र छीगडा, डा जेएस चावला, डा एमके जैन, डा रमेश पाराशर भिण्ड, डा भवर सिंह पढोरा, डा वीरेन्द्र पाण्डे ऊमरी, डा नाथूराम राठौर ऊमरी, डा अबीब खान नयागांव, डा अनिल कुमार जैन, डा नरेन्द्र बाबू शर्मा, डा बलवीर सिंह अरोरा, डा ओमप्रकाश ओझा, डा स्वरूप चन्द्र जैन, डा टीकाराम गर्ग, डा अशोक कुमार जैन, डा मुन्नालाल जैन, डा रामप्रसाद सिंह कुशवाह, डा मानिक चन्द्र जैन, डा   अशोक कुमार खण्डेलवाल, डा राजेन्द्र सिंह जैन, डा रामदास खेंगर, डा सुशीला जैन, डा आशुतोष जोशी, डा अरविन्द दुबे, डा ब्रजेन्द्र कुमार दीक्षित, डा रामप्रकाश शुक्ला, डा मोहनदास तिवारी, डा रविन्द्र बाबू मिश्रा वनखण्डेश्वर रोड, डा शिवकुमार, डा सत्यदेव जैन, डा रामप्रकाश अग्रवाल महावीर  गंज,  डा  ग्यासीराम वर्मा अटेर रोड, डा रामवीर सिंह लक्षाकार ऐतहार, डा रामसेवक भदौरिया जवाहर कॉलोनी भिण्ड, डा सुनील कुमार शर्मा जेल रोड, डा बालक राम सराय का पुरा, डा शातिस्वरूप चौपडा भिण्डद्व डा अनिल कुमार जैन हाउसिंग कौलौनी, डा गजेन्द्र गंधर्व भिण्ड, डा कमल किशोर गुप्ता किला रोड भिण्ड आदि शामिल है।

       विकास खण्ड गोहद के अन्तर्गत डा मेहश शर्मा गोहद, डा रामनरेश सिंह तोमर गोहद चौराहा, डा मुन्नालाल वर्मा, डा एमपी लहारिया, डा राजीव गुप्ता, डा एसके शर्मा गोहद, डा देवेन्द्र सिंह कुशवाह मालनपुर, डा उदयवीर सिंह भदौरिया मालनपुर, डा अमर सिंह ओझा, डा रामअवतार शर्मा, डा बीएम दिनकर, डा कमल किशोर गुप्ता, डा बलवीर सिंह, डा राजेन्द्र कुमार शर्मा, डा नरेश वर्मा गोहद, डा रामनरायण शर्मा झांकरी, डा अशोक कुमार खरे, डा जसवीर सिंह अरोरा, डा एमपी गौड गोहद शामिल है।

       विकास खण्ड मेहगांव के अन्तर्गत डा इन्द्रसेन जैन अमायन, डा विनय कुमार जैन गोरमी, डा दिनेश कानिया गोरमी, डा जनवेद सिंह राठौर मेहगांव, डा चुन्नीलाल गोरमी, डा बादशाह सिंह गुर्जर मेहगांव, डा कालीचरण राठौर मेहगांव, डा रामसनेही कुशवाह मौ, डा रंजीत सिंह छावडा गोरमी, डा रशीद खान गोरमी, डा अशोक राजपूत मौ, डा उदयसिंह तोमर अमायन, डा सतीश तिवारी मेहगांव, डा गिरीश चन्द्र गोरमी, डा दीवान सिंह मेहगांव, डा ओमप्रकाश शिवहरे गोरमी, डा सुरेश कुमार शर्मा मौ, डा शोभा शास्त्री मेहगांव, डा लाखन सिंह नरवरिया गोरमी, डा बाबूलाल जैन अमायन, डा शांतिलाल जैन मेहगांव, डा सोवरन सिंह तोमर अकलोनी, डा नीलम सिंह गोरमी, डा गजेन्द्र नरवरिया कालीपुरा, डा इन्द्रसेन जैन अमायन, डा रामप्रकाश शर्मा अधियारी खुर्द, डा रतनचन्द्र जैन गोरमी, डा रामसेवक भदौरिया मेहगांव, डा प्रदीप श्रीवास्तव कनाथर, डा जनक सिंह नरवरिया गोरमी, डा श्रीनारायण त्रिपाठी मेहगांव, डा आनन्द सक्सैना मेहगांव, डा महिपाल सिंह चौहान सोनी, डा अशोक कुमार श्रीवास्तव अमायन, डा गिरिश शरण दीक्षित गोरमी, डा हुकुम सिंह नरवरिया गोरमी, डा कोकसिंह भदौरिया मेहगांव अकलोनी, डा नरेश कुमार शर्मा गोरमी, डा सुनम कुमार मिश्रा गोरमी, डा रामसनेही संखवार सोखीपुरा मेहगांव, डा बनवारी लाल कुशवाह मौ आदि शामिल है।

विकास खण्ड अटेर के अन्तर्गत डा दूधनाथ पाण्डेय फूफ, डा रामवीर लक्षाकार ऐतहार, डा जवर सिंह नरवरिया महापुर अटेर, डा महेश प्रसाद शुक्ल अटेर, डा रामबाबू श्रीवास्तव फूफ, डा रामगोपाल नरवरिया अटेर, डा शंकर सिह भदौरिया उदोतगढ, डा ब्रजकिशोर शर्मा पिथनपुरा, डा श्याम सुन्दर त्रिपाठी सुरपुरा, डा ब्रजनारायण त्रिपाठी फूफ, डा अशोक कुमार जैन परा, डा राजेन्द्र सिंह फूफ,डा प्रवेश कुमार फूफ, डा भरत सिंह नरवरिया पिथनपुरा, डा जुगलकिशोर दैपुरिया बरोही, डा अजमेर सिंह नरवरिया पुरा अटेर, डा मुनीर खान फूफ, डा राममोहन श्रीवास्तव पावई अटेर आदि शामिल है।

 

अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों हेतु 10 अगस्त को कलेक्टर द्वारा खुला मंच

अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों हेतु 10 अगस्त को कलेक्टर द्वारा खुला मंच

भिण्ड 7 अगस्त 2009

       कलेक्टर श्री के.सी. जैन ने निर्देश दिए है कि अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का निराकरण 10 अगस्त09 तक  सुनिश्चित किया जावेगा। आवेदक को उक्त अवधि में नौकरी का प्रस्ताव दिया जावे या शासन द्वारा निर्धारित नगद क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जावे। कलेक्टर द्वारा 10 अगस्त को अनुकम्पा नियुक्ति के सभी लंबित प्रकरणों के आवेदकों को खुले मंच पर आमंत्रित किया है। उनका मौके पर ही निराकरण किया जावेगा।

       कलेक्टर श्री केसी जैन ने कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जावे। इन प्रकरणों के निराकरण हेतु राज्य सरकार द्वारा भी विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये गये है उनका कडाई से पालन किया जावे। श्री जैन ने कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरण प्राथमिक  तौर पर संबंधित विभाग के द्वारा ही अपने विभाग में ही नियुक्ति दिए जाने का प्रयास किया जावे। जिन विभागों के पास पद रिक्त नही है उन प्रकरणों को ही कलेक्टर के पास भेजा जावे। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए संविदा शाला शिक्षकों के रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति की जावे। अगर आवेदक द्वारा संविदा शाला शिक्षक के रूप नियुक्ति लेने से इंकार किया जाता है तो उनसे लिखित में असहमति प्राप्त करे तथा शासन निर्देशानुसार क्षतिपूर्ति राशि के रूप में प्रदान की जावे।

       श्री जैन ने अनुकम्पा नियुक्ति प्रकरणों के परीक्षण हेतु जिला शिक्षा अधिकारी जिला संयोजक व जिला कोषालय अधिकारी संयुक्त समिति गठित की गई है।

       उन्होंने कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति हेतु नियमित पद रिक्त न होने एवं जिन आवेदकों द्वारा संविदा शाला शिक्षक के पद पर जाने की सहमति नही दी जाती है अथवा सहमति दी जाती है परंतु संविदा शाला शिक्षक के पद उपलब्ध नही होते है तो इस आशय की लिखित सहमति के आधार पर दिवंगत शासकीय कर्मचारी द्वारा अंतिम आहरित वेतन अनुकम्पा नियुक्ति के स्थान पर दिवंगत शासकीय सेवको के पति, पत्नी या उनके न होने पर परिवार के सदस्यों की सर्व सम्मति से नामांकित व्यक्ति को दिया जावे। इस प्रकार दिया जाने वाला अंतिम वेतन 05 वर्षो तक अथवा दिवंगत शासकीय सेवक की सेवानिवृत्ति की अवधि तक जो भी पहिले हो, तक जारी रखा जावेगा। इस अवधि 5 वर्ष अथवा सेवा निवृत्ति की अवधि के पश्चात मृतक कर्मचारी के नामांकित को नियमानुसार परिवार पेंशन की पात्रता होगी परंतु अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता नही होगी। यह लाभ तभी दिया जावेगा जब मृतक का  परिवार अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्रता रखता हो। जिन प्रकरणों में आवेदकों की पात्रता केवल चतुर्थ श्रेणी की है उनमें इस श्रेणी के पद उपलब्ध न होने पर अथवा चतुर्थ श्रेणी की भी योग्यता नही होने पर उन्हें अनुकम्पा नियुक्त के बदले एक मुश्त एक लाख रूपये की राशि संबंधित विभाग, कार्यालय द्वारा प्रदान की जाकर अनुकम्पा नियुक्त का प्रकरण निराकृत माना जाये, अनुकम्पा नियुक्ति हेतु नियमित पद उपलब्ध न होने एवं संविदा शाला शिक्षक के पद पर असहमति व्यक्त करने पर उनके नियुक्ति संबंधी आवेदन व अंतिम वेतन प्राप्त करने का क्लेम विभाग, कार्यालय द्वारा निरस्त कर नस्ती किए जावेगें।

 

देश तोड़ने की कोशिश में लगे दक्षिणपंथी विचारधारा के यह लोग

देश तोड़ने की कोशिश में लगे दक्षिणपंथी विचारधारा के यह लोग

निर्मल रानी, 163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा email: nirmalrani@gmail.com nirmalrani2000@yahoo.co.in nirmalrani2003@yahoo.com  फोन-98962-93341 

 

       भारत का प्रत्येक नागरिक अपने भारतीय होने पर गौरवान्वित महसूस करता है। निश्चित रूप से प्रत्येक देश का नागरिक अपने देश पर तथा अपने देश का वासी होने पर शायद उतना ही गर्व करता होगा जितना कि कोई भारतीय नागरिक करता है। परन्तु नि:सन्देह हमारे देश की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो हमें अन्य देशों से कुछ न कुछ अलग रखती हैं। उदाहरण के तौर पर दुनिया के किसी भी देश के बारे में हम आसानी से यह कह सकते हैं कि अमुक देश ईसाई देश है या मुस्लिम देश है अथवा बौद्ध बाहुल्य राष्ट्र है। परन्तु भारत सर्वधर्म सम्भाव की नीतियों पर चलने वाला एक ऐसा अनूठा देश है जिसकी दुनिया में पहचान ही अनेकता में एकता को लेकर है। भाषा के लिहांज से भी यदि देखा जाए तो जितनी भाषाएं हमारे देश में प्रचलित हैं, उतनी शायद अन्य किसी देश में नहीं। कहने का तात्पर्य यह है कि दुनिया में हमारे देश की छवि एक उदारवादी, वसुधैव कुटुम्बकम का परचम बुलंद करने वाले तथा अनेकता में एकता का प्रदर्शन करने वाले एक महान राष्ट्र के रूप में है, न कि किसी दक्षिणपंथी विचारधारा का अनुसरण करने वाले राष्ट्र के रूप में। हमारी इसी एकता ने हमें आज उस स्थान तक पहुंचा दिया है कि आज दुनिया के बड़े से बड़े देश हमें अपने बराबर का महत्व देने लगे हैं। शायद इंकबाल ने इसी सोच से प्रेरित होकर लिखा था कि- 'कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा॥' परन्तु दुर्भाग्यवश इसी देश के कुछ समाज विभाजक तत्व जोकि अपने चेहरों पर कभी खांटी हिन्दुत्व का चेहरा लगाए नंजर आते हैं तो कभी राष्ट्रवाद का ढोंग करते दिखाई देते हैं। कभी यह शक्तियां धार्मिक उन्माद फैलाने जैसी योजनाओं में संलिप्त दिखाई देते हैं तो कभी जातिवादी तनाव फैलाने में इन्हें सक्रिय देखा जा सकता है। इन्हें देखकर तथा इनकी राष्ट्रविरोधी व समाज विभाजक कारगुंजारियों को देखकर तो ऐसा लगने लगता है जैसे कि देश को इनके रहते हुए किसी दुश्मन की जरूरत ही नहीं है। विडंबना तो यह है कि समाज विभाजक व राष्ट्रविरोधी यह शक्तियां बिंदास तरींके से अपने ंजहरीले मिशन को आगे बढ़ाती जा रही हैं और हमारी सरकारें हैं कि आंखें मूंदकर यह सब कुछ देखती व सहन करती जा रही हैं। परिणामस्वरूप इन समाज व राष्ट्रविरोधी शक्तियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं तथा दिन-प्रतिदिन यह दक्षिणपंथी तांकतें और मंजबूत होती जा रही हैं। दक्षिणपंथी विचारधारा के परवान चढ़ने की अधिकांश ंखबरें दुर्भाग्यवश उन्हीं राज्यों से आ रही हैं, जहां इसी विचारधारा के लोग सत्ता पर काबिंज हो चुके हैं।

              उदाहरण के तौर पर गत् दिनों रक्षाबंधन के दिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के समीप एक प्रसिद्ध एवं प्राचीन हनोल मंदिर में राखी पूजा करने गई एक दलित महिला को वहां के पुजारियों ने खूब पीटा तथा उसे निर्वस्त्र कर दिया। उस अबोध दलित युवती का कुसूर केवल इतना था कि वह दलित समुदाय के लिए निर्धारित सीमा का उल्लंघन कर धक्का मुक्की की वजह से उस क्षेत्र में दो कदम आगे बढ़ गई थी जोकि तथाकथित उच्च जाति के लोगों के लिए निर्धारित था। देहरादून के कलसी राजस्व पुलिस चौकी में इस सिलसिले में मामला दर्ज कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही है। जबकि पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर तनाव फैलने का समाचार है। ंजरा सोचिए कि श्रद्धा और विश्वास से भरी एक युवती जो राखी पूजा के लिए मंदिर जाती है तथा अपने को उच्च जाति का समझने वाला कोई पाखंडी पुजारी उसे मारता-पीटता तथा निर्वस्त्र कर देता है, इस घटना से   आपको कहीं वसुधैव कुटुम्बकम या सर्वधर्म सम्भाव जैसी कोई बात नंजर आती है जो हमें यह संदेश दे सके कि यही हमारे राष्ट्र की विशेषता है? या फिर इस प्रकार की हरकतें करने वाले अपनी संकुचित, तुच्छ एवं घटिया सोच का प्रदर्शन कर अपने आप को समाज विभाजक तत्वों के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। देश के किसी न किसी कोने से लगभग प्रतिदिन ऐसे हादसों की ंखबरें आती ही रहती हैं जिनसे हमें इन दक्षिणपंथी सोच रखने वालों के घटिया कारनामों का पता चलता रहता है।

              इन दिनों कर्नाटक में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को बदनाम करने का ठेका श्री राम सेना नामक एक संगठन ने ले रखा है। कहा जाता है कि तोड़-फोड़, दंगा-ंफसाद, हंगामा आदि करने में सबसे आगे रहने वाले इस संगठन को सत्तारूढ़ भाजपा सरकार का संरक्षण प्राप्त है। पिछले दिनों इस कथित रामसेना के लोगों ने कर्नाटक में एक ऐसी ंजलालत भरी हरकत की जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। हुआ यह कि एक हिन्दू परिवार ने अपनी शादी का प्रबंध एक होटल में किया। इस विवाह समारोह में इस परिवार ने अपने घनिष्ठ केवल चौदह लोगों को आमंत्रित किया जिसमें उनके परिवार से घनिष्ठ संबंध रखने वाला एक मुस्लिम युवक भी शामिल था। इस विवाह समारोह की भनक जब राम सेना के लोगों को लगी तो उन्होंने समारोह स्थल पर जाकर मुस्लिम युवक के विवाह समारोह में शामिल होने पर आपत्ति जताई। परिणामस्वरूप विवाह आयोजकों ने आपत्ति की, इसके बाद अपने को राम सेना का सदस्य बताने वाले लोगों ने उस मुस्लिम युवक की जमकर पिटाई की। इतना ही नहीं बल्कि विवाह में भाग ले रहे जिन लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, उसे भी ंखूब पीटा।

              यह हाल है उस देश के कट्टरपंथी तथाकथित ढोंगी राष्ट्रभक्तों का जिस देश में दिल्ली में बने विशालकाय अक्षरधाम मन्दिर का उद्धाटन भारत रत्न डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम के कर कमलों द्वारा किया जाता है। न जाने उस समय इस विचारधारा के लोगा कौन से बिलों में घुस जाते हैं जब देश के अधिकांश भारतीय डॉ कलाम जैसे मुसलमानों पर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि हैदर अली व टीपू सुल्तान की जन्म व कर्मभूमि पर ऐसी समाज विभाजक शक्तियां केवल नाम, धन व सम्पत्ति कमाने के चक्कर में अपना विषैला फन फैला रही हैं। ऐसी बातें आम लोगों की चिंता में उस समय और इंजांफा कर देती हैं जबकि ऐसी ंखबर आती है कि इन समाज विरोधी तांकतों को राज्य सरकार का भी संरक्षण व समर्थन हासिल है।

              यही वे तांकतें हैं जो धर्म के नाम पर लोगों को मकान देने से मना करती हैं। इन्हीं शक्तियों द्वारा गुजरात में 'प्रयोगशाला' बनाकर अपने तरींके के राष्ट्रनिर्माण की कोशिशें की जा रही हैं। यही वह शक्तियां हैं जो भारतवासियों को कहीं धर्म के नाम पर बांट रही हैं तो कहीं जाति के नाम पर दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करती हैं। यही वे तांकतें हैं जो धर्म व जाति के नाम पर अलग कॉलोनियां बसाने का प्रयास कर रही हैं। यही वह तांकतें हैं जो अर्न्तधार्मिक व अर्न्तजातीय विवाहों का विरोध करती हैं। आधुनिकीकरण तथा उदारवाद जैसी सोच तो शायद इनके पास भी नहीं भटकती। कट्टरपंथी एवं रूढ़ीवादी सोच रखने वाले यह लोग वेशभूषा तथा बोलचाल में भले ही स्वयं को राष्ट्रभक्त या राष्ट्रप्रेमी बताने की कोशिश करें पर हंकींकत तो यह है कि यह शक्तियां केवल भारतीय समाज, राष्ट्रीय एकता की ही दुश्मन नहीं बल्कि यह पूरी मानवता की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। ंजरूरत है ऐसी सोच की जड़ों पर प्रहार करने की तथा ऐसे मिशन में लगे सभी संस्थानों व उपक्रमों को बंद करने की जहां नंफरत, विभाजन, द्वेष, हिंसा तथा दो दिलों को तोड़ने का पाठ पढ़ाया जाता हो। यदि समय रहते इन विचारों को सींचने वाले मिशन नेस्तनाबूद नहीं किए गए तो हमारे देश को तबाह करने के लिए राष्ट्रभक्ति के बाने में लिपटे दिखाई देने वाले यही भीतरी दुश्मन ही कांफी होंगे।

                                                                                      निर्मल रानी

 

शुक्रवार, अगस्त 07, 2009

तहसील स्तर पर कार्यरत पत्रकारों को अधिमान्यता

तहसील स्तर पर कार्यरत पत्रकारों को अधिमान्यता

ग्वालियर, 6 अगस्त 09/ राज्य सरकार ने तहसील स्तर पर कार्यरत पत्रकारों को अधिमान्यता प्रदान करने के लिये नियमों को सरल कर दिया है ।संशोधित नियमों के अनुसार तहसील मुख्यालय/प्रकाशन स्थल में पदस्थ पत्रकारों को जनसंपर्क संचालनालय द्वारा अधिमान्यता दी जा सकेगी। इसके लिये तहसील में समाचार पत्र की न्यूनतम दो सौ प्रतियों का प्रसार होना और आवेदक पत्रकार व पत्रकारिता के क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना जरूरी है। अधिमान्यता के लिये इच्छुक पत्रकार  आवेदन पत्र के साथ नियुक्ति पत्र या संबंधित जिला जनसंपर्क कार्यालय में पदस्थ अधिकारी की अनुशंसा होना जरूरी है।

 

शासकीय कार्यालयों में अधिकारी, कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करें, राज्य शासन के कड़े निर्देश

शासकीय कार्यालयों में अधिकारी, कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करें, राज्य शासन के कड़े निर्देश

Bhopal:Thursday, August 6

 

राज्य शासन ने सभी विभागों को अधीनस्थ शासकीय कार्यालयों का नियमित निरीक्षण तथा कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी प्रमुख सचिव, सचिव, शासन के समस्त विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, समस्त कलेक्टर्स तथा जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी कर कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करनें के लिये कहा है ताकि शासकीय कार्यालयों में आम जनता एवं पक्षकारों की समस्याओं का शीघ्र और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

शासन को यह शिकायत मिली है कि शासकीय कार्यालयों में आने वाले आवेदकों को कर्मचारियों की अनुपस्थिति से जनसामान्य की समस्याओं के निराकरण में कठिनाई होती है क्योंकि कर्मचारी न तो समय पर कार्यालय आते हैं और न ही उनके द्वारा अपने स्थान से अनुपस्थित रहने का कोई कारण बताया जाता है। यह स्थिति शासकीय कर्मचारियों के लिये विहित आचरण नियमों के सर्वथा विपरीत है। निर्देशों में ऐसे अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुये समुचित अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिये कहा है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रत्येक कार्यालय प्रमुख से यह अपेक्षा की है कि उनके अधीन कार्यालय अपने निर्धारित समय पर खुलें और वहीं सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने नियत स्थान पर जन सामान्य को उपलब्ध हों। यह भी कहा गया है कि शासकीय कर्मचारी कार्यालय प्रारंभ होनें के समय के पूर्व अपने स्थान पर उपस्थित हो जायें। कर्मचारी मध्यान्ह भोजन के लिये निर्धारित अवधि को छोड़कर सामान्य परिस्थितियों में कार्यालय बंद होने की अवधि तक अपने कार्य के लिये कार्यालय में उपस्थित रहें। सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करनें के निर्देश दिये हैं। निर्देशों से विभिन्न कर्मचारी संगठनों को अवगत कराते हुये उनसे भी इस संबंध में अपने स्तर पर आवश्यक कार्यवाही की अपेक्षा की है।

 

 

गुरुवार, अगस्त 06, 2009

राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर

राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर

·                    डॉ. डी.एस.चंदेल

·                    रजिस्ट्रार,राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय

 

 

      राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की स्थापना 19 अगस्त 2008 को राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय अध्यादेश 2008 के अन्तर्गत हुई थी । इस विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु कई वर्षों से प्रयास किये जा रहे थे । इसी संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान , माननीय श्री अनूप मिश्रा मंत्री म.प्र. शासन, माननीय श्री नरेन्द्र सिंह जी तोमर प्रदेश अध्यक्ष एवं अन्य स्थानीय सांसदों गणमान्य अतिथियों की उपस्थित में इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गई ।

       राजा मानसिंह तोमर की साहित्य एवं संगीत के प्रति अगाध श्रध्दा थी । उनके कार्यकाल में ग्वालियर में संगीत विद्यालय की स्थापना की गई , जो शायद भारत वर्ष का पहला संगीत विद्यालय था। राजा स्वयं भी संगीतज्ञ एवं कवि थे व संगीत की ध्रुपद शैली के प्रणेता भी ।  राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 विधानसभा द्वारा 11 फरवरी 2009 को पारित हुआ । इस अधिनियम के अन्तर्गत विश्वविद्यालय के संचालन के लिये प्रथम कुलपति, आचार्य पं. चित्तरंजन ज्योतिषी को विश्वविद्यालय स्थापना के लिये शीघ्र समस्त कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये गये हैं । इस अधिनियम के अन्तर्गत बीस सदस्यों वाली एक साधारण परिषद् होगी , जिसके अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री जी होंगे ।  विश्वविद्यालय की एक कार्य परिषद और विद्या परिषद भी होगी  जो कि विश्वविद्यालय का संचालन करेगी । इस विश्वविद्यालय का क्षेत्र संपूर्ण मध्यप्रदेश होगा।

       वर्तमान में विश्वविद्यालय के अन्तर्गत 24 महाविद्यालय संबध्दता प्राप्त हैं और इसके लिये जो पाठयक्रम हैं उनको निर्धारित करने के लिये विभिन्न विद्वानों की बैठकें संपन्न हो चुकी हैं । इस अधिनियम के अन्तर्गत संगीत संकाय, नृत्य संकाय, कला संकाय और अन्य संकाय जो परिनियम के अधीन होंगे का गठन किया गया है । यह भी निर्णय लिया गया कि नाटय संकाय को भी इसमें शामिल किया गया ।

      भोपाल में संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, श्री मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग,       श्री राम तिवारी संचालक संस्कृति विभाग, पं चित्तरंजन ज्येतिषी कुलपति जी की उपस्थिति में विश्विद्यालय के समग्र विकास पर चर्चा हुई । शैक्षणिक पदों का सृजन अन्य सुविधाओं पर विशेष रूप से चर्चा हुई और एक संबध्द कार्यकम के अन्तर्गत इसको पूर्ण करने का निर्णय लिया गया । इस विश्वविद्यालय में सभी संकायों में शोधकार्य, स्नातकोत्तर पाठयक्रम, स्नातक स्तर के पाठयक्रम , पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा एवं शार्ट कोर्स भी होंगे।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य -

1-     संगीत एवं कला संबंधी विद्या तथा ज्ञान का अभिवर्धन तथा उसका प्रसार और भारतीय समाज के विकास में रचनात्मक भूमिका सुनिश्चित करना ।

2-     छात्रों तथा अनुसंधनकर्ता विद्वानों में संगीत एवं कला के क्षेत्र में सुधारों के संबंध में बुध्दि-कौशल का विकास करके संगीत एवं कला तथा संबंधित क्षेत्र में समाज की सेवा करने के उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना ।

3-     संगीत से संबंधित ज्ञान की अभिवृध्दि के लिये अभिभाषणों, सेमीनारों, परिसंवादों और अधिवेशनों को आयोजित करन  और संगीत एवं कला संबंधी प्रक्रिया को सामाजिक विकास का प्रभावशाली उपकरण बनाना ।

4-     परीक्षायें आयोजित करना और उपाधियां तथा अन्य विद्या संबंधी विशिष्टताएं प्रदान करना ।

5-     ऐसे समस्त कार्य करना जो विश्वविद्यालय के समस्त उद्देश्यों या उनके से किसी भी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिये आनुषंगिक, आवश्यक या सहायक हैं ।

6-     विश्वविद्यालय का और गवेषणा, शिक्षा और शिक्षण के ऐसे केन्द्रों क, जो विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने हेतु आवश्यक है, प्रशासन तथा प्रबंधन करना ।

7-     संगीत एवं कला संबंधी ज्ञान या विद्या की ऐसी शाखाओं में, जैसा कि विश्वविद्यालय उचित समझे, शिक्षण हेतु उपबंध करना और गणवेषण के लिये संगीत एवं कला के ज्ञान की अभिवृध्दि तथा प्रसार के लिये उपबंध करना ।

8-                              अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, पुरस्कार तथा पदक संस्थित करना तथा प्रदान करना ।

 

बुधवार, अगस्त 05, 2009

आपराधिक प्रवृत्ति के एक व्यक्ति का शस्त्र लायसेंस निलंबित

आपराधिक प्रवृत्ति के एक व्यक्ति का शस्त्र लायसेंस निलंबित

भिण्ड 3 अगस्त 2009

       कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री के.सी.जैन ने पुलिस अधीक्षक भिण्ड की अनुशंसा पर आपराधिक प्रवृत्ति के एक व्यक्ति का शस्त्र लायसेंस निलंबित कर दिया है।

       कलेक्टर एंव जिला दण्डाधिकारी श्री जैन ने पुलिस अधीक्षक भिण्ड की अनुशंसा पर आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति श्री हनुमंत सिंह पुत्र लोटन सिंह राजपूत निवासी गुरियाची का  शस्त्र लायसेंस निलंबित कर दिया गया है।

 

पटवारी चयन के उम्मीदवारों के प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक और अवसर

पटवारी चयन के उम्मीदवारों के प्रमाण पत्रों की जाँच हेतु एक और अवसर

भिण्ड 4 अगस्त 2009

       पटवारी चयन परीक्षा 2008 के अन्तर्गत चयनित उम्मीदवार अपने मूल प्रमाण पत्र जमा नही करा सके है उन्हें दो दिन का अतिरिक्त समय दिया गया जिसके तहत उम्मीदवार 10 और 11 अगस्त को कार्यालय भू अभिलेख भिण्ड में जमा कर सकते है दिनांक 12 और 13 अगस्त को परीक्षण हेतु कार्यालय में उपस्थित हो सकते है।

       डिप्टी कलेक्टर श्री अमरेश श्रीवास्तव से प्राप्त जानकारी के अनुसार पटवारी चयन परीक्षा 2008 में शेष चयनित उम्मीदवार जो किसी कारण बस आज दिनांक तक अपने मूल प्रमाण पत्र जमा नही कर सके है वे चयनित उम्मीदवार अपने सभी प्रमाण पत्र जैसे मूल निवासी, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र आयु, कम्प्यूटर डिप्लोमा, ओ लेवल सर्टिफिकेट, यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्व विद्यालय द्वारा संचालित, पंजीकृत, मान्यता प्राप्त/ सम्बद्व संस्था से एक वर्षीय कम्प्यूटर डीसीए या कम्प्यूटर में उच्च शिक्षा रोजगार पंजीयन, विकलांगता आदि समस्त प्रमांण पत्रों की छाया प्रतियों के दो-दो सेट एवं व्यावसायिक परीक्षा मण्डल भोपाल द्वारा पटवारी परीक्षा में बैठने हेतु जारी प्रवेश पत्र मय दो पासपोर्ट साईज के फोटो, व्यावसायिक परीक्षा मण्डल से प्राप्त अंकसूची राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित कराकर दिनांक 10 अगस्त 09 एवं 11 अगस्त 09 तक कार्यालय भू अभिलेख भिण्ड में आवश्यक रूप से जमा करें तथा दिनांक 12 अगस्त 09 एवं 13 अगस्त 09 तक परीक्षण हेतु उपस्थित हो। सभी उम्मीदवारों को एक शपथ पत्र देना है, जिसका नमूना कलेक्टर आफिस (भू अभिलेख शाखा) से प्राप्त किया जा सकता है, या भिण्ड जिले की वेवसाइट पर देखा जा सकता है जिसका यूआरएल  .डण्त्दड्ड.द्र.ढ़दृध्.त्द या .डण्त्दड्ड.दत्ड़.त्द है।

       जॉच में अभिलेख त्रुटिपूर्ण/ असत्य होने पर उनके विरूद्व भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467 एवं 468 में विहित प्रावधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जा सकेगी तथा उनका चयन स्वत: निरस्त हो जायेगा।

 

मिलावटी खोआ बनाने वाली दूध डेरियों पर छापा

मिलावटी खोआ बनाने वाली दूध डेरियों पर छापा

भिण्ड 4 अगस्त 2009

       मिलावटी व प्रतिबंधात्मक घी, खोआ, दूध का विक्रय और संग्रहण करने वाले के खिलाफ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर छापामार कार्रवाई कलेक्टर श्री के.सी. जैन के नेतृत्व में की गई, जिसमें लगभग 10 क्विंटल खोआ, 13 बोरा दूध के पाउडर, सोडे के पैकिट 40 डिब्बी चूने की डिब्बी, 6 टीन वनस्पति तेल, डालडा, 40 खाली पीपे, भगोने, कड़ाई, बेचले जप्ती की कार्रवाई की गई। कलेक्टर द्वारा आकस्मिक रूप से ग्राम लावन, जेतपुर, मिरगपुरा में संचालित दूध डेरियों का दल बल के साथ निरीक्षण किया। कलेक्टर के साथ एसडीएम भिण्ड डीआर कुर्रे, नगर पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह छावई सहित अन्य अधिकारियों को भी उपस्थित थे।

       कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि भिण्ड जिले में खोआ और घी के अवैध तरीके से तैयार करने की खबरे विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हो रही थी, अमानक तरीकों से तैयार किया जा रहा खोआ, घी, दूध संपूर्ण मानव जाति के लिए प्राण घातक हो रहा है। एसे समान विरोधी तत्वों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है इसी कडी में आज भिण्ड विकास खण्ड के ग्राम लावन, जैतपुरा, मिरगपुरा में संचालित चार डेरियों का आकस्मिक निरीक्षण किया।

       निरीक्षण के दौरान ग्राम मिरगपुरा में अतरसिंह नरवरिया द्वारा संचालित डेरी का अवलोकन किया गया। अवलोकन के दौरान उक्त डेरी भट्टियां संचालित पाई गई जिनके पाउडर से बनाये दूध से खोआ तैयार करते हुए पाया गया। खोआ का परीक्षण किया उसके सम्बल लिख गये है डेयरी पर 40-40 किलो ग्राम के 10 बंडल खोआ भी जप्त किया गया। डेरी पर 13 बेरी में दूध का पाउडर के पैकिट जप्त किये गये है। इसके साथ ही चूने की डिब्बी, रिफाइन्ड तेल के टीन, दूध के ड्रम भी जप्त किये गये।

       इसीक्रम में ग्राम मिरगपुरा में ही लाखन सिंह नरवरिया की डेरी पर आकस्मिक छापा मारा गया। जिसमें मौके पर 7 पैकेट खोवा 40-40 किलो ग्राम, 80 किलो ग्राम 60 भगोने दूध, 30 खाली पीपें, 20 चुने की डिब्बी, 2 टंकी तैयार घी, वनस्पति तेल के टीन रिफाइन्ड तेल के तीन घर से जप्त किये गये है। इन दोनों डेरियों से प्राप्त सामग्री खाद्य औषधि प्रसंस्करण अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश जिला ड्रग इन्सपैक्टर को दिए है।

 

7 उपभोक्ता भण्डारों के विरूद्व अपराधिक प्रकरण दर्ज

7 उपभोक्ता भण्डारों के विरूद्व अपराधिक प्रकरण दर्ज

भिण्ड 4 अगस्त 2009

       सार्वजनिक वितरण प्रणाली में व्यवधान पैदा करने वाली 7 उपभोक्ता भण्डारों के खिलाफ आवश्यक बस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत पुलिस थाने में अपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।

       कलेक्टर श्री के.सी. जैन ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत गरीबों के हिस्सों का राशन और मिट्टी का तेल खाने या कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ भी जिला प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जिले में ग्रामीण क्षेत्र में 7 दुकानों द्वारा लगभग दो-तीन माह से सामग्री का वितरण नही किए जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही थी कलेक्टर श्री जैन के निर्देश पर खाद्य विभाग के दल द्वारा उक्त दुकानों की आकस्मिक जॉच की गई।

 

अवैध रेत परिवहन के विरूद्व कलेक्टर ने की छापामार कार्रवाई, एल.पी.जी. गैस से चलने वाले दो स्कूली वाहन भी जब्त

अवैध रेत परिवहन के विरूद्व कलेक्टर ने की छापामार कार्रवाई, एल.पी.जी. गैस से चलने वाले दो स्कूली वाहन भी जब्त

भिण्ड 4 अगस्त 2009

       कलेक्टर श्री के.सी. जैन के निर्देशन में जिले में रेत माफियाओं के खिलाफ चलाये जा रहे धर पकड़ अभियान के अन्तर्गत आज जिला और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा अवैध तरीके से परिवहन करने वाले 9 ट्रेक्टर, 3 डम्फर, 2 ट्रक व ओवर लोडिंग करने वाले 3 बसे, गैस से चलने वाली 2 जिप्सी वाहनों को जब्त किया गया है।

       कलेक्टर श्री के.सी. जैन द्वारा प्रात: 6 बजे से गौण खनिज का अवैध परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ शहरी और ग्रामीण क्षैत्रों में धर पकड़ प्रारंभ की। जिसके तहत एसडीएम भिण्ड श्री डीआर कुर्रे तथा नगर पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र छावई की संयुक्त दल द्वारा अवैध तरीके से रेत व गिट्टी का परिवहन करने वाले 9 ट्रेक्टर, 3 डम्फर, 2 ट्रक को जब्त कर सिटी कोतवाली में बंद करा दिया इसके बाद कलेक्टर के नेतृत्व में संयुक्त टीम द्वारा नगर में रेत व गिट्टी के वाहनों के संग्रहण केन्द्रों का निरीक्षण किया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि वाहनो को अवैध तरीके से भविष्य में खड़े न हो सके इसके लिए कार्रवाई ट्रेफिक पुलिस द्वारा की जावेगी। उन्होंने प्राइवेट बस स्टेण्ड के सामने पशु चिकित्सालय के परिसर में तथा भारौली रोड तिराहे पर संग्रहित अवैध रेत और गिट्टी को जब्त करने के निर्देश भी खनिज निरीक्षक को दिए। कलेक्टर ने कहा कि पुलिस द्वारा बनाये गये चेकपोस्ट खनिज निरीक्षक भी उपस्थित रहेगें तथा रेत व गिट्टी के अवैध परिवहन के विरूद्व नियमित रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जावेगी। कलेक्टर ने जब्ती की कार्रवाई के लिए राजस्व अमले को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

       कलेक्टर द्वारा भारौली तिराहे पर अवैध रूप से लकड़ी का परिवहन करने वाले ट्रेक्टर को भी जब्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध परिवहन को नियमित करने के लिए आकस्मिक जॉच की कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।

एल.पी.जी. गैस से चलने वाले दो स्कूली वाहन भी जब्त

       अवैध परिवहन के विरूद्व चलाए जा रहे अभियान के दौरान कलेक्टर के नेतृत्व वाले दल ने दो मारूति वैन वाहन एल.पी.जी गैस से चलते हुये पाये, इन मारूति वैन में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चे बैठे पाये गये। जॉच के दौरान एक मारूति वेन क्रमांक एमपी07-0504 जब्त की गई जो कि सनसिटी स्कूल के बच्चों को लेकर जा रही है उक्त वाहन को जब्त कर वेन मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया जा रहा है तथा स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जिला शिक्षाअधिकारी को दिए है।

       इसी प्रकार कलेक्टर द्वारा एक अन्य वाहन जो शासकीय नम्बर एमपी02-1862 नम्बर से संचालित की जा रही थी। इस वाहन मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश भी परिहवन अधिकारी को दिए है। इसी कड़ी में कलेक्टर द्वारा भारोली तिराहे पर मारूति वेन क्रमांक यूपी 78 4377 भी रमा सेन्ट्रल स्कूल के बच्चों को ले जाते जप्त की गई है। इन सभी वाहन चालकों व स्कूल संचालकों के विरूद्व कार्रवाई की जा रही है।